अगर आप भी आए दिन इस “Hmm” के चक्रव्यूह में फंसकर परेशान होते हैं, तो आपको इसके पीछे का साइकोलॉजिकल सच जानना बेहद जरूरी है. मशहूर साइकोलॉजिस्ट और रिलेशनशिप एक्सपर्ट डॉ. ध्रुति अंकलेसरिया (Dr. Dhruti Anklesaria) के अनुसार, टेक्स्टिंग की दुनिया में इस एक छोटे से शब्द के पीछे कई गहरे मनोवैज्ञानिक कारण और छिपे हुए जज्बात हो सकते हैं. डॉ. ध्रुति अंकलेसरिया समझाती हैं कि एक मजबूत और स्वस्थ रिलेशनशिप की रीढ़ की हड्डी होता है इमोशनल कनेक्शन (Emotional Connection). जब आप अपने पार्टनर से कोई बात शेयर करते हैं, तो आपका मकसद सिर्फ जानकारी देना नहीं होता, बल्कि आप उनसे एक जुड़ाव और एम्पथी (सहानुभूति) की उम्मीद कर रहे होते हैं.
ऐसे में जब सामने से सिर्फ ‘हूँ’, ‘ओके’ या ‘हम्म’ जैसा वन-वर्ड रिप्लाई आता है, तो व्यक्ति को बहुत ज्यादा डिसमिस (Dismissed) और नजरअंदाज महसूस होता है. लगातार ऐसा होने पर पार्टनर को लगने लगता है कि सामने वाले को उसकी भावनाओं की कोई कद्र नहीं है या वह एक गलत रिश्ते में है.
जब सामने से सिर्फ ‘हूँ’, ‘ओके’ या ‘हम्म’ जैसा वन-वर्ड रिप्लाई आता है, तो व्यक्ति को बहुत ज्यादा डिसमिस (Dismissed) और नजरअंदाज महसूस होता है.
साइकोलॉजिस्ट के अनुसार ‘हम्म’ के 4 बड़े कारण
कॉन्फ्लिक्ट से बचने की कोशिश (Avoidance of Conflict)
कई बार (विशेषकर पुरुषों में) यह देखा जाता है कि वे बहस या झगड़े से बहुत डरते हैं. उन्हें लगता है कि अगर वे किसी संवेदनशील मुद्दे पर ज्यादा बोलेंगे या अपनी राय रखेंगे, तो बात बढ़ जाएगी और विवाद (Conflict) शुरू हो जाएगा. इसलिए, वे बातचीत को वहीं सीमित या रेस्ट्रिक्ट (Restrict) करने के लिए ‘हम्म’ या ‘ठीक है’ का सहारा लेते हैं. यह एक तरह का डिफेंस मैकेनिज्म है.
मानसिक थकान और ‘ब्रेन फेड’
कई बार इस ‘हम्म’ का संबंध आपसे या आपकी बात से नहीं, बल्कि पार्टनर की मानसिक स्थिति से होता है. दिनभर के काम के तनाव, ऑफिस की पॉलिटिक्स या निजी उलझनों के बाद इंसान मानसिक रूप से इतना थक जाता है कि उसके दिमाग में शब्दों को फ्रेम करने की ऊर्जा नहीं बचती. इसे साइकोलॉजी में ‘ब्रेन फेड’ या मानसिक थकावट कहते हैं.
पैसिव-अग्रेसिव नाराजगी (Passive-Aggressive Behavior)
अगर आपका पार्टनर पहले बहुत लंबी और गहरी बातें करता था, लेकिन अचानक उसने हर बात पर ‘हम्म’ लिखना शुरू कर दिया है, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है. डॉ. ध्रुति के अनुसार, यह पैसिव-अग्रेसिव बिहेवियर का हिस्सा है. पार्टनर आपसे नाराज है, लेकिन वह खुलकर यह बात नहीं कह रहा. वह चाहता है कि आप उसके इस रूखे व्यवहार से खुद उसकी नाराजगी का अंदाजा लगाएं.
इंट्रोवर्ट स्वभाव होना
हर किसी का एक्सप्रेस करने का तरीका अलग होता है. जो लोग स्वभाव से इंट्रोवर्ट (अंतर्मुखी) होते हैं, वे टेक्स्ट पर बहुत ज्यादा एक्टिव या एक्सप्रेसिव नहीं होते. उनके लिए ‘हम्म’ का मतलब कोई नाराजगी या बेरुखी नहीं, बल्कि केवल एक सहज सहमति होता है, जिसका सीधा अर्थ है “हाँ, मैंने सुन लिया और मैं सहमत हूँ.”
महिलाओं को ही अधिक क्यों लगता है दिल पर चोट?
डॉ. ध्रुति अंकलेसरिया के अनुसार, हमारे दिमाग में एमिग्डाला (Amygdala) नाम का एक हिस्सा होता है, जो भावनाओं को कंट्रोल करता है. पुरुषों और महिलाओं में यह अलग तरह से काम करता है. महिलाओं में यह बहुत ज्यादा रिएक्टिव होता है. यही वजह है कि महिलाएं बातचीत के दौरान तुरंत कनेक्शन, शब्दों से सराहना और इंस्टेंट ऐक्नॉलेजमेंट (स्वीकृति) चाहती हैं. वे चाहती हैं कि उनकी बात को महसूस किया जाए.
जबकि पुरुषों का एमिग्डाला अधिक फोकस्ड और धीमा होता है. पुरुषों को अपनी भावनाओं को प्रोसेस करने और उन्हें शब्दों में ढालने के लिए महिलाओं की तुलना में थोड़ा अधिक समय चाहिए होता है. इसलिए वे अक्सर सीधे लॉजिक, सलाह या समाधान (Solutions) पर कूद पड़ते हैं या फिर शांत हो जाते हैं.
इसलिए यह जानना जरूरी है कि महिलाओं को हमेशा किसी समस्या का सॉल्यूशन नहीं चाहिए होता, वे सिर्फ यह चाहती हैं कि उन्हें सुना और समझा जाए (They just want to feel heard). वहीं पुरुष तुरंत समाधान देने की कोशिश में बात को छोटा कर देते हैं.” — डॉ. ध्रुति अंकलेसरिया
इस इमोशनल गैप को कैसे कम करें? डॉ. ध्रुति की सलाह
अगर ‘हम्म’ के कारण आपके रिश्ते में दूरियां बढ़ रही हैं, तो डॉ. ध्रुति अंकलेसरिया ने इसे सुधारने के लिए कुछ बेहद व्यावहारिक टिप्स दिए हैं:
सवालों का तरीका बदलें: अपने पार्टनर से ऐसे सवाल न पूछें जिनका जवाब ‘हाँ’ या ‘ना’ में हो. “खाना खाया?” के बजाय पूछें “आज ऑफिस में तुम्हारा दिन कैसा रहा?”
स्पेस और धैर्य दें: अगर पार्टनर थका हुआ है, तो उसे अपनी भावनाओं को प्रोसेस करने के लिए थोड़ा समय (Space) दें. तुरंत रिप्लाई के लिए दबाव न बनाएं.
केयर दिखाने वाले शब्दों का प्रयोग करें: पुरुषों को सलाह देते हुए डॉ. ध्रुति कहती हैं कि केवल ‘हूँ’ या ‘ओके’ लिखने के बजाय एक-दो शब्द और जोड़ें, जैसे “अच्छा, फिर क्या हुआ?” या “मैं अभी थोड़ा व्यस्त हूँ, घर आकर बात करता हूँ.” इससे पार्टनर को तसल्ली रहती है.
टेक्स्टिंग की दुनिया में असली कनेक्शन तब शुरू होता है जब हम सिर्फ अपने कानों या आंखों से नहीं, बल्कि अपने दिल से सुनना और समझना शुरू करते हैं. ‘हम्म’ के पीछे छिपी खामोशी को गुस्से के बजाय समझदारी से सुलझाना ही एक मैच्योर रिलेशनशिप की निशानी है.








