‘चौथे बच्चे के लिए कोई मैटरनिटी लीव नहीं’, हाईकोर्ट का साफ फैसला, खारिज कर दी याचिका

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक सरकारी कर्मचारी की मैटरनिटी लीव की मांग को खारिज कर दिया है। महिला अपने चौथे बच्चे के लिए मैटरनिटी लीव की मांग कर रही है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि नियमों के तहत उन्हें चौथे बच्चे के लिए अवकाश का लाभ नहीं दिया जा सकता। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने इस आधार पर याचिका का विरोध किया कि नियम के मुताबिक याचिकाकर्ता चौथे बच्चे के लिए किसी तरह की मैटरनिटी लीव के लिए पात्र नहीं है इसलिए कोई हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है और यह याचिका खारिज किए जाने योग्य है।

राज्य सरकार के वकील का बयान रिकॉर्ड में दर्ज करते हुए जस्टिस मंजू रानी चौहान ने 7 अगस्त को पारित अपने आदेश में कहा कि उक्त कथन को देखते हुए इस अदालत द्वारा किसी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

यह याचिका राज्य सरकार की महिला कर्मचारी शशि कुमारी द्वारा दायर की गई थी जिसमें संभल (भीम नगर) के प्रखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा 19 जून, 2026 को पारित आदेश को चुनौती दी गई थी। इस आदेश में चौथे बच्चे के लिए मैटरनिटी लीव का दावा खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने अदालत से संबंधित अधिकारी को 6 महीने का अवकाश दिए जाने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।

पहले मैटरनिटी लीव का लाभ ले चुकी है याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ता के वकील की दलील थी कि याचिकाकर्ता ने अन्य तीन बच्चों के जन्म पर किसी तरह का अवकाश नहीं लिया था और वह चौथे बच्चे के लिए मैटरनिटी लीव का लाभ लेने की पात्र है क्योंकि वह पहली बार यह लाभ लेने जा रही है। हालांकि, राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता पहले मैटरनिटी लीव का लाभ ले चुकी है।

क्या हैं मैटरनिटी लीव के नियम?  

  • महिला कर्मचारी को 180 दिन यानी करीब 6 महीने की मैटरनिटी लीव मिलती है।
  • यह सुविधा सामान्य तौर पर 2 से कम जीवित बच्चों वाली महिला कर्मचारी के लिए है यानी 2 या उससे ज्यादा जीवित बच्चों के बाद अगली डिलीवरी के लिए डिलीवरी के लिए सामान्य मैटरनिटी लीव का नियम लागू नहीं होता है।
  • मैटरनिटी लीव के दौरान कर्माचरी को उसके वेतन के बराबर ही लीव सैलरी मिलती है।
  • गर्भपात की स्थिति में, बच्चों की संख्या की परवाह किए बिना, पूरी सेवा अवधि में 45 दिन तक की मैटरनिटी लीव का प्रावधान है।

वहीं, बता दें कि इसी साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने बच्चा गोद लेने वाली महिलाओं के लिए ऐतिहासिक फैसला दिया है। अब किसी भी उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिलाओं को 12 हफ्ते तक मैटरनिटी लीव मिल सकेगी।

(इनपुट- PTI)

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Author: Kaushal kumar

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