21 साल की हूं, लेकिन आज भी मम्मी मुझ पर चीखती-चिल्लाती हैं..क्या करूं! जानें शांतिपूर्ण तरीके से कैसे सुधारें रिश्ता

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें


Mother Daughter Conflict : 21 साल की उम्र जीवन का वह पड़ाव है जहाँ आप अपनी पहचान बनाने और आत्मनिर्भर होने का सपना देखती हैं. लेकिन जब इसी उम्र में घर का माहौल तनावपूर्ण हो और बात-बात पर माँ की चीख-पुकार सुनाई दे, तो मानसिक शांति भंग होना स्वाभाविक है. अगर आपकी माँ भी अपनी हर परेशानी की वजह आपको बताती हैं, तो यह स्थिति आपको भावनात्मक रूप से तोड़ सकती है. मगर याद रखिए, आप इस संघर्ष में अकेली नहीं हैं. रिश्तों की इस उलझन को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जा सकता है और वो भी बड़ी आसानी से.

क्यों होता है ऐसा व्यवहार?
इससे पहले कि आप खुद को अपराधी मान लें, यह समझना जरूरी है कि अक्सर माँ का ऐसा व्यवहार आपकी गलती की वजह से नहीं, बल्कि उनके अपने आंतरिक संघर्षों के कारण होता है. कई बार माँ अपनी जिंदगी की असफलताओं, सामाजिक दबाव या पिता के साथ तनावपूर्ण रिश्तों का गुस्सा अपनी बेटी पर निकालती हैं क्योंकि वह उनके सबसे करीब और ‘आसान निशाना’ होती है. कई बार जनरेशन गैप या हार्मोनल बदलाव(जैसे मेनोपॉज) भी उनके व्यवहार में चिड़चिड़ापन पैदा कर देते हैं.

जब माँ हर बात का दोष आप पर मढ़े, तो क्या करें?

1.’प्रतिक्रिया’ के बजाय ‘शांत’ रहना सीखें-
जब माँ आप पर चिल्ला रही हों, तो पलटकर जवाब देने से आग में घी डालने जैसा काम होता है. उस समय चुप रहना या वहाँ से हट जाना ही बेहतर है. जब आप प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं, तो सामने वाले का गुस्सा धीरे-धीरे शांत होने लगता है. इसे ‘ग्रे रॉक’ मेथड कहते हैं, जहाँ आप उनके गुस्से के प्रति कोई भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं दिखातीं.

2.संवाद के लिए सही समय चुनें-
चीखने-चिल्लाने के बीच कभी भी अपनी बात समझाने की कोशिश न करें. जब माहौल शांत हो और माँ का मूड अच्छा हो, तब उनसे बात करें. उन्हें बताएं कि “माँ, जब आप मुझ पर चिल्लाती हैं, तो मुझे बहुत दुख होता है और मेरा आत्मविश्वास कम हो जाता है”. प्यार से की गई बात अक्सर बड़े बदलाव लाती है.

3. अपनी बाउंड्री (सीमाएं) तय करें-
21 साल की होने के नाते आपको अपनी मानसिक शांति की रक्षा करने का पूरा हक है. अपनी पढ़ाई, काम या शौक में खुद को व्यस्त रखें. अपनी एक अलग दुनिया बनाएं ताकि घर की नकारात्मकता आपकी पूरी पहचान पर हावी न हो पाए.

4. खुद को दोष देना बंद करें-
यह समझना बहुत जरूरी है कि आप उनकी हर समस्या की जिम्मेदार नहीं हैं. अपनी काबिलियत पर शक न करें और न ही खुद को उनकी बातों के कारण कमतर आंकें. आपकी पहचान उनकी शिकायतों से कहीं बड़ी है.

आपकी पहचान माँ के गुस्से से बड़ी है
आप 21 साल की हैं, आपके पास पूरा भविष्य है. माँ का सम्मान करना जरूरी है, लेकिन अपनी मानसिक शांति की कीमत पर नहीं. याद रखिए, आप एक स्वतंत्र व्यक्तित्व हैं और आपको खुश रहने का पूरा हक है. अपनी ऊर्जा को अपने करियर और व्यक्तित्व विकास पर लगाएं. समय के साथ जब आप आत्मनिर्भर बनेंगी, तो रिश्तों के समीकरण भी बदल सकते हैं.

कुछ पूछे गए सवाल और उसके जवाब-

सवाल 1: मेरी उम्र 21 साल है, फिर भी मम्मी मुझ पर छोटी-छोटी बातों पर चीखती हैं. क्या यह सामान्य है?
जवाब:
नहीं, यह सामान्य नहीं है, लेकिन यह कई घरों की कड़वी सच्चाई है. 21 साल की उम्र में आपको एक स्वतंत्र वयस्क (Adult) के रूप में देखा जाना चाहिए. अक्सर माँ का ऐसा व्यवहार उनकी अपनी किसी मानसिक उलझन, ‘कंट्रोलिंग नेचर’ या ‘प्रोजेक्शन’ का परिणाम होता है, जहाँ वे अपनी समस्याओं का गुस्सा आप पर निकालती हैं.

सवाल 2: मम्मी कहती हैं कि उनकी हर परेशानी की वजह मैं हूँ. क्या मुझे खुद को दोषी मानना चाहिए?
जवाब:
बिल्कुल नहीं. किसी और की परेशानियों या उनके व्यवहार के लिए आप जिम्मेदार नहीं हैं. अगर वे अपनी समस्याओं का दोष आप पर मढ़ रही हैं, तो यह उनकी अपनी ‘कोपिंग मैकेनिज्म’ (तनाव से निपटने का तरीका) की कमी है. आपको खुद को दोष देना (Self-blame) तुरंत बंद करना चाहिए, क्योंकि यह आपके आत्मविश्वास को खत्म कर सकता है.

सवाल 3: जब वे चिल्लाती हैं, तो उस वक्त मुझे क्या करना चाहिए?
जवाब:
एक्सपर्ट्स ‘ग्रे रॉक मेथड’ (Gray Rock Method) अपनाने की सलाह देते हैं. प्रतिक्रिया न दें, चिल्लाने के बदले चिल्लाना आग में घी डालने जैसा है. उस समय शांत रहें या कमरे से बाहर चले जाएं.जब वे शांत हों, तब स्पष्ट रूप से कहें कि “जब आप चिल्लाती हैं, तो मैं आपसे बात नहीं कर पाती.

सवाल 4: क्या इस रिश्ते को शांतिपूर्ण तरीके से सुधारा जा सकता है?
जवाब: हाँ, लेकिन इसके लिए धैर्य की आवश्यकता है. बात करने के लिए वह समय चुनें जब मम्मी का मूड अच्छा हो. कभी-कभी पूछें कि “माँ, क्या आप किसी बात से परेशान हैं?” आर्थिक और मानसिक रूप से खुद को मजबूत करें. जब आप अपने पैरों पर खड़ी होती हैं, तो अक्सर घर के लोगों का नजरिया आपके प्रति बदल जाता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

सवाल 5: अगर घर का माहौल मेरी मानसिक सेहत (Mental Health) बिगाड़ रहा हो, तो क्या करूं?
जवाब:
अपनी मानसिक शांति को प्राथमिकता दें. यदि घर में रहना असहनीय हो जाए, तो किसी भरोसेमंद दोस्त या प्रोफेशनल काउंसलर की मदद लें. अपने आप को सकारात्मक गतिविधियों, हॉबी और दोस्तों के बीच व्यस्त रखें ताकि घर की नकारात्मकता आप पर हावी न हो.

साइकोलॉजी एक्सपर्ट की सलाह:

सवाल : 21 साल की उम्र में भी माँ का इस तरह चिल्लाना क्या दर्शाता है?
जवाब:
यह व्यवहार अक्सर ‘इमोशनल डिसरेगुलेशन’ का संकेत है. 21 साल की बेटी अब एक स्वतंत्र वयस्क है, लेकिन कई बार माँ इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पातीं. वे अनजाने में अपनी असुरक्षा, अधूरापन या जीवन के अन्य तनावों को अपनी बेटी पर ‘प्रोजेक्ट’ करती हैं. इसे मनोविज्ञान में ‘डिस्प्लेस्ड अग्रेशन’ कहा जाता है.

सवाल : एक्सपर्ट के तौर पर उन बेटियों को क्या सलाह देंगे जो इस वक्त घुट रही हैं?
जवाब:
मेरी सलाह है  ‘डिटैचमेंट विद लव’. आप अपनी माँ से प्यार करें, उनकी सेवा करें, लेकिन उनकी कड़वी बातों से खुद को मानसिक रूप से अलग कर लें. अपनी खुशी और पहचान के लिए उनके ‘अप्रूवल’ (सहमति) का इंतज़ार न करें. आप 21 की हैं, अपनी ऊर्जा अपने करियर और खुद को संवारने में लगाएं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)



Source link

Leave a Comment

और पढ़ें