आपने मर्दो पर चाहे कर ली हो PHD, लेकिन उनकी 5 बड़ी मानसिक और शारीरिक समस्याएं आज भी नहीं समझ पाती महिलाएं!

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Men’s Mental Health Issues : महिलाएं अक्सर शिकायत करती हैं कि पुरुष उनके मन की बात नहीं समझते, लेकिन इस सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि खुद पुरुष अपने जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ी कई गंभीर बातों को कभी जाहिर ही नहीं होने देते. रिश्ते में रहते हुए महिलाएं भले ही अपने पार्टनर की हर छोटी-बड़ी आदत को जान लें या उन पर “PhD” ही क्यों न कर लें, पुरुषों से जुड़ी कुछ बुनियादी मानसिक और शारीरिक चुनौतियां आज भी अक्सर अनदेखी रह जाती हैं. आइए जानते हैं पुरुषों की उन 5 बड़ी मानसिक और शारीरिक समस्याओं के बारे में, जिन्हें वो अक्सर समाज या अपने पार्टनर के सामने भी जाहिर नहीं कर पाते:

सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि पुरुष अपनी इस घबराहट या असफलता के डर को कभी किसी के सामने स्वीकार नहीं कर पाते.(Canva)

1. ‘परफॉर्मेंस प्रेशर’ का मानसिक बोझ
बचपन से ही पुरुषों को सिखाया जाता है कि उन्हें परिवार का मुख्य सहारा बनना है. करियर, कमाई, और भविष्य को सुरक्षित रखने की यह अंतहीन दौड़ उनके दिमाग पर एक अनजाना दबाव बनाए रखती है. सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि पुरुष अपनी इस घबराहट या असफलता के डर को कभी किसी के सामने स्वीकार नहीं कर पाते, क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा करने से वे ‘कमजोर’ दिखाई देंगे. यह मानसिक तनाव धीरे-धीरे उनकी दिनचर्या और मिजाज को प्रभावित करने लगता है.

2. भावनाओं को छिपाने की मजबूरी (Emotional Masking)
“मर्द को दर्द नहीं होता” जैसी सोच ने पुरुषों की भावनाओं पर एक ताला लगा दिया है. दुखी होने पर रोना या अपनी भावनात्मक जरूरतों को खुलकर कहना आज भी समाज में पुरुषों के लिए आसान नहीं है. जब कोई पुरुष अंदर से टूट रहा होता है, तब भी वह बाहर से शांत या कभी-कभी अचानक चिड़चिड़ा दिखाई देने लगता है. महिलाएं अक्सर इस चिड़चिड़ेपन को उनका गुस्सा समझ लेती हैं, जबकि इसके पीछे गहरा अकेलापन या उदासी छिपी होती है.

3. ‘साइलेंट किलर्स’: टेस्टोस्टेरोन की कमी और हार्मोनल बदलाव
महिलाओं के मेनोपॉज पर तो खूब चर्चा होती है, लेकिन पुरुषों में उम्र बढ़ने के साथ होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव (जैसे टेस्टोस्टेरोन का घटता स्तर, जिसे एंड्रोपॉज भी कहा जाता है) पर कोई ध्यान नहीं देता. 30-40 की उम्र के बाद पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने लगता है. इसकी वजह से उनमें लगातार थकान, ऊर्जा की कमी, मांसपेशियों में कमजोरी, मूड स्विंग्स और यौन अनिच्छा जैसी समस्याएं होने लगती हैं. पुरुष इन शारीरिक बदलावों को शर्म के मारे किसी से साझा नहीं कर पाते.

4. दिल की सेहत और स्ट्रेस का छुपा हुआ कनेक्शन
बायोलॉजिकल और लाइफस्टाइल कारणों से पुरुषों में हृदय संबंधी बीमारियों (Heart Diseases) का जोखिम बहुत अधिक होता है. वे लगातार काम के तनाव, अधूरी नींद और अनुचित खान-पान को यह सोचकर नजरअंदाज करते रहते हैं कि “सब ठीक हो जाएगा.” सीने में हल्का दबाव, अत्यधिक पसीना आना या लगातार होने वाली थकावट को वे मामूली समझकर टाल देते हैं, जो आगे चलकर बड़ी शारीरिक आपातस्थिति का रूप ले लेती है.

5. मेंटल हेल्थ को लेकर शर्म की दीवार
डिप्रेशन, एंग्जायटी या बर्नआउट जैसी मानसिक समस्याएं किसी को भी हो सकती हैं, लेकिन पुरुष डॉक्टर या थेरेपिस्ट के पास जाने से सबसे ज्यादा कतराते हैं. उन्हें लगता है कि मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करने से उनकी योग्यता या पुरुषों वाली छवि पर सवाल उठेंगे. अपनी इस मानसिक तकलीफ से जूझने के लिए वे अक्सर अपनों से दूरी बना लेते हैं या खुद को काम में इतना उलझा लेते हैं कि उनकी यह समस्या और गंभीर हो जाती है.

एक मजबूत और हेल्‍दी रिश्ते के लिए केवल एक-दूसरे की खुशियों में शरीक होना काफी नहीं है. बल्कि अपने पार्टनर के इस ‘मौन’ और अनदेखे संघर्षों को समझना भी बेहद जरूरी है. अगर आपका पार्टनर अपनी भावनाएं या शारीरिक तकलीफें जाहिर नहीं कर पा रहा, तो उस पर दबाव बनाने के बजाय एक सुरक्षित और समझदारी भरा माहौल दें, ताकि वे बिना किसी झिझक के अपने दिल की बात कह सकें.



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