linkedin post viral, Bengaluru inflation viral post : जब फ्रेशर ने CEO के सामने बयां किया बढ़ती महंगाई का दर्द

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IT हब के रूप में मशहूर बेंगलुरु में युवा पेशेवरों के लिए जीवन-यापन की लागत लगातार बढ़ रही है। हाल ही में एक सीईओ की लिंक्डइन पोस्ट ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। क्रिएटिव कोड के फाउंडर और सीईओ संकेत सेठ ने एक फ्रेशर कर्मचारी से हुई बातचीत का जिक्र किया, जिसमें फ्रेशन ने उनसे कहा, ‘सर, ऑफिस आने में रोज 350 रुपये लग जाते हैं।’ यह बात शहर में बढ़ती महंगाई और कम्यूट खर्चों को लेकर बहस छिड़ गई है। 

लिंक्डइन पर शेयर की गई पोस्ट 

इस पोस्ट को लिंक्डइन पर @SanketSheth नामक अकाउंट से शेयर किया गया है। संकेत सेठ ने याद किया कि 2024 में जब कंपनी ने ऑफिस से काम फिर शुरू किया था, तब एक फ्रेशर ने उन्हें अपना रोज का खर्च बताया। युवक लालबाग के पास रहता था, जबकि ऑफिस एचएसआर लेआउट में था। उसके माता-पिता बेंगलुरु के ट्रैफिक और सड़कों की स्थिति को देखते हुए स्कूटर चलाने से मना कर रहे थे। पब्लिक ट्रांसपोर्ट से एक तरफ की यात्रा करीब दो घंटे लगती थी, जिसमें कई बदलाव और लास्ट-माइल का सफर शामिल था। ऑटो के साथ मिलाकर रोज का खर्च करीब 350 रुपये बैठता था। संकेत सेठ के अनुसार, पहली सैलरी कमाने वाले युवा के लिए सिर्फ ऑफिस आने-जाने पर महीने के 7,000 से 8,000 रुपये खर्च हो जाते हैं। 

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Image Source : LINKEDIN/@SANKETSHETHलिंक्डइन पर शेयर की गई पोस्ट।

युवाओं के लिए दिया सुझाव 

उन्होंने लिखा, ’22 साल के युवा को इस बात की चिंता नहीं करनी चाहिए कि वे नौकरी का खर्च उठा सकते हैं या नहीं। इसके बजाय, उनकी पहली तनख्वाह से उन्हें आजादी का एहसास होना चाहिए, चाहे वह घर पर बिना पूछे कुछ खरीदना हो या अपने पहले 1,000 रुपये बचाना हो।’ उन्होंने लिखा, ‘बेंगलुरु, बेंगलुरु इसलिए है क्योंकि हर साल हजारों 21, 22 और 23 वर्षीय युवा यहां बेहिसाब महत्वाकांक्षाओं के साथ आते हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि ये युवा श्रमिक ऊर्जा, विचार और जोखिम उठाने की इच्छा लेकर आते हैं। उन्होंने ने यह भी चेतावनी दी कि युवा कर्मचारी अंततः दूरस्थ नौकरियों की तलाश शुरू कर सकते हैं, कार्यालय में उपस्थिति की आवश्यकता वाले अवसरों से बच सकते हैं या किसी अन्य शहर को चुन सकते हैं। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और कई युवाओं ने अपनी कहानियां साझा कीं। 

यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं 

इस पोस्ट पर लिंक्डइन पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं, कुछ यूजर्स ने यूजर से सहमति जताई जबकि अन्य ने सवाल उठाया कि क्या बेंगलुरु को निशाना बनाया जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, “अगर हम अपनी सुविधा के लिए काम कर रहे हैं तो हम जल्दी शुरू करके जल्दी निकल सकते हैं। हमें उन चीजों पर पैसा खर्च नहीं करना चाहिए जो काम नहीं करतीं। हर शहर में यही समस्या है, लेकिन हम बेंगलुरु के बारे में ज्यादा बात कर रहे हैं।”

दूसरे ने लिखा कि, “हां, अगर कोई नया कर्मचारी दूसरे शहर से आ रहा है, तो उसे अपनी कमाई का लगभग आधा हिस्सा मकान किराए, खाने और अन्य खर्चों पर खर्च करना पड़ता है। ₹25,000 से ₹30,000 के शुरुआती वेतन के साथ, उनके पास बचत करने या कुछ भी खरीदने के लिए लगभग कुछ भी नहीं बचता है। इसलिए वे कम वेतन पर भी दूसरे शहर जाने के बारे में सोचते हैं, जहां उन्हें कम से कम अपनी स्वतंत्रता तो मिल सके।”

तीसरे यूजर ने लिखा कि, “बीएमटीसी चलाने के पीछे एक कारण है।”

एक अन्य व्यक्ति ने बस इतना ही कहा, “बिल्कुल सही।”

गौरतलब है कि, इससे पहले बेंगलुरु के एक कपल ने 5 फाइनेंशियल रूल का वीडियो शेयर किया था। जिस पर काफी यूजर्स ने प्रतिक्रियाएं दी थीं। 

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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