नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर फ्रॉड पर सख्त रुख अपनाते हुए कई अहम अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को चार हफ्ते के भीतर म्यूल अकाउंट्स (फर्जी बैंक खातों) और साइबर फ्रॉड से जुड़े खातों से निपटने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले दिए गए आदेशों के बाद केंद्र सरकार, I4C, CBI, बैंकों और अन्य एजेंसियों ने कई कदम उठाए हैं। अदालत के मुताबिक, डिजिटल अरेस्ट ठगी की शिकायतें 2024 में 1,23,672 से घटकर 2025 में 58,249 रह गईं और 30 जून 2026 तक यह संख्या 16,377 हो गई है। ठगी की रकम में भी कमी आई है, लेकिन अदालत ने कहा कि लगातार निगरानी जरूरी है।
अदालत ने बताया कि मनी रिस्टोरेशन मैकेनिज्म के जरिए अब तक 36,290 मामलों में करीब 18.05 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए जा चुके हैं। वहीं ई-जीरो FIR सिस्टम 19 राज्यों में लागू है, जबकि केवल 14 राज्यों ने स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर शुरू किए हैं।
CBI की जांच का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि एजेंसी ने अब तक 10 डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच शुरू की है। एक मामले में 238 पीड़ित, 67 बैंक खाते और करीब 80 करोड़ रुपये के लेन-देन का पता चला है। इस मामले में 16 राज्यों के 93 ठिकानों पर छापेमारी भी की गई।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख दिशा-निर्देश
- RBI चार हफ्ते में म्यूल अकाउंट्स पर SOP तैयार कर सभी हाईकोर्टों के रजिस्ट्रार जनरल को भेजे।
- सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ग्रिवांस रिड्रेसल मॉड्यूल और मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल को जल्द पूरी तरह लागू करें और लोगों को इसकी जानकारी दें।
- सभी हाईकोर्ट अपने अधीन अदालतों को इस व्यवस्था की जानकारी दें, ताकि साइबर फ्रॉड में बैंक खाते फ्रीज होने के मामलों में पीड़ित पहले इस व्यवस्था का लाभ ले सकें।
- जिन राज्यों में अभी तक स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर या ई-जीरो FIR सिस्टम लागू नहीं हुआ है, वे चार हफ्ते के भीतर इसे शुरू करें।
- साइबर फ्रॉड में फ्रीज किए गए बैंक खातों से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा किया जाए।
- केंद्र सरकार की अंतर-विभागीय समिति पूरे देश में डिजिटल अरेस्ट, साइबर सुरक्षा, शिकायत दर्ज करने और ठगी की रकम वापस पाने की प्रक्रिया पर बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए।
- बैंकों और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ मिलकर ऐसी तकनीकी व्यवस्था तैयार की जाए, जिससे डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी रोकी जा सके, जांच आसान हो और ठगी की रकम वापस दिलाने में मदद मिले।
- सभी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (Legal Services Authorities) भी साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट से बचाव को लेकर जागरूकता अभियान चलाएं
मुआवजा व्यवस्था पर भी करें विचार
अदालत ने केंद्र सरकार की अंतर-विभागीय समिति को ‘शेयर्ड लाइबिलिटी’ और पीड़ितों के लिए मुआवजा (Victim Compensation) व्यवस्था बनाने की संभावना पर भी विचार करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब तक हुई प्रगति संतोषजनक है, लेकिन इन व्यवस्थाओं को पूरे देश में तेजी से लागू करना और उनकी लगातार निगरानी करना जरूरी है।
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