Relationship Signs: रिश्ते में सब कुछ ठीक दिख रहा हो, फिर भी मन बार-बार बेचैन रहे तो इसे सिर्फ मूड समझकर टालना सही नहीं. कई बार हमारी बॉडी उन भावनाओं को पहले पकड़ लेती है, जिन्हें हम खुद स्वीकार नहीं कर पाते. जब रिश्ते में बदलने लगे अंदर का एहसास प्यार की शुरुआत अक्सर बहुत खूबसूरत होती है. पार्टनर का एक मैसेज दिन बना देता है, मिलने की छोटी-सी प्लानिंग भी खास लगती है और साथ बिताया समय जल्दी खत्म होता हुआ महसूस होता है, लेकिन समय के साथ रिश्तों में बदलाव आना भी सामान्य है.
कभी जिम्मेदारियों का दबाव बढ़ता है, कभी बातचीत कम होती है और कभी छोटी-छोटी नाराजगी धीरे-धीरे दूरी में बदलने लगती है.
ऐसे समय में कई लोग खुद को समझाते रहते हैं कि शायद यह सिर्फ एक खराब दौर है. वे अपनी परेशानी को नजरअंदाज करते हैं और रिश्ते को पहले जैसा बनाए रखने की कोशिश करते रहते हैं. मगर कुछ संकेत ऐसे होते हैं, जिन्हें बार-बार दबाना आसान नहीं होता. फेमस डेटिंग और रिलेशनशिप कोच आयुषी माथुर ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में ऐसे ही चार संकेतों की बात की है. उनके मुताबिक, कई बार शरीर हमारे दिमाग से पहले बता देता है कि रिश्ते में तनाव बढ़ रहा है.
1. पार्टनर से मिलने से पहले खुशी नहीं, घबराहट महसूस होना
किसी अपने से मिलने की सोचकर आमतौर पर मन में उत्साह आता है, लेकिन अगर पार्टनर से मिलने से पहले आपको बेचैनी, डर या घबराहट महसूस होने लगे, तो इस बदलाव पर ध्यान देना जरूरी है. खासकर तब, जब हर मुलाकात से पहले मन में यह डर रहने लगे कि कहीं फिर बहस न हो जाए या कोई बात बिगड़ न जाए. एक-दो बार ऐसा होना बड़ी बात नहीं है, लेकिन अगर यह एहसास लगातार बना रहता है, तो रिश्ते में चल रहे तनाव को समझने की कोशिश करनी चाहिए.
2. साथ समय बिताने के बाद असामान्य थकान
दिनभर काम करने के बाद थक जाना बिल्कुल सामान्य है. मगर अगर खास तौर पर पार्टनर के साथ समय बिताने के बाद आप मानसिक रूप से बहुत ज्यादा थके हुए महसूस करते हैं, तो इसकी वजह पर गौर किया जा सकता है. मसलन, बातचीत के बाद मन भारी रहना, अकेले बैठने का मन करना या ऐसा लगना कि साथ रहने से आपकी सारी एनर्जी खत्म हो गई. ये अनुभव बताते हैं कि रिश्ता इस समय आपके लिए सुकून से ज्यादा तनाव का कारण बन रहा है.
3. पार्टनर के सामने अपनी असली बात कहने में डर लगना
रिश्ते में अपनी पसंद, नापसंद और भावनाओं को खुलकर बताने की जगह होनी चाहिए, लेकिन अगर आप हर बात कहने से पहले कई बार सोचते हैं कि सामने वाला कैसे रिएक्ट करेगा, नाराज होगा या बात को गलत समझ लेगा, तो यह भी एक संकेत हो सकता है. धीरे-धीरे अपनी बातें छिपाना, हर बात पर सहमत होने का दिखावा करना या अपनी जरूरतों को दबाते रहना लंबे समय में रिश्ते को और मुश्किल बना सकता है.
4. पार्टनर के बिना ज्यादा हल्का और खुश महसूस करना
यह संकेत थोड़ा अलग है, लेकिन ध्यान देने लायक है, अगर अकेले रहने पर आपका मन ज्यादा शांत रहता है, दोस्तों के साथ आप ज्यादा खुलकर हंसते-बोलते हैं और आपको खुद के साथ समय बिताना ज्यादा अच्छा लगने लगा है, तो अपने अनुभव को समझने की कोशिश करें. खास बात यह है कि अकेले खुश रहना अपने आप में रिश्ते के खराब होने का सबूत नहीं है. हर व्यक्ति को निजी समय की जरूरत होती है. समस्या तब मानी जा सकती है, जब पार्टनर की मौजूदगी ही लगातार तनाव, दबाव या बेचैनी से जुड़ने लगे.
क्या इन संकेतों का मतलब रिश्ता खत्म करना है?
जरूरी नहीं. किसी भी रिश्ते का फैसला सिर्फ चार संकेतों के आधार पर नहीं किया जा सकता. कभी-कभी काम का दबाव, पारिवारिक परेशानी, पुरानी नाराजगी या आपसी गलतफहमी भी इन भावनाओं की वजह बन सकती है. इसलिए सबसे पहले खुद से ईमानदारी से सवाल करें कि आप इस रिश्ते में सम्मानित, सुरक्षित, सुने गए और सहज महसूस करते हैं या नहीं. पार्टनर से शांत तरीके से बात करना भी मदद कर सकता है, अगर परेशानी लंबे समय से बनी हुई है, तो किसी भरोसेमंद रिलेशनशिप काउंसलर की मदद लेना भी एक विकल्प हो सकता है.









