मानसून सत्र के आखिरी दो दिन में अब क्या हो पाएगा? Coffee Par Kurukshetra में देखें पूरी चर्चा

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नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है और बचे हुए दो दिनों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। पूरे सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध, छात्रों के मुद्दे, नीट, राम मंदिर, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और विभिन्न विधेयकों को लेकर तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिरी दो दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच कोई चर्चा हो पाएगी या नहीं। इसी मुद्दे पर इंडिया टीवी के लोकप्रिय शो Coffee Par Kurukshetra में चर्चा हुई। इस चर्चा में शो के एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा, पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पाराशर के साथ-साथ गेस्ट के रूप में आलोक मेहता और विनोद अग्निहोत्री मौजूद रहे।

FCRA बिल पर चर्चा

चर्चा में सबसे प्रमुख मुद्दा FCRA बिल का रहा। सरकार इस बिल को लेकर गंभीर बताई गई, लेकिन विपक्ष की ओर से इसे वापस लेने की मांग की गई। बातचीत के प्रयास भी हुए। लोकसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू की ओर से बातचीत की कोशिशों के साथ राहुल गांधी और गृह मंत्री अमित शाह के बीच भी बातचीत कराए जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि, राहुल गांधी बिल के प्रावधानों पर बातचीत के लिए तैयार नहीं हुए और उनका रुख पहले जैसा ही रहा। ऐसे में अब FCRA बिल को संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC में भेजे जाने की संभावना पर चर्चा हो रही है।

सत्र को लेकर एक बड़ा सवाल सरकार के प्रदर्शन का भी है। एक तरफ विपक्ष यह दावा कर सकता है कि सरकार अपने कई बड़े विधायी एजेंडे को आगे नहीं बढ़ा पाई। दूसरी तरफ सरकार के पक्ष में यह तर्क है कि लोकसभा में कई विधेयक पारित हुए। चर्चा में नौ विधेयकों के पारित होने का उल्लेख किया गया, जिनमें सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या से जुड़े संशोधन, सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, बैंकर बुक एविडेंस, टैक्सेशन और अन्य कानून, विनियोग तथा ट्राइब्यूनल्स सुधार से जुड़े विधेयक शामिल हैं। हालांकि, इन विधेयकों पर चर्चा के लिए मिले समय को लेकर सवाल भी उठे।

सत्र के अंतिम दिनों में झारखंड के छात्र आंदोलन को भी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मोड़ के रूप में देखा गया। चर्चा में कहा गया कि दिल्ली के छात्र आंदोलन के बाद जिस तरह सरकार पर दबाव बना था, झारखंड में विपक्षी गठबंधन की सरकार के सामने छात्र आंदोलन आने से राजनीतिक दबाव का रुख कुछ बदला। इसके बाद सरकार को विपक्ष के खिलाफ जवाब देने का एक आधार मिला।

दोनों पक्षों के बीच बढ़ी तल्खी 

इसी बीच संसद के बाहर बीजेपी और विपक्ष के नेताओं के पोस्टर और प्रदर्शन ने दोनों पक्षों के बीच बढ़ती तल्खी को सामने रखा। चर्चा में यह भी कहा गया कि गृह मंत्री के सदन में जवाब देने की पेशकश के बाद विपक्ष के सामने बहस स्वीकार करने का सवाल खड़ा हो गया है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति भी इस पूरे घटनाक्रम का अहम हिस्सा रही। राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच बेहतर तालमेल की चर्चा हुई और इसे आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव की राजनीतिक जरूरत से जोड़कर देखा गया। राम मंदिर का मुद्दा भी इसी राजनीतिक तालमेल के संदर्भ में चर्चा में आया।

डिटेल में पूरी चर्चा देखने के लिए सबसे ऊपर दिये गये वीडियो पर क्लिक करें।

(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)

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