दही हांडी उत्सव से पहले महाराष्ट्र सरकार ने गोविंदाओं के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार करीब 1.60 लाख गोविंदाओं को 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर देगी, ताकि हादसे की स्थिति में उन्हें आर्थिक मदद मिल सके। सरकारी आदेश के मुताबिक, अगर किसी गोविंदा की दुर्घटना में मौत हो जाती है या उसके दोनों हाथ-पैर या दोनों आंखों को नुकसान पहुंचता है, तो 10 लाख रुपये का बीमा मिलेगा। बता दें कि पिछले साल राज्य सरकार ने दही हांडी उत्सव में भाग लेने वाले 1.5 लाख गोविंदाओं के लिए बीमा कवर की घोषणा की थी।
अगर दुर्घटना में एक हाथ, एक पैर या एक आंख को नुकसान होता है, तो 5 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। वहीं, स्थायी पूर्ण विकलांगता होने पर 10 लाख रुपये और स्थायी आंशिक विकलांगता की स्थिति में बीमा पॉलिसी के नियमों के अनुसार मुआवजा मिलेगा। इसके अलावा, अगर किसी गोविंदा को हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराना पड़ता है, तो इलाज का वास्तविक खर्च या अधिकतम 1 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
बीमा सुरक्षा के तहत मिलने वाली राशि
- आकस्मिक मृत्यु होने पर- 10,000,000 रुपये
- हाथ/पैर या दोनों आंखें खोने पर- 10,000,000 रुपये
- एक हाथ, एक पैर या एक आंख गंवाने पर- 5,00,000 रुपये
- स्थायी पूर्ण विकलांगता होने पर- 10,000,000 रुपये
- स्थायी आंशिक विकलांगता होने पर- पॉलिसी में तय प्रतिशत के अनुसार सहायता
- अस्पताल का खर्च- वास्तविक खर्च या अधिकतम 1,00,000 रुपये
प्रशिक्षित गोविंदाओं को मिलेगा लाभ
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का लाभ केवल ‘महाराष्ट्र राज्य गोविंदा एसोसिएशन’ द्वारा सत्यापित और प्रशिक्षित गोविंदाओं को मिलेगा। इसके लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा। यह बीमा केवल दही हांडी के दौरान मानव मीनार बनाते समय हुई दुर्घटनाओं पर लागू होगा। किसी अन्य कारण से लगी चोट या दुर्घटना इस योजना के दायरे में नहीं आएगी। साथ ही, अदालत द्वारा निर्धारित न्यूनतम आयु सीमा का पालन करना भी अनिवार्य होगा।
इस योजना का पूरा खर्च राज्य खेल विकास कोष से वहन किया जाएगा। इसके लिए सरकार प्रति गोविंदा अधिकतम 75 रुपये या उससे कम प्रीमियम वाली सरकारी बीमा कंपनी का चयन करेगी। महाराष्ट्र सरकार का मानना है कि इस पहल से दही हांडी उत्सव में भाग लेने वाले गोविंदाओं की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और दुर्घटना की स्थिति में उन्हें और उनके परिवारों को आर्थिक सहारा मिल सकेगा।
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