गांव की महिलाएं अगर अपने पैरों पर खड़ी होकर कमाई करना चाहती हैं, तो सरकार की लखपति दीदी योजना उनके लिए बड़ा अवसर बन सकती है। इस पहल का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं की आमदनी बढ़ाकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। सरकार का लक्ष्य देशभर में 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाना है, यानी उनकी सालाना आय कम से कम ₹1 लाख तक पहुंचाना है।
लखपति दीदी योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को रोजगार और छोटे कारोबार के लिए जरूरी ट्रेनिंग दिया जाता है। इसका मकसद सिर्फ आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं को ऐसा हुनर देना है, जिससे वे खुद अपना काम शुरू कर सकें और नियमित आमदनी हासिल कर सकें।
इन कामों की मिलती है ट्रेनिंग
योजना के तहत महिलाओं को उनकी रुचि और स्थानीय जरूरत के हिसाब से अलग-अलग कामों के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है। इसमें सिलाई-बुनाई, एलईडी बल्ब निर्माण, मशरूम की खेती और डेयरी जैसे काम शामिल हैं। इसके अलावा ‘नमो ड्रोन दीदी’ पहल के तहत कृषि क्षेत्र में ड्रोन के इस्तेमाल और संचालन से जुड़ी ट्रेनिंग भी दी जाती है। इस तरह महिलाएं खेती-किसानी से जुड़े कामों के साथ-साथ छोटे उत्पादन और सर्विस आधारित कारोबार भी शुरू कर सकती हैं।
उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार
लखपति दीदी पहल की खास बात यह है कि महिलाओं को केवल ट्रेनिंग तक सीमित नहीं रखा जाता। स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और सरकारी मेलों के जरिए बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद की जाती है। इससे स्थानीय स्तर पर तैयार सामान को ज्यादा ग्राहक मिलने की संभावना बढ़ती है। छोटा कारोबार शुरू करने या मौजूदा काम को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं को बैंकिंग सिस्टम के जरिए लोन और फाइनेंशियल हेल्प लेने में भी मदद मिल सकती है।
कौन ले सकता है योजना का लाभ?
इस पहल का मुख्य फोकस ग्रामीण क्षेत्रों की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं पर है। अगर कोई महिला योजना से जुड़ना चाहती है, तो वह अपने नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र या पंचायत कार्यालय में संपर्क कर जानकारी ले सकती है। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से कारोबार से जुड़ी योजना या बिजनेस प्लान तैयार करने में भी सहायता मिल सकती है।
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