संबंधों का रहस्य क्या है? कोई संबंध कैसे विकसित होता है? वास्तव में इसका आरंभ आकर्षण से होता है. जिससे आप आकर्षित होते हैं यदि वह वस्तु आपको आसानी से मिल जाए, तो आकर्षण समाप्त हो जाता है. लेकिन यदि उसे पाना थोड़ा कठिन हो, तो आपके मन में इसके प्रति प्रेम उत्पन्न हो जाता है. क्या आपने इस पर ध्यान दिया है? जब आप प्रेम में पड़ते हैं तो क्या होता है? थोड़ी देर बाद आप मांग करना आरंभ कर देते हैं. जब आप मांगने लगते हैं तो प्रेम कम हो जाता है. खुशी फीकी पड़ जाती है तो फिर आप कहते हैं, “ओह, मैंने इस संबंध में आकर गलती कर दी है.” फिर उस संबंध से बाहर निकलने के लिए संघर्ष और दर्द होता है. इससे बाहर निकलने के बाद, आप एक और संबंध में प्रवेश करते हैं और वही कहानी दोहराई जाती है.
आकर्षण और प्रेम को समझें
संबंधों में केवल आकर्षण नहीं बल्कि प्रेम की आवश्यकता है. आकर्षण में आक्रामकता है, प्रेम में समर्पण होता है. प्रेम और आकर्षण में यही अंतर है. हालाँकि आकर्षण पहला कदम होता है, लेकिन आप पहले कदम पर अधिक देर तक टिके नहीं रह सकते. आपको अगले कदम पर जाना होगा, यही प्रेम हैं. संबंधों के विषय में आप क्या जानना चाहते हैं? वास्तव में देखना है कि यह लंबे समय तक कैसे टिक सकता है. यही है ना? किसी भी संबंध में तीन चीजें आवश्यक हैं: सही धारणा, सही अवलोकन और सही अभिव्यक्ति. प्रायः लोग कहते हैं कि उन्हें कोई नहीं समझता. यह कहने के बजाय, “कोई मुझे नहीं समझता,” आप कह सकते हैं कि आप अपने को ठीक से व्यक्त नहीं कर पाए. यदि आप किसी स्पैनिश व्यक्ति से रूसी भाषा बोलते हैं, तो निश्चित रूप से वे समझ नहीं पाएँगे. सही धारणा तब हो सकती है जब आप स्वयं को दूसरे व्यक्ति के स्थान पर रखकर उस परिस्थिति को देखें.
सम्यक अवलोकन करना जरूरी
सम्यक बोध, और फिर सम्यक अवलोकन. हो सकता है आपने सही समझा हो लेकिन आप कैसे प्रतिक्रिया देते हैं? आप अपने भीतर कैसा अनुभव करते हैं? अपने मन का अवलोकन करना दूसरा महत्त्वपूर्ण पहलू है. आपके भीतर यह अवलोकन – संवेदना का, प्रवृत्तियों का, आपके भीतर के पैटर्न का अवलोकन भी आवश्यक है. दूसरे की धारणा; स्वयं का अवलोकन. और फिर, सही अभिव्यक्ति; स्वयं को सही तरीके से अभिव्यक्त करना. संपूर्ण जीवन केवल इन तीन चीजों का पाठ है: धारणा, अवलोकन और अभिव्यक्ति. आपकी हर गलती वास्तव में गलती नहीं है; यह जीवन के तीन महत्त्वपूर्ण पहलुओं को सीखने की प्रक्रिया है.
प्रेम में आदान-प्रदान
धारणा को विस्तृत करने की आवश्यकता है. किसी को बस बाहर से मत देखो. यदि कोई क्रोधी है, तो हम उसे उसके व्यवहार के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं. लेकिन यदि हम व्यापक दृष्टिकोण से देखें तो कई पहलू सामने आएंगे- वह व्यक्ति किसी कारण से क्रोधित है. हमारे दृष्टिकोण का प्रभाव हमारे संबंधों पर पड़ता है. न केवल किसी पर उसके कृत्य के लिए आरोप लगाना, बल्कि उन्हें समायोजित करना और उन्हें एक विशाल दृष्टिकोण से देखना. इससे सबंधों में सहायता मिलेगी. यह पहला रहस्य है. दूसरा पहलू है, देना. साथ ही दूसरों को भी देने की अनुमति दें. मान लीजिए कि आप सब कुछ कर रहे हैं लेकिन आप दूसरे व्यक्ति को बदले में कुछ नहीं करने देते, तो आप उन्हें उनके आत्मसम्मान से दूर ले जा रहे हैं. कभी-कभी लोग कहते हैं, “अरे देखो, मैंने इतना कुछ किया लेकिन फिर भी वह व्यक्ति मुझसे प्रेम नहीं करता.” क्यों? क्योंकि वे असहज अनुभव करते हैं. प्रेम तब होता है जब आदान-प्रदान होता है. और ऐसा तभी हो सकता है जब आप उन्हें भी आपके लिए कुछ करने का अवसर दें. इसके लिए थोड़ी कुशलता की आवश्यकता है. हमें दूसरे से भी बिना मांगे योगदान कराने में कुशल होना होगा. किसी से हमारे लिए कुछ करवाने का एकमात्र तरीका हम माँग कर ही जानते हैं. इसे और अधिक कुशलता से करना होगा. एक संबंध में, देखें कि दूसरा भी आपके जीवन में योगदान देता है ताकि वे पूरी तरह से बेकार अनुभव न करें. प्रेम के खिलने के लिए आत्मसम्मान आवश्यक है. यह दूसरा महत्त्वपूर्ण रहस्य है.
सांस लेने की जगह देनी चाहिए
संबंध का तीसरा पहलू है पर्याप्त अंतर बनाकर रखना. जब आप किसी से प्रेम करते हैं, तो आप उन्हें श्वास लेने की कोई जगह नहीं देते और यह घुटन भरा हो सकता है. घुटन प्रेम को समाप्त कर देता है. एक दूसरे के बीच अंतर का सम्मान करें. कुछ समय छुट्टी लें. प्राचीन लोग यह जानते थे. उनकी पत्नियों को साल में एक महीने के लिए उनकी माँ के पास भेजने की प्रथा थी. उस एक महीने में दोनों के भीतर तृष्णा उपजती थी. प्रेम को पनपने के लिए इच्छा या तृष्णा की आवश्यकता होती है और तृष्णा के लिए थोड़े अंतर की आवश्यकता होती है. यदि आप तृष्णा को नष्ट कर देते हैं, तो प्रेम नहीं बढ़ता है. आकर्षण खो जाता है. और चौथा पहलू यह है कि संबंध को मुख्य भोजन के रूप में नहीं बल्कि एक भोजन के अंत में खाए जाने वाले मीठे व्यंजन के रूप में माना जाना चाहिए . यदि आपका जीवन किसी लक्ष्य पर केंद्रित है, तो आप उस दिशा में आगे बढ़ें और रिश्ता साथ-साथ आगे बढ़ेगा. यदि आपका सारा ध्यान सिर्फ अपने संबंध पर है तो यह काम नहीं करेगा.
जीवन में कुछ सेवा करने का लक्ष्य रखें
साझा करने और सेवा करने से आपकी प्रेम करने की क्षमता, स्वीकार करने की क्षमता बढ़ेगी. और यदि आपने सेवा को एक लक्ष्य के रूप में रखा है और दोनों मिलकर उस दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो कोई समस्या नहीं होगी. एक सफल संबंध के लिए सेवा एक आवश्यक घटक है. और यदि संबंध में पाने से अधिक देने पर ध्यान देते हैं, तो यह एक अच्छा संबंध है. प्रायः हम ऊब जाते हैं. जब आप केन्द्रित होते हैं, और अपनी ज्वरग्रस्तता को दूर कर देते हैं, तो आप स्वयं से ऊबते नहीं हैं; तो आपका आकर्षण लंबे समय तक बना रहता है. यही केंद्रित होने का, हमारे भीतर गहराई से जुड़े रहने का रहस्य है. आनंद ने एक बार बुद्ध से पूछा, “बुद्ध, मैं 40 वर्षों से दिन-रात आपको देख रहा हूं. लेकिन यह क्या है? मैं आपसे ऊब नहीं सकता. हर दिन आप और अधिक आकर्षक हो जाते हैं. हर क्षण जब मैं आपको देखता हूं, आप सदैव नवीन हो जाते हैं. यही हमारी चेतना का स्वभाव है. मन कोई स्थिर झील नहीं है. यह एक बहती हुई नदी है. इसलिए जब हम नदी के साथ बहते हैं, तब हम वर्तमान क्षण में होते हैं. न अतीत के बारे में सोचते हैं न भविष्य के बारे में चिंतित होते हैं, हम नित नूतन होते हैं.








