अभिनेत्री से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया के एक बयान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हर्षा रिछारिया ने हाल ही में बयान दिया था कि हिंदुस्तान में कोई भी संतों का आश्रम पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और वह तभी किसी आश्रम में रहेंगी, जब उन्हें सुरक्षा की गारंटी मिलेगी। उनके इस बयान पर ब्रज के संत समाज ने कड़ी नाराजगी जताई है। संतों का कहना है कि किसी एक-दो घटनाओं के आधार पर पूरे संत समाज और आश्रम परंपरा पर सवाल उठाना अनुचित है।
फलाहारी महाराज ने की बयान की निंदा
इस मामले में श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने हर्षा रिछारिया के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणी से पूरे संत समाज की छवि को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि देशभर में हजारों संत समाज सेवा, धर्म प्रचार और आध्यात्मिक जागरण का कार्य कर रहे हैं। ऐसे में कुछ घटनाओं के आधार पर सभी संतों और आश्रमों पर सवाल खड़े करना न्यायसंगत नहीं है।
दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक बयान से पहले व्यक्ति को उसके व्यापक प्रभाव के बारे में सोचना चाहिए। उनके मुताबिक, संत परंपरा सदियों से भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों की वाहक रही है और उस पर इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं माना जा सकता। वहीं, महंत रामदास महाराज ने भी हर्षा रिछारिया के कथित बयान पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सभी साधु-संतों को एक ही नजरिए से देखना सही नहीं है। उनके अनुसार देश के अधिकांश आश्रम धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के केंद्र हैं, जहां संत समाज जनसेवा और धर्म के प्रचार-प्रसार में जुटा रहता है।
ब्रज के संतों में बयान को लेकर नाराजगी
संत समाज का कहना है कि यदि कहीं कोई अप्रिय घटना हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन उसके आधार पर पूरे संत समाज को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने हर्षा रिछारिया से ऐसे बयानों से बचने की अपील भी की। फिलहाल इस पूरे विवाद पर ब्रज के संतों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। हालांकि, संत समाज की आपत्तियों के बाद हर्षा रिछारिया की ओर से अब तक कोई नया बयान जारी नहीं किया गया है।
(रिपोर्ट: मोहन श्याम शर्मा)
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