भारी बारिश के बाद धनबाद में तेज गड़गड़ाहट के साथ धंसी धरती, 7 घरों में आई दरार; दहशत में इलाके के लोग

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झारखंड के धनबाद में बाघमारा के छाताबाद में आज (शुक्रवार को) दोपहर लगभग 3 बजे एक बड़ा भू‑धंसान हुआ जिसमें कई घरों की दीवारों पर गहरी दरारें पड़ गईं और कुछ मकान ढहने के कगार पर पहुंच गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि जमीन के अंदर से तेज गड़गड़ाहट और कंपन महसूस हुआ, जिससे इलाके में अफरा‑तफरी मच गई और लोग घरों से बाहर निकल कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। फिलहाल अधिकारियों के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, कम से कम 7 घरों में गंभीर दरारें आ चुकी हैं और करीब 1 दर्जन मकान अलग-अलग स्तर पर प्रभावित बताए जा रहे हैं। अभी तक किसी बड़ी जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और राहत‑बचाव कार्य जारी है।

स्कूलों और सार्वजनिक भवनों में ठहराए गए लोग

घटनास्थल पर पहुंची पुलिस, अग्निशमन और जिला प्रशासन की टीमें प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने में जुट गईं। स्थानीय स्कूलों और सार्वजनिक भवनों को अस्थायी आश्रय के रूप में खोल दिया गया है। कंबल, पानी और त्वरित राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। कई परिवार घटनास्थल पर अपने कीमती दस्तावेज और जरूरी सामान निकालने में लगे थे, जबकि कुछ लोग दर्द और घबराहट की शिकायत कर रहे हैं। बचाव दल मकानों की संरचनात्मक स्थिरता का त्वरित आकलन कर रहे हैं ताकि किसी रिश्तेदार या पड़ोसी को खतरे में नहीं डाला जाए।

पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं

कोयलांचल की ढलानयुक्त मिट्टी और लगातार हो रही भारी बारिश भूमि की सहनशीलता घटा देती है। खनन गतिविधियों विशेषकर अनियंत्रित ओपन कास्ट से ढलानों पर कटाव बढ़ता है और भूमिगत खाली स्थान सतह की अस्थिरता को बढ़ाते हैं, जिससे मानसून में ऐसे बड़े‑बड़े धंसान तेजी से सामने आते हैं। यह इस मानसून में बाघमारा‑छाताबाद क्षेत्र का पांचवी बार ऐसी घटना घटी; इससे पहले भी कई स्थानों पर छोटी‑बड़ी धंसान के कारण घरों को खाली कराना पड़ा था और कुछ स्थानों को सरकारी तौर पर ‘डेंजर‑जोन’ घोषित किया जा चुका है।

प्रभावित परिवारों ने की आवास और आर्थिक मदद की मांग

झारखंड प्रशासन ने प्रभावित इलाकों का तात्कालिक सर्वे करने और खतरे की सीमा निर्धारित करने के निर्देश दे दिए हैं। जिला कलेक्टर ने कहा है कि भू‑वैज्ञानिकों, सिविल इंजीनियरों और खनन विभाग की संयुक्त टीमें मौके पर भेजी जा रही हैं ताकि जल‑निकासी, ढलान की मजबूती और खदानों के आसपास के कटाव की व्यापक जांच की जा सके। प्रशासन ने अस्थायी रहने की जगह और तत्काल मुआवजे की प्रक्रिया तेज करने का आश्वासन दिया है, लेकिन प्रभावित परिवारों का कहना है कि अब तक राहत और पुनर्वास में देरी उनकी चिंता बढ़ा रही है। कई परिवारों ने मांग की है कि सरकार उन्हें सुरक्षित आवास और आर्थिक सहायता दे ताकि वे बरसात के बाकी दिनों में सुरक्षित रह सकें।

अवैध गतिविधियों की स्वतंत्र जांच की अपील

स्थानीय नेताओं और नागरिक संगठनों ने भी त्वरित मदद और दीर्घकालिक पुनर्वास की मांग उठाई है। कुछ प्रतिनिधियों ने खनन कंपनियों के निरीक्षण और डेंजर‑जोन के आसपास हो रही अवैध गतिविधियों की स्वतंत्र जांच की अपील की है, जबकि अन्य ने प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा और रोजगार सुरक्षा दिलाने पर जोर दिया। नागरिक समूह राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं और प्रभावितों को अस्थायी कानूनी सलाह देने लगे हैं ताकि वे जरूरी कागजात सुरक्षित रख सकें और मुआवजे की मांग दर्ज करा सकें।

महज आपातकालीन राहत से नहीं चलेगा काम

विशेषज्ञ डेंजर जोन घोषित क्षेत्रों के पुनर्वास, खनन गतिविधियों पर कड़े पर्यावरणीय मानक और सतत जल‑निकासी तथा मिट्टी संरक्षण के उपायों पर तुरंत काम की वकालत कर रहे हैं। उनका कहना है कि केवल आपातकालीन राहत से काम नहीं चलेगा। लंबी अवधि की योजना में वनाच्छादन की बहाली, खदानों के रिहैबिलिटेशन और स्थानीय समुदायों के लिए चेतावनी तथा आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण शामिल होना चाहिए। प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि विस्तृत भू‑वैज्ञानिक रिपोर्ट और प्रभावितों के सत्यापन के बाद मुआवजा और पुनर्वास की रूपरेखा सार्वजनिक की जाएगी। इससे पहले भी अप्रैल महीने में धनबाद के बाघमारा क्षेत्र में जोरदार आवाज के साथ जमीन धंस गई थी। इसकी वजह से कई घर प्रभावित हुए थे।

कई वर्षों से लोग झेल रहे हैं भू-धंसान की समस्या

बाघमारा के छाताबाद में यह ताजा घटना उस व्यापक संकट का हिस्सा है जिसे स्थानीय लोग वर्षों से झेल रहे हैं। बरसात के मौसम में बढ़ती भू‑दृढ़ता की समस्या, खनन से उत्पन्न पर्यावरणीय दबाव और समय पर पुनर्वास की कमी से लोग परेशान हैं। जैसे ही प्रशासन और तकनीकी टीमें अपनी जांच पूरी करेंगी, हम प्रभावित परिवारों की शिनाख्त, मुआवजे की राशि और आने वाली नीतिगत कार्रवाइयों की विस्तृत रिपोर्ट पेश करेंगे। पाठकों से अनुरोध है कि जो भी लोग आसपास के डेंजर जोन में रहते हैं वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और किसी भी असामान्य दरार या धराशायी संकेत की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।

(इनपुट- कुंदन सिंह)

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