दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए महिलाओं को नौकरी का झांसा देकर मानव-तस्करी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह के सदस्य पीड़िताओं को स्पा सेंटरों में अच्छी तनख्वाह और बेहतर जीवनशैली का लालच देते थे। इसके बाद उन्हें दिल्ली से दूसरे राज्यों में ले जाकर स्पा संचालकों को सौंप दिया जाता था। पुलिस ने दिल्ली, गुजरात और उत्तर प्रदेश में कार्रवाई करते हुए 10 पीड़िताओं को मुक्त कराया है।
लापता लड़की से खुला मामला
पुलिस के मुताबिक, 9 मई को दक्षिण पुरी से 15 वर्षीय लड़की के लापता होने के बाद जांच शुरू हुई। उसकी मां की शिकायत पर आंबेडकर नगर थाने में मामला दर्ज किया गया। जांच में पता चला कि लड़की से सोशल मीडिया के जरिए संपर्क किया गया था और उसे अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी और बेहतर जीवनशैली का लालच दिया गया था।
गुजरात में मिला सुराग
तकनीकी निगरानी और डिजिटल साक्ष्यों की जांच से पता चला कि लड़की को गुजरात के मुंद्रा ले जाया गया था। पुलिस टीम निजी वाहन से वहां पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से कच्छ के मुंद्रा में एक होटल में चल रहे स्पा से लड़की को बरामद किया। इस दौरान स्पा मालिक दामनी सुशील हरेश उर्फ सुशील और रिसेप्शनिस्ट लक्ष्य को दो किशोरों के साथ पकड़ा गया।
बलिया के स्पा से 7 लड़कियां बचाईं
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस उत्तर प्रदेश के बलिया पहुंची। वहां एक स्पा सेंटर से सात लड़कियों को बचाया गया। पुलिस ने कथित तौर पर स्पा चलाने वाले मोनू शर्मा और संजीव मौर्य को गिरफ्तार किया।
दिल्ली से भी मिलीं 2 पीड़िताएं
इसके बाद दिल्ली के गणेश नगर स्थित एक परिसर में कार्रवाई की गई। यहां से दो लड़कियों को बचाया गया। पुलिस ने परिसर का कथित तौर पर संचालन करने वाली 27 वर्षीय महिला को गिरफ्तार किया।
ऐसे बनाते थे निशाना
पुलिस के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्यक्तिगत संपर्कों के जरिए कमजोर परिस्थितियों में रह रही लड़कियों की पहचान करते थे। इसके बाद उन्हें स्पा सेंटर में आकर्षक वेतन और रहने की सुविधा देने का वादा किया जाता था। पुलिस ने बताया कि पीड़िताओं को कथित तौर पर दिल्ली से अलग-अलग राज्यों में ले जाया जाता था। वहां उन्हें गिरोह से जुड़े स्पा संचालकों को सौंप दिया जाता था। पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
दो आरोपी अब भी फरार
पुलिस ने विनय उर्फ महादेव की पहचान दिल्ली स्थित एक समन्वयक के रूप में की है। आरोप है कि वह परिवहन और रहने की व्यवस्था करता था। वहीं, लड़कियों को ले जाने में कथित तौर पर मदद करने वाला प्रिंस अभी फरार है। अभियान के दौरान तीन किशोरों को भी पकड़ा गया। इनमें से दो को उनके बयान के आधार पर पीड़ित माना गया और इस संबंध में अलग प्राथमिकी दर्ज की गई।
(इनपुट- पीटीआई)
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