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Companionship in old age: आजकल सोशल मीडिया और गॉसिप गलियारों में एक नया शब्द खूब सुर्खियां बटोर रहा है—’सिल्वर रोमांस’ (Silver Romance). यह शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल हो रहा है जो उम्र के उस पड़ाव पर हैं जहाँ बाल चांदी जैसे सफेद होने लगते हैं, यानी 50 की उम्र पार करने के बाद. लेकिन क्या यह सिर्फ एक ट्रेंड है या बदलते समाज की एक गहरी हकीकत? आज हम डिकोड करेंगे कि आखिर क्यों आधी उम्र बीत जाने के बाद भी लोग नए सिरे से प्यार और साथ की तलाश कर रहे हैं.
‘सिल्वर रोमांस’ शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल हो रहा है जो उम्र के उस पड़ाव पर हैं जहाँ बाल चांदी जैसे सफेद होने लगते हैं, यानी 50 की उम्र पार करने के बाद. लेकिन क्या यह सिर्फ एक ट्रेंड है या बदलते समाज की एक गहरी हकीकत? आज हम डिकोड करेंगे कि आखिर क्यों आधी उम्र बीत जाने के बाद भी लोग नए सिरे से प्यार और साथ की तलाश कर रहे हैं.
क्या है ‘सिल्वर रोमांस’ का असली मतलब? सिंपल भाषा में कहें तो ‘सिल्वर रोमांस’ उस प्यार को कहते हैं जो जीवन के दूसरे पड़ाव यानी 50 से 70 वर्ष की आयु के बीच पनपता है. यह वह दौर है जब व्यक्ति करियर की भागदौड़ और बच्चों की जिम्मेदारी से लगभग मुक्त हो चुका होता है. यहाँ रोमांस का मतलब केवल शारीरिक आकर्षण नहीं, बल्कि एक ऐसे साथी की तलाश है जो आपकी खामोशी को समझ सके और ढलती उम्र के अकेलेपन में आपका हाथ थाम सके.
उम्र के प्रति बदलता नजरिया: एक जमाना था जब 50 की उम्र का मतलब ‘वानप्रस्थ’ या रिटायरमेंट. माना जाता था कि अब तो बस भगवान का नाम लेना है और नाती-पोतों के साथ खेलना है. लेकिन आज की पीढ़ी का नजरिया बदल गया है. ‘जेनरेशन एक्स’ और अब ‘अर्ली बुमर्स’ यह मानने लगे हैं कि खुशी पर किसी उम्र का कॉपीराइट नहीं होता. अगर मन में उमंग है, तो 60 की उम्र में भी डेट पर जाना या किसी के साथ कॉफी पीना पूरी तरह सामान्य है.
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‘एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम’ और अकेलेपन का अहसास: 50 की उम्र के बाद अक्सर घर में सन्नाटा पसरने लगता है. बच्चे पढ़ाई या नौकरी के सिलसिले में बाहर चले जाते हैं या अपनी वैवाहिक दुनिया में व्यस्त हो जाते हैं. मनोवैज्ञानिक इसे ‘एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम’ कहते हैं. ऐसे में जो लोग सिंगल हैं, तलाकशुदा हैं या जिन्होंने अपने जीवनसाथी को खो दिया है, उन्हें अकेलेपन का अहसास गहराई से चुभने लगता है. यही वह मोड़ है जहाँ एक ‘कंपैनियन’ यानी हमसफर की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस होती है.
क्यों बढ़ रहे हैं ‘ग्रे डिवोर्स’? सिल्वर रोमांस के बढ़ने की एक बड़ी वजह ‘ग्रे डिवोर्स’ (Gray Divorce) भी है. आजकल लोग उन रिश्तों को ढोने के बजाय खत्म करना पसंद कर रहे हैं जिनमें खुशियां नहीं बचीं. जब बच्चे बड़े हो जाते हैं, तो कपल्स को लगता है कि अब वे अपनी जिंदगी अपने तरीके से जी सकते हैं. तलाक के बाद फिर से प्यार की तलाश करना अब समाज में उतना ‘टैबू’ नहीं रहा, जितना पहले हुआ करता था.
डिजिटल दुनिया ने आसान बनाई राह : अकेलापन दूर करने के इस सफर में टेक्नोलॉजी एक बड़े मददगार के रूप में उभरी है. आज कई ऐसे डेटिंग ऐप्स और वेबसाइट्स हैं जो विशेष रूप से ‘सीनियर सिटीजन्स’ या 50+ आयु वर्ग के लिए बनाए गए हैं. यहाँ लोग अपनी पसंद, शौक और पुराने अनुभवों को साझा करते हुए नए दोस्त बनाते हैं. डिजिटल साक्षरता ने इस उम्र के लोगों के लिए घर बैठे हमसफर ढूंढना मुमकिन कर दिया है.
भावनात्मक सुरक्षा की तलाश: इस उम्र में प्यार की परिभाषा बहुत परिपक्व होती है. यहाँ कोई किसी को बदलने की कोशिश नहीं करता, बल्कि एक-दूसरे के अतीत को स्वीकार करता है. सिल्वर रोमांस में लोग भावनात्मक सुरक्षा (Emotional Security) की तलाश में होते हैं. वे चाहते हैं कि कोई ऐसा हो जिससे वे दिनभर की बातें कर सकें, साथ में सैर पर जा सकें या बस साथ बैठकर पुरानी यादें ताजा कर सकें. यह ‘सपोर्ट सिस्टम’ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी रामबाण साबित होता है.
समाज और परिवार की बदलती सोच: हैरानी की बात यह है कि अब कई मामलों में बच्चे ही अपने सिंगल पेरेंट्स के लिए साथी की तलाश कर रहे हैं. समाज अब यह समझने लगा है कि बुजुर्गों को भी भावनात्मक साथ की उतनी ही जरूरत है जितनी युवाओं को. ‘लोग क्या कहेंगे’ के डर पर ‘पेरेंट्स की खुशी’ हावी हो रही है. यही वजह है कि सिल्वर रोमांस अब छिपकर नहीं, बल्कि सम्मान के साथ स्वीकार किया जा रहा है.
हर उम्र में हक है खुश रहने का : आखिर में बात बस इतनी सी है कि दिल कभी बूढ़ा नहीं होता. ‘सिल्वर रोमांस’ इस बात का प्रमाण है कि इंसान को हर मोड़ पर साथ और सुकून की तलाश रहती है. अगर 50 के बाद किसी की जिंदगी में फिर से बहार आती है, तो इसे जीवन के उत्सव के रूप में देखना चाहिए. प्यार और दोस्ती का कोई ‘एक्सपायरी डेट’ नहीं होता, और यही इस खूबसूरत सफर की सबसे बड़ी सच्चाई है.(All Image Credit: pinterest)
April 14, 2026, 15:01 IST









