शरीर कमजोर, हौसला मजबूत… अस्पताल में भी देवेंद्र महतो की भूख हड़ताल जारी, 10वें दिन भी अनशन पर

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झारखंड में परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन जारी है। JPSC-JSSC उम्मीदवारों के समर्थन में छात्र नेता देवेंद्र महतो की भूख हड़ताल अस्पताल में भी जारी है। रांची सदर अस्पताल में दूसरे दिन उनका इलाज चल रहा है। अस्पताल में सोमवार को 10वें दिन भी उनकी भूख हड़ताल जारी है। 

अस्पताल के बिस्तर पर उनकी हालत गंभीर है, लेकिन छात्रों के न्याय की लड़ाई का संकल्प अडिग है। शरीर कमजोर हो रहा है और दर्द भी बढ़ रहा है। डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं, लेकिन देवेंद्र महतो के मन में एक ही संकल्प है- जब तक झारखंड के विद्यार्थियों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष नहीं रुकेगा। बता दें कि सोमवार को विधानसभा मार्च में शामिल होने के बाद उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

JSSC-CGL परीक्षा में भी पेपर लीक का बड़ा खुलासा

वहीं, JPSC धांधली मामले में गिरफ्तार TDPL कंपनी के मैनेजर अभय तिवारी ने CID की पूछताछ में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। अभय तिवारी के दावों के मुताबिक, बहुप्रतीक्षित JSSC-CGL परीक्षा 2024 का पेपर भी लीक हुआ था। CID पूछताछ में सामने आया है कि सितंबर 2024 में हुई JSSC-CGL परीक्षा से ठीक पहले प्रश्नपत्र लीक कर दिया गया था।

सूत्रों के अनुसार, इस खेल में करीब 15 से 45 अभ्यर्थियों को निशाना बनाया गया और प्रति छात्र 12-12 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम वसूली गई। इस तरह कुल 1.80 करोड़ रुपये की अवैध वसूली का दावा किया गया है। परीक्षा से एक दिन पहले (20 सितंबर 2024) बोकारो में एक शख्स के घर करीब 45 अभ्यर्थियों को इकट्ठा किया गया था।

आरोपी अभय तिवारी ने पूछताछ में कबूल किया है कि उसने अभ्यर्थियों को करीब 65 महत्वपूर्ण सवाल और उनके जवाब रटवाए थे, ताकि परीक्षा में उनका चयन सुनिश्चित हो सके।

कब और कैसे हुआ खेल?

JSSC-CGL की परीक्षा 21 और 22 सितंबर 2024 को आयोजित की गई थी। तय शेड्यूल से ठीक एक दिन पहले यानी 20 सितंबर को ही पेपर लीक कर दिया गया था, जिसके बाद सॉल्वर गैंग और बिचौलियों ने पैसों के लेन-देन वाले छात्रों को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर उत्तर रटाए।

CID की पूछताछ में अभय तिवारी ने पेपर लीक सिंडिकेट से जुड़े दो मुख्य किरदारों के नाम उजागर किए हैं।

  • मिथिलेश सिंह: यह पटना (बिहार) का रहने वाला है और ‘वेबेल’ नाम की प्रिंटिंग प्रेस कंपनी का मालिक है। इसी प्रिंटिंग प्रेस में परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों की छपाई होती थी। मिथिलेश ही इस पूरे लीक सिंडिकेट का मुख्य स्रोत माना जा रहा है।
  • उमाकांत प्रमाणिक: यह झारखंड के खूंटी जिले का रहने वाला है और मिथिलेश सिंह का बेहद करीबी सहयोगी है।

अभय तिवारी इन्हीं दोनों के सीधे संपर्क में था और यहीं से प्रश्नपत्र हासिल करके अभ्यर्थियों तक पहुंचाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि अभय तिवारी ने सिर्फ दूसरों से पैसे लेकर उन्हें पास नहीं कराया, बल्कि अपने इस शातिर नेटवर्क के दम पर खुद भी JSSC-CGL परीक्षा पास करके सरकारी नौकरी हासिल कर ली। इतना ही नहीं, उसने इसी फर्जीवाड़े के जरिए अपने भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा तिवारी का भी चयन करा दिया था।

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Author: Kaushal kumar

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