यह दास्तान उस दौर की है जब प्रयागराज (पहले इलाहाबाद) की आबो-हवा में अतीक अहमद के नाम का खौफ तैरता था। एक वक्त था जब अतीक का हुक्म ही कानून माना जाता था और उसकी तूती बोलती थी। लेकिन वक्त का पहिया जब घूमता है, तो सल्तनत और सिपहसालार, सब खाक में मिल जाते हैं। कुदरत का दस्तूर भी बड़ा अजीब है, जिस कुनबे की एक इशारे पर गर्दिशें बदल जाया करती थीं, आज वही परिवार बिखरे हुए तिनकों की तरह बर्बादी की दास्तान बयान कर रहा है।
उमेश पाल हत्याकांड के बाद कसा शिकंजा
पिछले तीन साल में इस परिवार पर आफतों का जो पहाड़ टूटा है, उसकी शुरुआत 24 फरवरी 2023 की उस खूनी दोपहर से हुई, जब प्रयागराज में विधायक राजू पाल हत्याकांड के चश्मदीद गवाह उमेश पाल और उनके दो सरकारी गनर को दिनदहाड़े भून दिया गया। इल्जाम लगा अतीक और उसके गैंग पर। इसके बाद कानून का शिकंजा कसना शुरू हुआ और अतीक के जुर्म के साम्राज्य की बुनियादें हिल गईं।
फिर शुरू हुआ अतीक के कुनबे की तबाही का वो सिलसिला, जिसने सभी को हैरत में डाल दिया:
- 27 फरवरी 2023: उमेश पाल हत्याकांड के महज तीन दिन बाद, वारदात में इस्तेमाल क्रेटा कार चलाने वाला अरबाज पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।
- 6 मार्च 2023: उमेश पाल पर पहली गोली चलाने वाला शूटर विजय चौधरी उर्फ उस्मान भी एनकाउंटर में ढेर हो गया।
- 13 अप्रैल 2023: 50 दिनों से फरार चल रहे अतीक के तीसरे बेटे असद अहमद और उसके साथी गुलाम को एसटीएफ ने झांसी में घेर लिया। दोनों तरफ से गोलियां चलीं और 5 लाख का इनामी असद मारा गया।
- 15 अप्रैल 2023: असद के जनाजे के महज दो दिन बाद, प्रयागराज का कॉल्विन अस्पताल गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। मीडिया के कैमरों के सामने, पुलिस हिरासत में हथकड़ी पहने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की तीन हमलावरों ने सरेआम हत्या कर दी। चंद सेकंडों में अतीक के उस खौफनाक दौर का अंत हो गया, जो दशकों तक कायम रहा।
लगा था कि तबाही का यह दौर शायद यहीं थम जाएगा, लेकिन मौत का साया इस परिवार का पीछा छोड़ने को तैयार न था। अब अतीक का बेटा अबान, जो हाल ही में बालगृह से रिहा हुआ था, जेल में बंद अपने भाई अली अहमद से मुलाकात करने जा रहा था कि रास्ते में एक खौफनाक सड़क हादसे ने उसकी जान ले ली।
अतीक अहमद के परिवार में अब कौन कहां?
तबाही के इस तूफान के बाद, कभी दहशत का पर्याय रहा अतीक का परिवार आज पूरी तरह बिखर चुका है। अतीक के कुनबे की मौजूदा तस्वीर कुछ यूं है:
- पत्नी शाइस्ता परवीन: उमेश पाल हत्याकांड में नामजद, लंबे समय से फरार और इनामी हैं।
- बड़ा बेटा उमर अहमद: लखनऊ जेल की सलाखों के पीछे अपनी सजा और मुकदमों का सामना कर रहा है।
- दूसरा बेटा अली अहमद: झांसी की जेल में बंद है।
- तीसरा और चौथा बेटा (असद और अबान): असद एनकाउंटर में मारा गया, तो अबान की सड़क हादसे में मौत हो गई।
- सबसे छोटा बेटा एहजम: बालगृह से रिहाई के बाद फिलहाल अपनी बुआ के पास गुमनामी की जिंदगी बिता रहा है।
अतीक अहमद के माफिया नेटवर्क का पतन
महज कुछ वर्षों में वह परिवार, जिसका नाम कभी सत्ता, खौफ और सियासी रसूख से जोड़ा जाता था, आज अदालती मुकदमों, जेल की सलाखों, फरारी के नोटिसों और निजी त्रासदियों तक सिमट कर रह गया है। कोई इसे एक माफिया नेटवर्क का पतन माने या राजनीतिक-अपराधिक प्रभाव वाली एक ताकतवर सल्तनत का अंत, अतीक अहमद के परिवार की यह दास्तान उत्तर प्रदेश के इतिहास के सबसे नाटकीय उलटफेरों में दर्ज हो चुकी है। यह कहानी इस कड़वे सच का बयान है कि जुर्म का रास्ता चाहे जितना भी बुलंद दिखे, उसका अंत हमेशा तबाही, तन्हाई और गुमनामी के अंधेरे में ही होता है।
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