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Modern Saas Bahu Relationship : मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि सास-बहू के रिश्ते में ‘स्पेस’ अब जोर जबरदस्ती नहीं, बल्कि हेल्दी रिश्ते की नींव है. क्योंकि हेल्दी रिश्तों का मतलब हमेशा साथ रहना नहीं, बल्कि एक-दूसरे को खुद के साथ रहने की आजादी देना भी है. जब एक मॉर्डन सास अपने लिए ‘स्पेस’ मांगती है, तो वह वास्तव में अपनी पहचान को फिर से जीवित कर रही होती है.
यह ‘न्यू इंडिया’ की ‘न्यू सास’ है, जो अब सिर्फ घर की केयरटेकर नहीं.
Saas Bahu Relationship : भारतीय घरों में ‘स्पेस’ (Space) शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर नई नवेली दुल्हन या आज की जनरेशन की बहुओं से जोड़कर देखा जाता रहा है, जिसे घर टूटने की सबसे बड़ी वजहों में से एक बताया जाता है. लेकिन अब यह टैबू टूटता दिख रहा है! अब घर की बुजुर्ग महिलाएं भी अपने लिए निजी स्पेस तलाश रही हैं. दरअसल, पिछले कुछ सालों में ‘रिटायर्ड पैरेंटिंग’ और ‘सेल्फ-लव’ का क्रेज बढ़ा है. आज की मॉर्डन सास अब सिर्फ किचन की चाबियों और पोते-पोतियों के डायपर तक सीमित नहीं रहना चाहतीं.
वो उस उम्र में पहुंच गई हैं जहां उन्होंने अपनी सारी जिम्मेदारियां पूरी कर ली हैं. ऐसे में अब उन्हें भी चाहिए कि वो अपनी सहेलियों के साथ किट्टी पार्टी में जाएं, सोलो ट्रिप प्लान करें या बस दोपहर में शांति से बैठकर अपनी पसंदीदा वेब सीरीज देखें.
बेहतर रिश्ते के लिए ‘बूस्टर डोज’
मजेदार बात यह है कि सास का यह ‘स्पेस’ मांगना रिश्तों के लिए एक ‘बूस्टर डोज’ साबित हो रहा है. जब सास अपनी लाइफ में बिजी और खुश रहती हैं, तो बहू पर भी ‘परफेक्ट बहू’ बनने का दबाव कम हो जाता है. सास का अपनी हॉबीज, जैसे पेंटिंग, योगा या डांस क्लास में बिजी होना घर के माहौल को हल्का-फुल्का बना देता है.
नो मोर ‘हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग’
इसके पीछे एक और मनोवैज्ञानिक कारण है जिसे आजकल ‘स्लो लव’ और ‘रिलेशनशिप बाउंड्रीज’ कहा जा रहा है. बड़े-बुजुर्गों को अब यह समझ आ गया है कि हर वक्त बच्चों की जिंदगी में दखल देने से बेहतर है कि अपनी लाइफ को एंजॉय किया जाए.
वो अब ‘हेलीकॉप्टर पेरेंट’ (हर वक्त सिर पर मंडराने वाले) नहीं बनना चाहते. उन्हें अपनी शांति और अपना कोना प्यारा लगने लगा है. यह फैसला सही भी है, क्योंकि जब हर सदस्य अपनी व्यक्तिगत खुशी का ख्याल रखता है, तभी घर में सामूहिक शांति बनी रहती है.
मी टाइम की तलाश क्यों
आज की सास फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप पर उतनी ही एक्टिव हैं जितनी उनकी बहू. उन्हें अपनी रील्स बनानी हैं, गार्डनिंग के वीडियो देखने हैं और पुराने दोस्तों से चैट करनी है. ऐसे में जब घर के कामों या टोक-टाक का बोझ उन पर आता है, तो वो भी उस ‘मी-टाइम’ (Me-time) की तलाश करती हैं जिसे अब तक सिर्फ युवा पीढ़ी का हक माना जाता था.
अब वो सिर्फ ‘दादी या नानी’ बनकर नहीं, बल्कि अपनी एक स्वतंत्र पहचान के साथ जीना चाहती हैं. तो अगली बार अगर आपकी सासू मां कहें कि “आज तुम लोग बाहर से खाना खा लेना, मुझे अपनी सहेलियों के साथ फिल्म देखने जाना है,” तो चौंकिए मत! बल्कि उन्हें खुशी-खुशी विदा कीजिए. यह ‘न्यू इंडिया’ की ‘न्यू सास’ है, जो अब सिर्फ घर की केयरटेकर नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी की लीड एक्ट्रेस भी है. आखिर खुशहाल सास ही तो खुशहाल घर की नींव होती है!
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मैंने लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वूमन से अपनी ग्रेजुएशन और मिरांडा हाउस से मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता करियर की शुरुआत दूरदर्शन(2009) से की, जिसके बाद दैनिक भास्कर सहित कई प्रमुख अख़बारों में मेनस्ट्र…
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April 07, 2026, 13:19 IST








