पत्नी पर चाकूबाजी का पति पर लगा था आरोप; कोर्ट में मुकरते गए गवाह, अदालत ने आरोपी को किया बरी

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दिल्ली की एक अदालत ने पत्नी की हत्या के प्रयास और दहेज के लिए क्रूरता के मामले में आरोपी पति को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा। पत्नी ने अपने बयान में कहा था कि मफलर से चेहरा ढके एक व्यक्ति ने उस पर हमला किया था और उसने अपने पति को हमलावर के तौर पर नहीं पहचाना। जानिए आखिर क्या है पूरा मामला। 

अभियोजन आरोप साबित करने में नाकाम

दिल्ली की एक अदालत ने चाकू से हमला कर पत्नी की हत्या के प्रयास और दहेज के लिए क्रूरता करने के आरोपी व्यक्ति को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुनीत पाहवा 2018 में गोकलपुरी पुलिस थाने में हत्या के प्रयास और पति द्वारा क्रूरता के आरोपों में दर्ज मामले की सुनवाई कर रहे थे। अदालत ने 3 अगस्त के अपने आदेश में कहा “यह अदालत पक्के तौर पर मानती है कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए गवाहों में से कोई भी आरोपी का दोष बिना किसी शक के साबित नहीं कर सका। अभियोजन पक्ष की कहानी में कई कमियां रह गई हैं, जिनका फायदा आरोपी (Benefit of Doubt) को मिलना चाहिए।” 

मायके में पत्नी पर चाकू बाजी का आरोप

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, पति ने कथित तौर पर 15 जून, 2018 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में अपनी पत्नी के मायके में उस पर कई बार चाकू से हमला किया था। पुलिस का आरोप है कि मोटरसाइकिल, सोने की चेन और अंगूठी की मांग को लेकर हुए विवाद के बाद यह हमला किया गया। महिला के शरीर पर कई जगह चाकू के घाव थे। उसे इलाज के लिए जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी चोटों को गंभीर बताया था।

अहम गवाहों के मुकरने से कमजोर हुआ केस

हालांकि, सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर पड़ गया। क्योंकि ज्यादातर अहम गवाह या तो अपने पहले के बयानों से मुकर गए या आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सके। अभियोजन पक्ष के लिए सबसे बड़ा झटका पीड़िता की बहन की गवाही से लगा, जिसे मामले में कथित चश्मदीद गवाह बताया गया था।

जिरह पूरी होने से पहले गवाह की मौत

न्यायाधीश ने कहा कि सुनवाई के दौरान पीड़िता की बहन की मौत हो गई और इससे पहले उसकी जिरह पूरी नहीं हो सकी। ऐसे में उसकी गवाही को सबूत के तौर पर कोई महत्व नहीं दिया जा सकता। अदालत के मुताबिक, इस वजह से अभियोजन पक्ष के मामले को मजबूती देने वाला एक अहम साक्ष्य भी उसके हाथ से निकल गया।

पत्नी ने पति को हमलावर नहीं पहचाना

पीड़िता ने भी अभियोजन पक्ष की बात का समर्थन नहीं किया। अपने बयान में पत्नी ने कहा कि एक व्यक्ति, जिसका चेहरा मफलर से ढका हुआ था, उसके कमरे में घुसा और उस पर हमला किया। उसने अपने पति को हमलावर के तौर पर पहचानने से इनकार किया। अदालत ने यह भी कहा कि परिवार के अन्य सदस्यों को घटना की कोई प्रत्यक्ष जानकारी नहीं थी और उनके बयान सुनी-सुनाई बातों पर आधारित थे।

(इनपुट-भाषा)

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