अमेरिका में रह रहे भारतीय दंपति सुहास और प्रियंका का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कंटेंट क्रिएटर दर्शना के साथ स्ट्रीट इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अमेरिका आने की तैयारी कर रहे युवा भारतीयों को क्या सलाह देंगे, तो सुहास ने सीधा जवाब दिया- “डोंट कम” यानी मत आइए। उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि आज भारत में भी उतने ही अवसर हैं जितने कभी अमेरिका में दिखते थे, और विदेश जाने की कीमत सिर्फ पैसे से नहीं मापी जा सकती।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @darshanaconnects नामक हैंडल से शेयर किय गया है। वीडियो में सुहास ने बताया कि जब वे और प्रियंका भारत छोड़कर अमेरिका आए थे, तब देश में अच्छी नौकरी पाना और बेहतर जीवन स्तर हासिल करना मुश्किल था। अमेरिका उस समय आसान विकल्प लग रहा था। मास्टर्स करो, जॉब मिल जाए और जिंदगी सेट। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। वे बोले कि, ‘अब भारत में भी वही सब कुछ हो सकता है जो यहां होता है। आप यहां जो करते हैं, वही भारत में भी कर सकते हैं।’ प्रियंका ने जोड़ा कि भारत में निवेश बढ़ रहा है और कई निवेशक देश की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
विदेश आने के नुकसान जानें
सबसे महत्वपूर्ण बात सुहास ने व्यक्तिगत नुकसान के बारे में कही। उन्होंने कहा कि परिवार और दोस्तों को छोड़ना, नए देश में नए रिश्ते बनाना और स्वीकार किए जाने की कोशिश करना बहुत बड़ी कीमत है। वे बोले कि, ‘मुझे अभी भी ऐसा नहीं लगता कि मुझे यहां स्वीकार किया गया है। मैं तो भारत में रहना पसंद करूंगा। अगर हो सके तो मैं वापस चला जाऊं।’ सुहास के ये शब्द वीडियो का सबसे चर्चित हिस्सा बन गए। उन्होंने चीन के छात्रों का उदाहरण दिया कि वे शिक्षा और अनुभव हासिल कर अपने देश लौट जाते हैं और वहां मूल्य पैदा करते हैं, जबकि कई भारतीय लंबे समय तक इंतजार करते रहते हैं।
विदेश आने की कीमत
वीडियो वायरल होने के बाद सुहास ने कमेंट्स में और विस्तार से जवाब दिए। उन्होंने लिखा कि सिर्फ सैलरी नहीं गिननी चाहिए। वीजा की चिंता, नियोक्ता पर निर्भरता, जीवनसाथी के करियर का रुकना, बच्चों के भविष्य की अनिश्चितता, माता-पिता से दूरी और स्थिरता का इंतजार…ये सब कीमत हैं। उन्होंने साफ कहा, ‘पूरी कीमत जानने के बाद मैं आज यह कदम नहीं उठाता।’ कई साल अमेरिका में बिताने के बावजूद वे महसूस करते हैं कि वापस लौटना अब और बड़ी कीमत चुकाना होगा, इसलिए वे यहीं हैं, लेकिन नए युवाओं को यही सलाह देते हैं कि सोच-समझकर फैसला करें।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस कपल के वीडियो को देखने के बाद कई यूजर ने इस पर प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने लिखा, ‘मैं पूरी तरह सहमत हूं।’
दूसरे ने कहा, ‘दोस्तों, अगर आपको कभी अमेरिका या किसी अन्य देश में आने का मौका मिले, तो जरूर आएं। यह एक ऐसा अनुभव होगा जिसका आपको कभी पछतावा नहीं होगा।’
कुछ यूजर्स द्वारा सुहास से यह पूछे जाने पर कि वह भारत वापस क्यों नहीं लौट आए, उन्होंने जवाब दिया कि ‘भारत का कठिन होना अपने आप अमेरिका जाने लायक नहीं बना देता। मैं यहां आने का खर्च उठा चुका हूं और यहां अपना जीवन बना चुका हूं। अब वापस लौटना एक और भारी कीमत चुकाने जैसा होगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं दोबारा वही फैसला लूंगा।’ उन्होंने कहा, ‘असली सवाल यह है: अगर मैं आज भारत में होता, तो क्या मैं अमेरिका चला जाता? मेरा जवाब है नहीं।’
ग्रीन कार्ड पॉलिस सबसे बड़ी दिक्कत
सुहास ने लिखा, ‘इमिग्रेशन सबसे बड़ा कारण है। भारतीयों के लिए, अच्छी नौकरी से ग्रीन कार्ड प्राप्त करना कोई आसान रास्ता नहीं है।’ उन्होंने भावी प्रवासियों से आग्रह किया कि वे वेतन से परे जाकर विदेश जाने की व्यापक लागतों पर विचार करें, जिसमें वीजा की अनिश्चितता, नियोक्ता पर निर्भरता, जीवनसाथी का करियर, बच्चों की आप्रवासन स्थिति, माता-पिता से दूरी और स्थिरता की प्रतीक्षा में बिताए गए वर्ष शामिल हैं। उन्होंने लिखा, ‘इसलिए सिर्फ वेतन को ही मत गिनिए। वीजा की चिंता, नियोक्ता पर निर्भरता, आपके जीवनसाथी का रुका हुआ करियर, आपके बच्चों के लिए अनिश्चितता, आपके माता-पिता से दूरी और स्थिरता की प्रतीक्षा में बिताए गए वर्षों को भी गिनिए। पूरी लागत पता होने पर मैं आज यह कदम नहीं उठाऊंगा।’
गौरतलब है कि, इससे पहले भारत में सस्ती दवाएं खरीदने वाली अमेरिकी महिला ने यूएस को खूब सुनाया था।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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