बिहार में बड़ा राजनीतिक उलटफेर हुआ। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशान्त किशोर ने बीजेपी को उसी के गढ़ बांकीपुर में 19,324 मतों से हराया। पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में भले ही प्रशान्त किशोर की पार्टी का खाता न खुला हो लेकिन नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई सीट प्रशान्त किशोर ने छीन ली। बांकीपुर में RJD तीसरे नंबर पर रही, लेकिन RJD नेता इसी बात से खुश हैं कि बीजेपी का अहंकार टूटा। बड़ी बात ये नहीं है कि प्रशांत किशोर ने बांकीपुर से चुनाव जीत लिया। बड़ी बात ये है कि प्रशांत किशोर ने बीजेपी को उसकी सबसे पक्की सीट पर हरा दिया। ये बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सीट थी। अध्यक्ष जी यहां से पांच बार लगातार चुनाव जीते थे।
दूसरी बात, बिहार में बीजेपी PK को कुछ नहीं समझती थी। उसकी वजह भी थी। पिछले साल PK ने विधानसभा की 243 सीटों पर चुनाव लड़ा था, सारी की सारी सीटें हार गए। बांकीपुर से उस समय PK को 5 प्रतिशत से भी कम वोट मिले थे। तीसरी बात ये है कि बीजेपी ने इस चुनाव में ताकत लगाई, 40 स्टार कैम्पेनर्स को उतारा। प्रशांत किशोर ने 250 professionals की मदद से गली-गली जा कर चुनाव जीता। प्रशांत किशोर ने बीजेपी की हर कमी को scientifically exploit किया। सम्राट चौधरी की छवि, नेताओं का अहंकार, कार्यकर्ताओं की नाराज़गी, सब कुछ PK के काम आया।
प्रशांत किशोर ने इस सीट पर पार्टी, जाति, नेता जैसे सारे समीकरणों को ध्वस्त कर दिया। ये जीत बिहार की राजनीति में PK के लिए नया रास्ता खोलेगी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए नई मुश्किलें खड़ी करेगी।
क्या नरोत्तम ने बीजेपी को दतिया में हरवाया?
बीजेपी को दूसरा बड़ा झटका मध्य प्रदेश में लगा। दतिया सीट भी बीजेपी उपचुनाव में हार गई, हालांकि गुजरात की मांजलपुर सीट पर बीजेपी ने धमाकेदार जीत दर्ज की। दतिया में कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6016 वोट से हराया। विधानसभा चुनाव में ये सीट कांग्रेस ने ही जीती थी। कांग्रेस के राजेन्द्र भारती ने उस समय के मंत्री नरोत्तम मिश्रा को साढ़े सात हजार से ज्यादा वोटों से हराया था लेकिन एक पुराने केस में राजेन्द्र भारती को कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाये जाने से उनकी सदस्यता चली गई।
नोट करने वाली बात ये है कि नरोत्तम मिश्रा का घर दतिया के जिस वॉर्ड में है उस वॉर्ड में भी कांग्रेस को बीजेपी से 27 वोट ज्यादा मिले। बीजेपी, बीजेपी को कैसे हराती है, दतिया की हार इसी का उदाहरण है। पहले ये नरोत्तम मिश्रा की सीट थी। फिर वो कांग्रेस से हार गए, मंत्री भी नहीं रहे। फिर उम्मीद बंधी, वो उपचुनाव की तैयारी कर रहे थे, उनके समर्थक पूरे जोश में थे, बीजेपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया, उनके समर्थकों ने शोर मचाया। नरोत्तम मिश्रा ने आंसू बहाए, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। अब लोग कह रहे हैं कि नरोत्तम मिश्रा के आंसुओं ने चुपचाप हरवा दिया। अब नरोत्तम मिश्रा शोर मचाएंगे और मध्य प्रदेश बीजेपी के नेता आंसू बहाएंगे।
झारखंड और कर्नाटक में पेपर लीक
झारखंड और कर्नाटक में पेपर लीक बड़ा मुद्दा बन गया है। झारखंड लोक सेवा आयोग की प्रिलिमनरी परीक्षा में पेपर लीक होने और OMR शीट में छेड़छाड़ के आरोप लगे हैं। छात्रों का आरोप है कि कम नंबर लाने वाले उम्मीदवार चुन लिए गए, इनमें हरियाणा और यूपी के 400 उम्मीदवार भी थे, जो पास हो गए। इसी गड़बड़ी के खिलाफ 29 जुलाई से छात्र धरने पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि पेपर रद्द किया जाए। छात्रों की ये भी मांग है कि JPSC, JSSC और दूसरी एजेंसियों ने जो भी इम्तहान करवाए हैं, उन सबकी जांच CBI से कराई जाए, पेपर लीक की जिम्मेदारी तय हो।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने छात्रों से वीडियो कॉल पर बात की, उनकी मांगों का समर्थन किया। अभिजीत दिपके ने कहा कि खराब सेहत की वजह से वो रांची नहीं जा पा रहे हैं, तबियत ठीक होने पर वो रांची जाएंगे। रांची और दिल्ली के प्रोटेस्ट में फर्क है। दिल्ली में केंद्र सरकार ने मान लिया था कि पेपर लीक हुआ। झारखंड में JPSC की परीक्षा को लेकर अभी जांच चल रही है। दिल्ली में CBI ने आरोपियों को जेल भेज दिया था पर रांची में CBI जांच की मांग की जा रही है और राज्य सरकार तैयार नहीं है।
दिल्ली में प्रोटेस्ट करने वाली CJP झारखंड में नजर नहीं आई। दिल्ली में सारी बीजेपी विरोधी पार्टियां धरना और प्रोटेस्ट का समर्थन कर रही थीं लेकिन झारखंड में केवल बीजेपी इस प्रोटेस्ट का समर्थन कर रही है। असल में पेपर लीक ऐसा मुद्दा है, जिस पर सियासत कम हो तो अच्छा। लेकिन ऐसा होता नहीं। पेपर लीक पर सियासत कर्नाटक में भी हो रही है। कर्नाटक में वेटरिनरी ऑफिसर की भर्ती में गड़बड़ी का आरोप लगा है। कर्नाटक लोक सेवा आयोग ने 17 जुलाई को वेटरिनरी अफसर के 400 पदों के लिए चुने गये उम्मीदवारों की लिस्ट निकाली थी, लेकिन जिन लोगों ने ये परीक्षा दी थी, उनमें के कुछ लोगों ने सबूतों के साथ दावा किया कि 80 लाख से एक करोड़ रुपये रिश्वत देकर भर्ती की गई, OMR शीट को बदला गया।
ये मामला अभी हाई कोर्ट में है। सबूत देखने के बाद हाईकोर्ट ने भी कहा कि ये दिनदहाड़े धोखाधड़ी का केस है, सरकार ने भी भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी। जांच के लिए SIT का गठन कर दिया गया है, हाईकोर्ट ने 6 अगस्त तक SIT की रिपोर्ट मांगी है। इस मामले में कई छात्रों ने बिचौलियों का स्टिंग ऑपरेशन किया और ऑडियो, वीडियो रिकार्डिंग और तस्वीरें जारी की। पुलिस ने दो बिचौलियों सिकंदर चौधरी और आरिफ मोहम्मद मुल्ला को गिरफ्तार भी किया है।
इस बीच गृह मंत्री प्रियांक खरगे के एक बयान ने आग में घी का काम किया। प्रियांक खरगे ने कहा, पहले छात्र धरने पर बैठें, 25 दिन तक भूखे रहें, फिर लाठीचार्ज होगा और तब उनके इस्तीफे का नंबर आएगा जैसा धर्मेंद्र प्रधान ने दिया था। प्रियांक खरगे की बात बहुत गैर-ज़िम्मेदाराना है। वो दिल्ली में हुए प्रोटेस्ट का मजाक उड़ा रहे हैं। ये एक संवेदनशील मामला है। पेपर लीक और इस पर प्रोटेस्ट दोनों गंभीर विषय है, इन्हें हवा में नहीं उड़ाया जा सकता।
देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 03 अगस्त, 2026 का पूरा एपिसोड








