Balancing Parenting And Elderly care: आज के भागदौड़ भरे जीवन में हम एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहाँ ‘सुकून’ एक लग्जरी बन गया है. अगर आप खुद को एक ऐसे मोड़ पर पाते हैं जहां एक तरफ बच्चों का होमवर्क और स्कूल प्रोजेक्ट्स हैं, और दूसरी तरफ बुजुर्ग माता-पिता की दवाइयां और डॉक्टर के अपॉइंटमेंट्स, तो यकीन मानिए, आप अकेले नहीं हैं. आप ‘सैंडविच जनरेशन’ (Sandwich Generation) का हिस्सा हैं. इस ‘सैंडविच’ सिचुएशन में फंसकर जो चीज़ सबसे पहले दबती है, वह है आपका अपने पार्टनर के साथ रिश्ता.
रिश्ता एक नाजुक पौधे की तरह है, जिसे देखभाल की जरूरत होती है.
क्या आप भी सैंडविच जनरेशन का शिकार हैं?
सैंडविच जनरेशन उन लोगों को कहा जाता है जो अपनी उम्र के उस पड़ाव पर हैं जहाँ वे अपने बढ़ते बच्चों और बूढ़े होते माता-पिता, दोनों की देखभाल एक साथ कर रहे हैं. इस दोहरी जिम्मेदारी के बीच ‘हम’ (पार्टनरशिप) कहीं खो जाता है.
पार्टनर के साथ बॉन्ड मजबूत करने के 5 इमोशनल हेल्थ टिप्स-
रिश्ते को फिर से पटरी पर लाने के लिए आपको बड़े बदलावों की नहीं, बल्कि छोटी लेकिन निरंतर कोशिशों की जरूरत है:
1. ‘माइक्रो-डेट्स’ का कॉन्सेप्ट अपनाएं-
जब आपके पास 3 घंटे की मूवी देखने का समय न हो, तो 15 मिनट की चाय को ही अपनी डेट बना लें. बच्चों के सोने के बाद या माता-पिता के आराम करने के दौरान, बिना फोन के सिर्फ 10-15 मिनट एक-दूसरे के साथ बैठें. इसमें घर के कामों या समस्याओं की चर्चा न करें, बस एक-दूसरे का हाल पूछें.
2. अपनी भावनाओं को ‘अनफिल्टर्ड’ साझा करें-
अक्सर हम अपनी थकान या तनाव पार्टनर से इसलिए नहीं बताते कि वे भी पहले से परेशान हैं. लेकिन दबी हुई भावनाएं बाद में गुस्से के रूप में निकलती हैं. सप्ताह में एक बार “इमोशनल चेक-इन” करें. एक-दूसरे को बताएं कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं. याद रखें, आप एक ही टीम में हैं, एक-दूसरे के खिलाफ नहीं.
3. मदद मांगने में संकोच न करें-
सब कुछ अकेले करने की ‘सुपरह्यूमन’ वाली छवि छोड़ दें. अगर आर्थिक रूप से संभव हो, तो घर के कामों या बुजुर्गों की देखभाल के लिए कुछ समय के लिए मदद लें. जब आप शारीरिक रूप से कम थकेंगे, तभी आप पार्टनर को भावनात्मक समय दे पाएंगे.
4. ‘टच’ की ताकत को पहचानें-
थका देने वाले दिन के बाद एक लंबा आलिंगन (Hugging) या हाथ पकड़कर बैठना आपके शरीर में ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) हार्मोन रिलीज करता है, जिसे ‘लव हार्मोन’ कहा जाता है. यह तनाव को कम करने और सुरक्षा का अहसास दिलाने का सबसे आसान तरीका है.
5. अपराधबोध (Guilt) को त्यागें-
सैंडविच जनरेशन अक्सर इस गिल्ट में रहती है कि वे न तो बच्चों को पूरा समय दे पा रहे हैं और न माता-पिता को. याद रखें, आप तभी अच्छे केयरगिवर बन सकते हैं जब आप खुद खुश होंगे. पार्टनर के साथ बाहर जाना या सेल्फ-केयर करना कोई स्वार्थ नहीं, बल्कि जरूरत है.
रिश्ता एक नाजुक पौधे की तरह है, जिसे देखभाल की जरूरत होती है. सैंडविच जनरेशन की जिम्मेदारियां खत्म नहीं होंगी, लेकिन उनके बीच अपने पार्टनर का हाथ थामे रखना आपको उस बोझ को सहने की ताकत देगा. आज ही अपने पार्टनर की तरफ एक कदम बढ़ाएं, क्योंकि अंत में यह सफर आपको साथ ही तय करना है. याद रखें एक खुशहाल कपल ही एक खुशहाल परिवार की नींव होता है.








