dutch woman in india, dutch woman viral video : भारत और नीदरलैंड की मेडिकल व्यवस्था में क्या अंतर है

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मुंबई में रहने वाली एक डच महिला ने भारत में बच्चे को जन्म देने के अपने अनुभव के बारे में खुलकर बात की है। लगभग 9 वर्षों से भारत में रह रही इवाना ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो में एम्स्टर्डम से भारत आने की अपनी कहानी साझा की। उन्होंने कहा, ‘भारत में एक विदेशी के रूप में बच्चे को जन्म देते हुए, मैंने वास्तव में अनुभव किया कि यहां की चिकित्सा प्रणाली मेरे देश की तुलना में कितनी अलग है।’ उन्होंने बताया कि नीदरलैंड में, डिलीवरी के दौरान आमतौर पर दवाओं का बहुत कम उपयोग होता है और माताओं को अस्पताल से जल्दी छुट्टी दे दी जाती है।

भारत का अभूतपूर्व अनुभव

इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @ivanaperkovicofficial नामक हैंडल से शेयर किया गया है। मुंबई में इवाना ने बताया कि बिना दवा के डिलीवरी कराने के लिए उन्हें मन को मजबूत करना पड़ा। हालांकि, बेटी के जन्म के बाद मिली देखभाल की उन्होंने जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा, ‘बेटी के जन्म के बाद, देखभाल बेहद शानदार थी। हमें एक बेहतरीन अस्पताल का कमरा मिला और नर्सें बहुत ही स्नेहपूर्ण थीं, हमारी बेटी को देखकर वे बेहद खुश थीं।’इवाना ने आगे कहा कि नवजात शिशु के साथ अपने छोटे से मुंबई अपार्टमेंट में लौटना कहीं अधिक कठिन था।  

चुनौतियों के बारे में भी बताया 

महिला ने कहा, ‘जैसे ही हम अपनी बेटी को अपने छोटे से मुंबई अपार्टमेंट में लाए, अजनबी होने का एहसास पहले से कहीं अधिक गहरा हो गया। मेरे सभी करीबी लोग मुझसे दूर हो गए।’ उन्होंने यह भी याद किया कि मुंबई की गर्मी ने हालात और भी मुश्किल बना दिए थे। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ‘ऊपर से मुंबई में भीषण लू चल रही थी, तापमान अक्सर 40 डिग्री से ऊपर पहुंच जाता था। बिल्डिंग पार्क में टहलना भी नामुमकिन था। मुझे बाहर कदम रखने से डर लगता था।’ आगे कहा कि, ‘मुंबई का यातायात बैंगलोर की तुलना में कहीं अधिक तेज़ और अव्यवस्थित है, क्योंकि यहाँ सड़कें बहुत चौड़ी हैं। और चूंकि मैं शहर से अभी तक परिचित नहीं थी, इसलिए मुझे यह भी नहीं पता था कि नवजात शिशु के साथ बाहर जाने के लिए कौन सी जगहें सुरक्षित हैं।’ इवाना ने उन कठिन महीनों के दौरान खुद को संभालने में मदद करने का श्रेय अपने गोद लिए हुए आवारा कुत्ते, बांबी को दिया। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों का अंततः उन पर बुरा असर पड़ा। वे बोलीं कि, ‘जब मेरी बेटी चार महीने की हुई, तब तक मैं पूरी तरह से तंग आ चुकी थी। मुंबई और उसके हंगामे से मेरा मन भर गया था, और मुझे पता था कि मुझे बस चैन की सांस लेने के लिए अपना सामान पैक करके नीदरलैंड वापस जाना होगा।’ 

यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं 

इस पोस्ट पर कई यूजर्स की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। एक यूजर ने लिखा कि, ‘हर चुनौती में आपकी ताकत और प्यार झलकते हैं, इस नए अध्याय को आगे बढ़ाते हुए आप और बैम्बी पर मुझे बहुत गर्व है!’ दूसरे ने लिखा कि, ‘मैं तो कहूंगा कि भारत में प्रसव का अनुभव नीदरलैंड की तुलना में कहीं अधिक बेहतर है!’


तीसरे ने लिखा कि, ‘मुझे पता है कि जन्म देना कहीं भी अकेलापन भरा होता है, लेकिन जब आप नीदरलैंड या जर्मनी जैसे देशों में हों और वहां हर कोई काम कर रहा हो, तो परिवार की कमी किसी भी देश में आपको परेशान कर सकती है, लेकिन भारत में मिलने वाले विशाल गांव की तुलना में क्या, जहां डॉक्टरों, नर्सों, खाना पकाने में मदद करने वालों, सफाई करने वालों और मालिश करने वालों तक पहुंच आसान है।’

गौरतलब है कि, इससे पहले घर बैठे मेडिकल टेस्ट कराने वाली रूसी महिला ने भारतीय मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर की काफी तारीफ की थी।

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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