जर्मनी में काम कर रहे एक भारतीय व्यक्ति देव का अनुभव इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक महीने की लंबी छुट्टी के बाद ऑफिस लौटने के पहले दिन उन्होंने महसूस किया कि अच्छी टीम कितनी महत्वपूर्ण होती है। अपने इंस्टाग्राम वीडियो में उन्होंने कहा, ‘आज मेरी एक महीने की छुट्टी के बाद पहला दिन था। मैंने महसूस किया कि अच्छे सहकर्मी कितने जरूरी हैं। सभी लोग बहुत मददगार हैं।’
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @bin_devang नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में देव काम को घर लौटते हुए दिखाया गया है। उन्होंने बताया कि लगभग चार हफ्ते काम से दूर रहने के बाद वे थोड़े आउट ऑफ प्रैक्टिस हो गए थे। कई चीजें याद नहीं आ रही थीं। लेकिन उनके सहयोगियों ने न तो उन्हें असहज किया और न ही कोई दबाव डाला। बल्कि हर कदम पर मदद की। देव के शब्दों में, “ये लोग सच में अमेजिंग हैं। जहां भी मैं कुछ भूल रहा था, उन्होंने तुरंत मदद की और कहा- ‘कोई बात नहीं, बिल्कुल ठीक है, आपको इसके बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है।'”
यही है असली वर्क कल्चर
उन्होंने इस अनुभव को असली वर्क कल्चर बताया। देव ने कहा, ‘यह रियल वर्क कल्चर है। कुछ लोग मुझसे असहमत हो सकते हैं, लेकिन जहां मैं काम करता हूं वहां टीम काफी इंटरनेशनल है। कुछ जर्मन भी हैं। लेकिन सब इतने मददगार हैं कि लगता है हर कोई लेना कम और देना ज्यादा चाहता है। यही टीम को असली टीम बनाता है।’ उन्होंने जोर दिया कि अच्छे सहकर्मी रोजमर्रा की जिंदगी को बहुत आसान बना देते हैं। देव ने इस क्लिप को एक सरल कैप्शन के साथ साझा किया, जिसमें लिखा था, “जिंदगी अच्छी है।”
शख्स ने वीडियो के जरिए दिया संदेश
भारत में कई प्रोफेशनल्स छुट्टी लेने को चुनौतीपूर्ण मानते हैं। कभी-कभी लौटने पर काम का ढेर और दबाव का सामना करना पड़ता है। इसके विपरीत जर्मनी में सिस्टम ऐसा है कि सहयोगी जिम्मेदारियां संभालते हैं और लौटने वाले व्यक्ति को सहज महसूस कराया जाता है। देव की टीम इंटरनेशनल होने के बावजूद एकजुट और सहायक है। यह दिखाता है कि विविधता और सहयोग साथ-साथ चल सकते हैं। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि अच्छी टीम किसी भी नौकरी को बेहतर बना देती है। कुछ ने जर्मनी की कार्य संस्कृति की तारीफ की तो कुछ ने भारत में भी ऐसी सहयोगी माहौल की कामना की।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस पोस्ट पर दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आईं, जिन्होंने उनके अनुभव से खुद को जुड़ा हुआ महसूस किया। एक यूजर ने लिखा, ‘मैं पूरी तरह सहमत हूं।’
दूसरे ने टिप्पणीकी, ‘अच्छे सहकर्मी बहुत बड़ा फर्क ला सकते हैं।’
तीसरे ने कहा, ‘एक स्वस्थ कार्यस्थल ऐसा ही होता है।’
एक अन्य ने कहा, ‘हर किसी को ऐसा कार्यस्थल मिलना चाहिए।’
गौरतलब है कि, इससे पहले एक शख्स ने भारत और जर्मनी के बीच जॉब का अंतर स्पष्ट किया था।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
ये भी पढ़ें –
जर्मनी से 15 साल बाद भारत लौटना कैसा लगता है? इस महिला ने शेयर किया एक्सपीरिएंस; Video हुआ वायरल








