त्रिशा-गायत्री की जोड़ी को ब्रॉन्ज मेडल से करना पड़ा संतोष, विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में 15 साल बाद आया पदक

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नई दिल्ली में चल रही विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप 2026 में महिलाओं के डबल्स इवेंट के सेमीफाइनल मैच में भारत की त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी को तीन सेटों तक चले मुकाबले में चीन की नंबर-1 जोड़ी के खिलाफ मुकाबले में 2-1 से हार का सामना करना पड़ा। इस मैच में भारतीय महिला जोड़ी ने शुरुआत अच्छी की थी जिसमें उन्होंने पहले सेट को जीत लिया था लेकिन उसके बाद वह अपनी निरंतरता को बरकरार रखने में कामयाब नहीं हो सकी और अगले दोनों सेट गंवा दिए। इस हार के साथ उन्हें ब्रॉन्ज मेडल के साथ संतोष करना पड़ा जिसमें वह 15 साल बाद पहली भारतीय महिला जोड़ी बनी हैं जो वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में पदक जीतने में कामयाब हो पाई हैं, जिसमें इससे पहले 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने लंदन में कांस्य पदक जीता था।

पहला सेट में भारतीय जोड़ी ने की थी अच्छी शुरुआत

त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप 2026 में चीन की लियू शेंग शू और तान निंग जो डिफेंडिंग चैंपियन भी हैं उनके खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले की शुरुआत काफी शानदार तरीके से की थी, जिसमें आक्रामक शुरुआत करने के साथ 7-2 की बढ़त बना ली थी। चीन की लियू और तान की जोड़ी ने इसके बाद लगातार छह अंक लेकर वापसी की और ब्रेक तक 11-7 से आगे हो गईं थी। त्रीसा के शानदार क्रॉस-कोर्ट शॉट और आक्रामक खेल की मदद से भारतीय जोड़ी ने एकबार फिर से बढ़त बनाई और एक समय स्कोर 18-18 पर होने के बाद त्रीसा ने एक शानदार शॉट लगाया बढ़त दिला दी जिसमें इसके बाद भारतीय जोड़ी ने लगातार दो अंक लेकर पहला गेम 21-18 के अंतर से अपने नाम कर लिया।

दूसरे और तीसरे गेम में चीन की जोड़ी का दिखा दबदबा

पहला सेट जीतने के बाद सभी फैंस को उम्मीद थी कि त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद अपनी लय को बरकरार रखने में कामयाब रहेंगी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। चीन की नंबर-1 जोड़ी ने दूसरे सेट से शानदार वापसी करने के साथ उसे 21-13 के बड़े अंतर से अपने नाम करने के साथ मुकाबले को तीसरे और निर्णायक सेट में पहुंचाने में कामयाबी हासिल की। तीसरे सेट में भी चीनी जोड़ी का दबदबा देखने को मिला और उन्होंने इस सेट को एकतरफा 21-8 के अंतर से जीतने के साथ फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। वहीं भारत की त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी को कांस्य पदक के साथ संतोष करना पड़ा।

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