संसद के मॉनसून सत्र के दौरान बुधवार को भी सरकार और विपक्ष के बीच डेडलॉक जारी रहा। हंगामे की वजह से दोनों सदनों में कामकाज प्रभावित हुआ। मॉनसून सत्र के दौरान सबकी निगाहें FCRA बिल पर लगी थी। हालांकि, सरकार ने इस बिल को JPC में भेजने का फैसला किया है। लेकिन विपक्ष ने सरकार के इस कदम पर भी आपत्ति जताई है। कांग्रेस और सपा ने FCRA बिल को अल्पसंख्यकों के खिलाफ बताया है तो वहीं, सरकार ने कहा है कि इस बिल का एक भी प्रावधान-अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। ऐसे में आइए जानते हैं कि जेपीसी के पास भेजे जाने के बाद FCRA बिल को लेकर आगे क्या-क्या होगा।
क्या होती है JPC?
दरअसल, संसद में दो तरह की समितियां होती हैं। एक होती हैं स्थायी समितियां और दूसरी तदर्थ समितियां। तदर्थ समिति एक अस्थायी समिति होती है जिसका कार्यकाल या काम पूरा होने के बाद उसे भंग कर दिया जाता है। संसद की संयुक्त समिति यानी JPC भी एक तदर्थ समिति होती है , जिसके पास FCRA बिल को भेजा गया है। जेपीसी की स्थापना संसद द्वारा किसी जरूरी विषय या विधेयक की गहनता से जांच करने के लिए की जाती है। आम तौर पर किसी विधेयक पर गतिरोध के बाद जेपीसी का गठन किया जाता है। इस समिति में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही दलों के सांसद शामिल होते हैं। इस समिति की अध्यक्षता लोकसभा के एक सदस्य द्वारा की जाती है जिसकी नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है।
JPC की पूरी प्रक्रिया को समझें
सबसे पहले किसी विधेयक को लेकर जेपीसी के गठन का प्रस्ताव पास किया जाता है। इसके बाद समिति के लिए सांसदों का चयन होता है, इस समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति की जाती है और फिर समिति का गठन होता है। लोकसभा स्पीकर समिति के सदस्यों के नाम का ऐलान करते हैं। इसके बाद समिति संबंधित विधेयक को लेकर पूरी समीक्षा करती है। इस दौरान समिति नियमित बैठकें करती है और रिकॉर्ड्स, दस्तावेज आदि मंगवाती है। जेपीसी समिति एक्सपर्ट, सामाजिक संगठनों और आम जनता से सुझाव भी मांगती है। जरूरत पड़ने पर समिति अलग-अलग जगहों का दौरा भी करती है। जेपीसी किसी भी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था को पेश होने के लिए भी कह सकती है। इसके बाद जेपीसी समीक्षा के आधार पर बिल में जरूरी संशोधन करती है और सदस्यों की वोटिंग के आधार पर अंतिम ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार करती है। इसके बाद इस रिपोर्ट को संसद में पेश किया जाता है। आम तौर पर जेपीसी को अपनी रिपोर्ट पेश करने के लिए 90 दिनों का समय मिलता है।
कब तक आएगी JPC की रिपोर्ट?
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को लोकसभा में ‘विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ यानी FCRA बिल को संसद की संयुक्त समिति (JPC) को भेजने का प्रस्ताव पेश किया। नियम के अनुसार, इस संयुक्त समिति में लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सदस्य शामिल होंगे। इस कमेटी को FCRA विधेयक की जांच करने और संसद के शीतकालीन सत्र 2026 के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक अपनी रिपोर्ट सौंपने को लोकसभा को सौंपने को कहा गया है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष क्या कह रहे हैं?
FCRA बिल को JPC को भेजे जाने पर कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम ने कहा- “उन्हें इस बिल को सिर्फ JPC के पास ही नहीं भेजना चाहिए, बल्कि बिल को वापस भी ले लेना चाहिए। कम से कम यह शोर-शराबे के बीच बिल पास करने से तो बेहतर ही है। कांग्रेस JPC में बिल का विरोध करेगी और आखिरकार बिल को रद्द करना ही होगा। इस बिल है का मकसद अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना है।”वहीं, सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने FCRA बिल पर कहा- “FCRA क्या है? FCRA में केवल अल्पसंख्यकों के खिलाफ टारगेट है। जितने भी महत्वपूर्ण बिल लाए जा रहे हैं, ये सभी अल्पसंख्यकों के खिलाफ आ रहे हैं। अगर FCRA आ सकता है तो दूसरे फंड्स भी मौजूद हैं, उनको लेकर नियम क्यों नहीं बन सकता?”
दूसरी ओर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में कहा- “FCRA संशोधन विधेयक का कोई भी प्रावधान अल्पसंख्यक संस्थानों को निशाना नहीं बनाता है; विपक्ष कुछ समुदायों को गुमराह करने के लिए अभियान चला रहा है। भारत कोई ‘बनाना रिपब्लिक’ नहीं है। विदेशी फंड खर्च करने के लिए नियम और कानून होने चाहिए।” सरकार ने इस बिल को देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ बताया है।
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“सरकार FCRA बिल को ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के पास भेज सकती है”, सूत्रों के हवाले से खबर









