अब ये Tolyamory क्या है भई, GenZ ने लाया डेटिंग के लिए भयानक ट्रेंड, इस जंजाल में कहीं आप तो नहीं?

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टोल्यामोरी नाम का नया डेटिंग ट्रेंड तेजी से चर्चा में है, लेकिन इसके पीछे छिपी सच्चाई रिश्तों के लिए खतरनाक मानी जा रही है. यह ट्रेंड जहां मॉडर्न लगता है, वहीं इसमें एक पार्टनर चुपचाप समझौता करता रहता है, जो मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है.

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टोल्यामोरी शब्द “टोलरेट” यानी सहन करना होता है.

आज के समय में रिश्तों और डेटिंग का तरीका तेजी से बदल रहा है. सोशल मीडिया और नई सोच के चलते हर दिन कोई नया ट्रेंड सामने आता है, जो प्यार की परिभाषा को बदलने की कोशिश करता है. इन्हीं ट्रेंड्स में एक नया नाम जुड़ा है टोल्यामोरी, जो पहली नजर में मॉडर्न और खुला रिश्ता लग सकता है, लेकिन असल में यह काफी उलझा हुआ और भावनात्मक रूप से नुकसान पहुंचाने वाला माना जा रहा है. कई लोग इसे “एडवांस रिलेशनशिप” समझकर अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसके पीछे छिपी सच्चाई यह है कि इसमें एक व्यक्ति अपनी भावनाओं को दबाकर रिश्ते को बनाए रखने की कोशिश करता है. यही वजह है कि एक्सपर्ट्स इसे एक खतरनाक ट्रेंड मान रहे हैं.

क्या है टोल्यामोरी?
टोल्यामोरी शब्द “टोलरेट” यानी सहन करना और “पॉलीअमोरी” से मिलकर बना है. इसमें रिश्ते में एक पार्टनर दूसरे की बेवफाई या बाहरी रिश्तों को जानते हुए भी चुपचाप सहन करता रहता है. यहां रिश्ते में बराबरी या साफ सहमति नहीं होती, बल्कि एक व्यक्ति अपनी भावनाओं को दबाकर समझौता करता है. धीरे-धीरे यह आदत बन जाती है और व्यक्ति खुद को ही नजरअंदाज करने लगता है.

पॉलीअमोरी से कितना अलग है ये ट्रेंड
जहां पॉलीअमोरी में सभी लोगों की सहमति, ईमानदारी और खुले नियम होते हैं, वहीं टोल्यामोरी में ऐसा कुछ नहीं होता. इसमें रिश्ते का संतुलन बिगड़ जाता है और एकतरफा समझौता हावी हो जाता है. एक पार्टनर आजादी का फायदा उठाता है, जबकि दूसरा सिर्फ सहता रहता है, जिससे रिश्ता असंतुलित और कमजोर हो जाता है.

क्यों तेजी से बढ़ रहा है ये ट्रेंड
आजकल सोशल मीडिया पर “कूल” और “ओपन माइंडेड” दिखने का दबाव काफी बढ़ गया है. लोग अपनी असली भावनाओं को छुपाकर खुद को मजबूत और समझदार दिखाने की कोशिश करते हैं. इसी वजह से कई लोग जलन, दुख या असुरक्षा जैसी भावनाओं को दबा देते हैं और टोल्यामोरी जैसे ट्रेंड को अपनाने लगते हैं. उन्हें लगता है कि यह मॉडर्न सोच का हिस्सा है, जबकि असल में यह खुद के साथ समझौता करने जैसा है.

रिश्तों पर पड़ने वाला असर
ऐसे रिश्तों में रहने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे अंदर से कमजोर होने लगता है. बार-बार समझौता करने से आत्मसम्मान कम हो जाता है और व्यक्ति खुद को कमतर समझने लगता है. रिश्ते में भरोसा और खुशी खत्म होने लगती है, जिससे तनाव और दूरी बढ़ जाती है. टोल्यामोरी का सबसे ज्यादा असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है. लंबे समय तक अपनी भावनाओं को दबाने से तनाव, चिंता और अकेलापन बढ़ सकता है. कई बार व्यक्ति डिप्रेशन जैसी समस्याओं का भी शिकार हो सकता है, क्योंकि वह अपनी असली भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाता.

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Vividha Singh

विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…

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