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हाल ही में अभिनेत्री तमन्ना भाटिया के ‘दूधिया बदन’ पर दी गई उनकी सफाई ने इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है. अन्नू कपूर का तर्क है कि अगर वह इसी बात को अंग्रेजी में ‘Milky Body’ कहते, तो शायद किसी को बुरा नहीं लगता. लेकिन सवाल भाषा का नहीं, बल्कि उस ‘बारीक लकीर’ का है जो एक हेल्दी कॉम्प्लीमेंट (सराहना) और भद्दे कमेंट (अश्लीलता) के बीच होती है. खासकर वर्कप्लेस पर.
तारीफ और अश्लीलता के बीच की यह बहस हमें यह सिखाती है कि हमें अपने शब्दों को लेकर और अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है.
Annu Kapoor Controversial Remark : बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अन्नू कपूर अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं, लेकिन कभी-कभी यही बेबाकी विवादों की सीमा लांघ जाती है. हाल ही में अभिनेत्री तमन्ना भाटिया के ‘दूधिया बदन’ पर दी गई उनकी सफाई ने इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है. अन्नू कपूर का तर्क है कि अगर वह इसी बात को अंग्रेजी में ‘Milky Body’ कहते, तो शायद किसी को बुरा नहीं लगता.लेकिन सवाल भाषा का नहीं, बल्कि उस ‘बारीक लकीर’ का है जो एक हेल्दी कॉम्प्लीमेंट (सराहना) और भद्दे कमेंट (अश्लीलता) के बीच होती है. खासकर वर्कप्लेस (Workplace Professionalism for Women) पर, जहाँ प्रोफेशनल डिग्निटी सबसे ऊपर होनी चाहिए.
तारीफ और अश्लीलता के बीच की यह बहस हमें यह सिखाती है कि हमें अपने शब्दों को लेकर और अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है.
क्या भाषा बदलने से सोच बदल जाती है?
अन्नू कपूर का यह कहना कि ‘हिंदी और अंग्रेजी’ के बीच दोहरा मापदंड है, असल मुद्दे से ध्यान भटकाने जैसा है. चाहे शब्द हिंदी का हो या अंग्रेजी का, जब आप किसी महिला सहकर्मी के हुनर या उसके काम को छोड़कर उसके शरीर के रंगों या बनावट पर टिप्पणी करते हैं, तो उसे ‘तारीफ’ नहीं बल्कि ‘ऑब्जेक्टिफिकेशन’ (वस्तुकरण) कहा जाता है. फिल्म सेट भी एक वर्कप्लेस है, और वहां एक प्रोफेशनल आर्टिस्ट के शरीर पर सार्वजनिक टिप्पणी करना किसी भी भाषा में असहज करने वाला ही है.
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