Last Updated:
Moral Duty Of Children : माता-पिता की जरूरत हमेशा पैसे की नहीं होती. कई बार उन्हें सिर्फ किसी अपने की आवाज सुननी होती है. कोई पूछ ले कि तबीयत कैसी है. कोई कुछ देर उनके पास बैठ जाए. और जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर शायद यह जरूरत और भी ज्यादा बढ़ जाती है. ऐसे में सवाल सिर्फ तीन बेटियों का नहीं है. सवाल हम सबका है.
किसी के जाने के बाद फूल चढ़ाने से बेहतर है कि उसके रहते दो मिनट बैठकर बात कर ली जाए.(AI Imagr)
Moral Duty Of Children : सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो इन दिनों लोगों को भीतर तक झकझोर रहा है. वीडियो में एक वृद्ध व्यक्ति के अंतिम संस्कार की रस्में ओल्ड एज होम के लोग निभाते नजर आ रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि बुजुर्ग की तीन बेटियां थीं. उन्हें पिता की तबीयत खराब होने और उनसे मिलने की इच्छा के बारे में कई बार बताया गया, लेकिन वे नहीं आईं. पिता के निधन के बाद भी कोई बेटी अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंची.
बताया गया कि अंतिम संस्कार के लिए ओल्ड एज होम को 5100 रुपये भेजे गए. हालांकि, वहां मौजूद लोगों ने कथित तौर पर पैसे वापस कर दिए और खुद ही बुजुर्ग का अंतिम संस्कार किया. अगर इस कहानी में सच्चाई है, तो यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है. यह उस रिश्ते पर सवाल है, जिसे हम दुनिया का सबसे मजबूत रिश्ता मानते हैं.
किसी के जाने के बाद फूल चढ़ाने से बेहतर है कि उसके रहते दो मिनट बैठकर बात कर ली जाए.(AI Imagr)
क्या व्यस्त जिंदगी रिश्तों से बड़ी हो गई है?
आज हर किसी के पास अपनी जिंदगी की मजबूरियां हैं. नौकरी है, परिवार है, बच्चों की जिम्मेदारी है, दूर शहरों में रहना है. यह भी सच है कि हर संतान अपने माता-पिता के पास हर समय मौजूद नहीं रह सकती. लेकिन क्या किसी बीमार पिता से मिलने के लिए भी हमारे पास समय नहीं बचा?
माता-पिता की जरूरत हमेशा पैसे की नहीं होती. कई बार उन्हें सिर्फ किसी अपने की आवाज सुननी होती है. कोई पूछ ले कि तबीयत कैसी है. कोई कुछ देर उनके पास बैठ जाए. और जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर शायद यह जरूरत और भी ज्यादा बढ़ जाती है. ऐसे में सवाल सिर्फ तीन बेटियों का नहीं है. सवाल हम सबका है.
View this post on Instagram









