कानपुर चिड़ियाघर की झील में हजारों मछलियों की मौत से मचा हड़कंप, प्रशासन और विशेषज्ञों की टीम ने उठाए बड़े कदम

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कानपुर में लगातार हो रही बारिश ने अब चिड़ियाघर की झील में जलीय जीवों के लिए भी मुश्किल खड़ी कर दी है। कानपुर प्राणि उद्यान की झील में अचानक बड़ी संख्या में मछलियों के मरने से हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही चिड़ियाघर प्रशासन और विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंची और हालात को संभालने के लिए तत्काल कदम उठाए गए।

प्रारंभिक जांच में मछलियों की मौत की सबसे बड़ी वजह झील के पानी में घुली ऑक्सीजन का स्तर तेजी से कम होना माना जा रहा है। पिछले कई दिनों से हो रही तेज बारिश के कारण झील में मिट्टी और गंदगी की मात्रा बढ़ गई। इसी वजह से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई और उसमें मौजूद मछलियों के लिए ऑक्सीजन की उपलब्धता घट गई।

मछलियों की संख्या क्षमता से ज्यादा

बताया जा रहा है कि झील में लंबे समय से मछलियों की नियमित हार्वेस्टिंग नहीं हुई थी। इसके चलते मछलियों की संख्या झील की प्राकृतिक वहन क्षमता से काफी अधिक हो गई। ऐसे में ऑक्सीजन की मांग बढ़ने के कारण स्थिति और गंभीर हो गई। इसके अलावा एचबीटीयू, बस स्टॉप और डिपो की तरफ से बारिश के दौरान तेज बहाव के साथ पानी और नालों का पानी झील में पहुंच रहा था। इससे पानी में गंदगी के साथ संभावित विषैले तत्वों की मात्रा भी बढ़ी, जिसने मछलियों के लिए खतरा और बढ़ा दिया।

हालात बिगड़ने के बाद चिड़ियाघर प्रशासन ने झील में बड़े पैमाने पर ऑक्सीजन टैबलेट डालकर पानी में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने की कोशिश शुरू की है। इसके साथ ही पानी के बहाव को बनाए रखने के लिए अलग-अलग स्थानों पर इंजन पंप लगाए गए हैं। इन पंपों के जरिए पानी का सर्कुलेशन बढ़ाया जा रहा है, ताकि ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर हो सके और पानी की स्थिति में सुधार आए।

बाहरी नालों का पानी रोकने की तैयारी

भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए बाहरी नालों और दूषित पानी को झील में पहुंचने से रोकने की कवायद भी शुरू कर दी गई है। इसके लिए संयुक्त सर्वे कराने की मांग की गई है। वहीं, चिड़ियाघर प्रशासन अपने स्तर पर बारिश के पानी के उन सभी प्रवेश बिंदुओं को चिन्हित कर उन्हें बंद करने की तैयारी कर रहा है, जहां से बाहर का पानी झील में पहुंच रहा है।

कानपुर प्राणि उद्यान के निदेशक कन्हैया लाल पटेल ने बताया कि अत्यधिक बारिश के कारण झील में मिट्टी और गंदलापन बढ़ गया, जिससे पानी में ऑक्सीजन का स्तर नीचे चला गया। उन्होंने कहा कि पानी का सर्कुलेशन बढ़ाने के लिए पंप लगाए गए हैं और ऑक्सीजन टैबलेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। बाहरी नालों का पानी झील में आने से रोकने के लिए एंट्री पॉइट्स को बंद करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

(रिपोर्ट: ज्ञानेंद्र शुक्ला)

 

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