पेपर लीक के खिलाफ ED ने शुरू की पैन इंडिया कार्रवाई, नहीं चलेगा मेरा प्रदेश-तेरा प्रदेश, कौन से कदम उठाएगी एजेंसी?

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

[ad_1]

परीक्षाओं के पेपर लीक को लेकर देशभर में गुस्सा फैल रहा है। नीट पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद अब झारखंड की रांची राजधानी रांची में भी JPSC भर्ती की परीक्षा में कथित धांधली को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। आपको बता दें कि बीते कुछ समय में देश के अनेक राज्यों से भी लगातार पेपर लीक के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में छात्रों और परिजनों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। अब केंद्र सरकार ने पेपर लीक के मामलों के खिलाफ बड़ा फैसला किया है। जानकारी सामने आई है कि पेपर लीक के मामलों में अब ED यानी प्रवर्तन निदेशालय की एंट्री हो गई है।

इन राज्यों में ECIR दर्ज

पेपर लीक केस को लेकर केंद्र सरकार सख्त नजर आ रही है। अब ED ने पेपर लीक केस में पैन इंडिया कार्रवाई शुरू कर दी है। पेपर लीक को लेकर ED ने कई राज्यों में ECIR (Enforcement Case Information Report) दर्ज की है। सामने आई जानकारी के अनुसार, ईडी द्वारा ये ECIR राजस्थान, हरियाणा, गुवाहाटी, बिहार (पटना), कर्नाटक, बेंगलुरु, महाराष्ट्र और झारखंड में दर्ज की गई है। इन तमाम राज्यों में दर्ज FIR को ED ने टेक ओवर किया है। NEET UG पेपर लीक केस में भी ED की एंट्री जल्द ही होगी।

मेरा प्रदेश-तेरा प्रदेश नहीं चलेगा

ED पेपर लीक केस में Proceed Of Crime यानी अपराध से अर्जित आय, मनी ट्रेल और आर्थिक लेन देन की जांच करेगी। पेपर लीक पर केंद्र सरकार का सख्त आदेश है कि जिस किसी भी स्टेट में पेपर लीक हुआ है, वहां ED मनी ट्रेल की जांच करेगी। सरकार का साफ आदेश है कि इस मामले में मेरा प्रदेश-तेरा प्रदेश नहीं चलेगा। इसलिए ED ने जहां-जहां भी पेपर लीक हुए हैं, सब मामलों में ECIR दर्ज की है। ED ने रांची में दर्ज की गई CID की FIR पर एक हफ्ते पहले ही ECIR दर्ज की थी।

संसद ने पास किया था एंटी पेपर लीक बिल

आपको बता दें कि हाल ही में संसद ने पेपर लीक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को लेकर एक अहम बिल- सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 को पास किया था। इस बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है और ये कानून बन गया है। इस कानून के अनुसार, पेपर लीक लीक के मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य है। पेपर लीक के मामले में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल की सजा और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं, संगठित अपराध से जुड़े मामलों में कम से कम सात साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

ये भी पढ़ें- एंटी-पेपर लीक कानून में बदलाव को राष्ट्रपति की मंजूरी, अब तीन महीने के अंदर होगा पेपर माफियाओं का हिसाब

परीक्षा से तीन दिन पहले ही लीक हो गए थे NEET के सवाल, छात्रों तक कैसे पहुंचे? CBI की चार्जशीट में बड़े खुलासे

 



[ad_2]

Source link

Kaushal kumar
Author: Kaushal kumar

Leave a Comment

और पढ़ें