“प्यार अंधा होता है”..यह लाइन हम सबने फिल्मों से लेकर असल जिंदगी में कई बार सुनी है. जब हम किसी से प्यार करते हैं, तो चौबीसों घंटे उसी के ख्यालों में खोए रहना, उसके मैसेज का इंतजार करना और उसकी हर छोटी बात पर मुस्कुरा देना बेहद नॉर्मल माना जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि प्यार की यह खूबसूरत सीमा कब पार हो जाती है और वह एक खतरनाक दीवानगी का रूप ले लेती है? अक्सर लोग प्यार और दीवानगी को एक ही समझने की भूल कर बैठते हैं, जबकि इन दोनों के बीच एक बहुत ही बारीक और गंभीर लकीर होती है, जिसे समझना हमारी मेंटल हेल्थ के लिए बेहद जरूरी है.
प्यार और जूनून के बीच की वो बारीक लकीर
शुरुआती दौर में प्यार और दीवानगी दोनों का अहसास एक जैसा लग सकता है. दोनों में ही सामने वाले को पाने की तीव्र इच्छा होती है. लेकिन असल प्यार का आधार आजादी, सम्मान और भरोसा होता है. सच्चा प्यार आपको एक बेहतर इंसान बनाता है, वह आपके भीतर सुरक्षा की भावना लाता है. इसके विपरीत, जब प्यार ‘दीवानगी’ या ऑब्सेशन (Obsession) में बदलने लगता है, तो इंसान सामने वाले को एक इंसान के रूप में नहीं, बल्कि एक वस्तु के रूप में देखने लगता है जिस पर वह अपना पूरा हक जमाना चाहता है. यहाँ से रिश्ते में असुरक्षा, शक और दम घुटने जैसी चीजें शुरू हो जाती हैं.
क्या है ‘ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर’ (OLD)?
साइकोलॉजी की भाषा में इस कदर की जुनूनी दीवानगी को एक मानसिक स्थिति माना गया है, जिसे ‘ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर’ (Obsessive Love Disorder – OLD) भी कहा जाता है. यह कोई आम बात नहीं है, बल्कि एक गंभीर मानसिक स्थिति है. इसमें व्यक्ति अपने पार्टनर को लेकर इस कदर असुरक्षित हो जाता है कि वह उसकी हर एक्टिविटी को कंट्रोल करना चाहता है. वह किससे बात कर रहा है, कहाँ जा रहा है, यहाँ तक कि उसके सोशल मीडिया पासवर्ड्स तक पर नजर रखने की कोशिश होने लगती है. जब पार्टनर थोड़ा भी स्पेस मांगता है, तो दीवाना व्यक्ति हिंसक या डिप्रेशन का शिकार हो सकता है.
जब पार्टनर की सुरक्षा ‘कंट्रोल’ में बदल जाए
अब सवाल यह उठता है कि कोई कैसे पहचाने कि उसका रिश्ता प्यार की खूबसूरत राह पर है या दीवानगी की मानसिक बीमारी की तरफ बढ़ रहा है? इसके कुछ साफ लक्षण हैं. अगर कोई व्यक्ति चौबीसों घंटे सिर्फ और सिर्फ अपने पार्टनर के बारे में सोचता है और अपनी नौकरी, परिवार, दोस्तों यहाँ तक कि खुद की केयर करना पूरी तरह छोड़ देता है, तो यह पहला रेड फ्लैग है. इसके अलावा, पार्टनर के बिना जीने की कल्पना मात्र से पैनिक अटैक आना, लगातार उसे मैसेज या कॉल करके परेशान करना और उसकी जिंदगी को पूरी तरह नियंत्रित करने की चाह रखना दीवानगी के स्पष्ट लक्षण हैं.
लक्षणों से पहचानें यह प्यार है या मानसिक बीमारी?
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह दीवानगी अक्सर उन लोगों में ज्यादा देखी जाती है जो बचपन में किसी गहरे अकेलेपन, रिजेक्शन या ‘अटैचमेंट इश्यूज’ से गुजरे होते हैं. ऐसे लोग पार्टनर को खोने के डर से इस कदर घबरा जाते हैं कि उनका प्यार एक बीमारी का रूप ले लेता है. वे यह भूल जाते हैं कि एक स्वस्थ रिश्ते में ‘स्पेस’ यानी दोनों पार्टनर्स का अपना एक अलग वजूद होना कितना जरूरी है.
अगर आपको या आपके किसी करीबी को अपने रिश्ते में ऐसी चीजें महसूस हो रही हैं, तो इसे ‘सच्चा और गहरा प्यार’ कहकर नजरअंदाज करने की गलती बिल्कुल न करें. यह समय थेरेपी, काउंसिलिंग और आत्ममंथन का है. याद रखें, प्यार का मतलब किसी को पिंजरे में कैद करना नहीं, बल्कि उसे उड़ने के लिए खुला आसमान देना और खुद भी उसके साथ खुलकर जीना है. जब तक आप खुद से प्यार करना नहीं सीखेंगे, तब तक आप एक हेल्दी रिलेशनशिप की शुरुआत नहीं कर सकते.









