दुर्गापुर के गांधी मोड़ स्थित एक निजी अस्पताल के सामने कार्यरत एंबुलेंस चालक मानिक धीबर ने पूर्व पार्षद हीरालाल बाउरी पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि तृणमूल शासन के दौरान उन्हें हर महीने पूर्व पार्षद हीरालाल बाउरी को 10 हजार रुपये देने पड़ते थे। उनका दावा है कि डर के कारण वह हर महीने ऑनलाइन माध्यम से यह रकम पूर्व पार्षद हीरालाल को भेजते थे। लेकिन राज्य में सरकार बदलने के बाद उन्होंने यह रकम देना बंद कर दिया था। इसके बाद हाल ही में आरोपी ने कथित तौर पर नशे की हालत में उन्हें सड़क पर गिराकर उनसे मारपीट की। चालक का यह भी दावा है कि उन्हें धमकी दी गई कि दुर्गापुर पश्चिम के भाजपा विधायक लक्ष्मण चंद्र घोड़ुई भी उन्हें नहीं बचा पाएंगे।
इसके बाद उन्होंने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की मांग करते हुए प्रशासन से शिकायत की है। वहीं, पूर्व तृणमूल पार्षद हीरालाल बाउरी ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक साजिश बताते हुए खारिज कर दिया है। इधर, दुर्गापुर पश्चिम के भाजपा विधायक लक्ष्मण चंद्र घोड़ुई ने मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपी के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो पुलिस को तत्काल आरोपी को गिरफ्तार करना चाहिए।
घायल एंबुलेंस चालक ने ई-मेल के माध्यम से पुलिस के पास लिखित शिकायत भी दर्ज कराई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और इस पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है। आपको बता दें कि इससे पहले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने X पर एक पोस्ट करके बताया था, कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई हुई है। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी हाल में जबरन वसूली और भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और हम अपने प्रशासनिक तंत्र को पूरी तरह से साफ-सुथरा बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी प्रशासनिक विभागों को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि गैर-कानूनी तरीके से जबरन वसूली में शामिल पाए जाने वाले किसी भी सरकारी कर्मचारी को गंभीर कानूनी नतीजों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हम एक पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
(पश्चिम बंगाल से बिज्जू मंडल की रिपोर्ट)
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