रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा (पीटी) परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंचती दिख रही है। पिछले कुछ दिनों में CID और रांची पुलिस ने लगातार कई बड़ी कार्रवाई की हैं। JPSC मुख्यालय में छापेमारी, पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के आवास पर तलाशी और फिर उनसे CID मुख्यालय में लंबी पूछताछ ने पूरे मामले को हाई-प्रोफाइल बना दिया है। अब तक कुल दस लोग गिरफ्तार हो चुके है। CID की कार्रवाई के दौरान जांच टीम ने आयोग की फाइलों, डिजिटल रिकॉर्ड, कंप्यूटर हार्ड डिस्क, मेरिट लिस्ट से जुड़े दस्तावेजों और अन्य अभिलेखों की जांच की थी।
किन आरोपों की जांच हो रही है?
14वीं JPSC परीक्षा को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अभ्यर्थियों का दावा है कि उन्हें उपलब्ध कराई गई मार्कशीट पर संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर एक कथित OMR शीट वायरल है। आरोप है कि उक्त परीक्षार्थी ने केवल 48 प्रश्न हल किए थे, लेकिन उसका चयनित परिणाम प्रकाशित हुआ। कुछ अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया है कि परीक्षा में उत्तर प्रदेश और हरियाणा के 400 से अधिक अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए हैं। जांच एजेंसियां इन्हीं बिंदुओं की पड़ताल कर रही हैं।
CID मुख्यालय में लंबी पूछताछ
छापेमारी के बाद लगातार दो दिनों से JPSC पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते से पूछताछ हो रही है। सूत्रों के अनुसार, उनसे भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा संचालन, मेरिट सूची और अन्य प्रशासनिक निर्णयों को लेकर सवाल पूछे गए। हालांकि पूछताछ की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
रघुवर दास ने उठाए सवाल, CBI जांच की मांग
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पूरे मामले को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में “घोटालों से बड़ा घोटाला जांच घोटाला बन गया है।” उनका कहना है कि केवल इस्तीफे लेकर मामलों को दबाने की कोशिश की जाती है और वास्तविक दोषियों तक कार्रवाई नहीं पहुंचती। उन्होंने पूरे प्रकरण की CBI से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। बता दें कि अब तक CID ने जांच की प्रगति, पर तीन विज्ञप्ति जारी की है।
सबसे अजूबा आरोप
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान एक नाम लगातार चर्चा में है। मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड के मार्केटिंग मैनेजर एवं अधिकृत प्रतिनिधि मनोज तिवारी पर आरोप है कि परीक्षा संचालन से जुड़े होने के बावजूद उन्होंने स्वयं कई प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लिया और कथित रूप से तकनीकी पहुंच का दुरुपयोग कर सफलता हासिल की। इन आरोपों की जांच फिलहाल संबंधित एजेंसियों के स्तर पर की जा रही है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023
आरोप है कि परीक्षा संचालन की नोडल एजेंसी से जुड़े होने के बावजूद मनोज तिवारी ने अनुक्रमांक 1237696 से संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 दी और कथित गड़बड़ी के जरिए पूरे राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त किया। बताया जाता है कि इसके बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के ज्ञापांक-1907, दिनांक 15 जुलाई 2024 के तहत उनका पदस्थापन उच्च विद्यालय सिमरा (देवघर) में किया गया।
स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा-2023
आरोप है कि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अंतर्गत आयोजित स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक (अंग्रेजी) प्रतियोगिता परीक्षा-2023 में भी मनोज कुमार तिवारी (पिता– सुखदेव तिवारी) ने अनुक्रमांक 10309146 से अनारक्षित श्रेणी में सफलता प्राप्त की। इस परीक्षा का परिणाम 19 जून 2024 को प्रकाशित हुआ था।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी (FSO) परीक्षा-2023
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत आयोजित खाद्य सुरक्षा अधिकारी (FSO) भर्ती परीक्षा-2023 में भी मनोज तिवारी के अनुक्रमांक 23180018 से सफल अभ्यर्थियों की सूची में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।
वन क्षेत्र पदाधिकारी (Forest Ranger) प्रारंभिक परीक्षा-2024
आरोप है कि JPSC द्वारा आयोजित वन क्षेत्र पदाधिकारी (प्रारंभिक) परीक्षा-2024 में अनुक्रमांक 24400147 के माध्यम से उन्होंने सफलता प्राप्त की। इस परीक्षा में उनकी OMR शीट में कथित हेरफेर और रंगाई के भी आरोप लगाए गए हैं। छात्र चार दिनों से धरने पर बैठे हैं। आज पूरे झारखंड से स्टूडेंट जुटेंगे, उनका संविधान मार्च है। इसके अलावा पांच तारीख को विधानसभा का घेराव करने की तैयारी है। (रिपोर्ट: मुकेश सिन्हा)
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