गुलामी की मानसिकता से नहीं निकल पा रहा पाकिस्तान, आजादी के जश्न में भी शहबाज ने कर दी ट्रंप की तारीफ

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पाकिस्तान और उसके प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की गुलामी की मानसिकता अभी तक खत्म नहीं हुई। ये पाकिस्तान की आजादी की पूर्व संध्या पर भी देखने को मिला। दरअसल, शहबाज शरीफ पाकिस्तान की आजादी को लेकर भाषण दे रहे थे और तभी वो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को याद करने लगे। सीजफायर के लिए ट्रंप का धन्यवाद करने लगे।

आजादी के जश्न में ट्रंप का धन्यवाद क्यों?

शहबाज शरीफ ने कहा, ‘मैं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं, जिन्होंने पिछले साल पाकिस्तान और भारत के बीच सीजफायर करवाकर लाखों लोगों को बचाया। पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्ते लगातार प्रगति कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि भविष्य में ये और ज्यादा मजबूत होंगे।’

शहबाज शरीफ ने किया ट्रंप का गुणगान

अपने भाषण में शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते पर भारत को भी घेरने की कोशिश की और इसे रेड लाइन बताया। गौरतलब है कि शहबाज शरीफ का ये स्टेटमेंट ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान अपनी आजादी की सालगिरह का जश्न मना रहा है। ऐसे में प्रश्न उठ रहा है कि जिस अवसर पर पाकिस्तान को अपनी स्वतंत्रता, संप्रभुता और अपने देश के फ्यूचर की बात करनी चाहिए थी, लेकिन वहां शहबाज शरीफ खुद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का गुणगान क्यों कर रहे थे।

सीजफायर पर भारत स्पष्ट कर चुका है अपना पक्ष

इस दौरान, शहबाज शरीफ ने मई, 2025 में भारत-पाकिस्तान सीजफायर का क्रेडिट डोनाल्ड ट्रंप को दिया। दिलचस्प है कि पाकिस्तान लगातार इसको अपनी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश करता रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष के बाद सीजफायर हुआ। हालांकि, भारत कई बार साफ कर चुका है कि दोनों देशों के बीच मिलिट्री एक्शन रोकने को लेकर सहमति सीधे भारत-पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच बनी थी। इसमें किसी तीसरे की भूमिका नहीं थी।

पाकिस्तान की फॉरेन पॉलिसी पर उठे सवाल

उधर, शहबाज शरीफ के स्टेटमेंट ने पाकिस्तान की फॉरेन पॉलिसी और अमेरिका पर उसकी निर्भरता के बारे में भी बहस छेड़ दी है। पाकिस्तान की आजादी के समारोह के मंच से अमेरिकाी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को धन्यवाद देना ये प्रश्न खड़ा करता है कि क्या पाकिस्तान अपनी विदेश नीति में बड़ी शक्तियों के सहारे की खोज में अब भी है। यही कारण है कि शहबाज शरीफ के इस ताजा बयान को पाकिस्तान की गुलामी की मानसिकता से जोड़कर देखा जा रहा है।

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Author: Kaushal kumar

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