रिलेशनशिप की ये 8 आदतें जो Gen Z के लिए हैं नॉर्मल, पर मिलैनियल्स ने कभी आजमाने की नहीं की हिम्मत

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जब बात प्यार और डेटिंग की आती है, तो हर पीढ़ी का अपना एक अंदाज होता है. आज के समय में दो पीढ़ियों की सोच में सबसे बड़ा अंतर देखने को मिलता है- एक तरफ हैं मिलैनियल्स (80 और 90 के दशक में पैदा हुए लोग) और दूसरी तरफ हैं जेन जी (यानी आज के युवा, जो 1997 के बाद पैदा हुए). मिलैनियल्स वो जनरेशन है जिसने प्यार के लिए थोड़ी बगावत की, लेकिन फिर भी वे रिश्तों में थोड़ा समझौता करने और ‘साथ जीने-मरने’ वाली सोच में यकीन रखते थे. वहीं, आज की जेन जी इंटरनेट और डेटिंग ऐप्स के दौर में बड़ी हुई है. ये लोग प्यार के मामले में बेहद प्रैक्टिकल हैं. इनके लिए अपना मानसिक सुकून और आत्मसम्मान सबसे पहले आता है.

हाल ही में हुए वैश्विक डेटिंग सर्वे और शोध(डेटिंग ट्रेंड्स एंड रिलेशनशिप स्टडी रिपोर्ट) के मुताबिक, लगभग 68% जेन जी (Gen Z) युवा अपने पार्टनर में ‘शारीरिक आकर्षण’ या ‘शुरुआती स्पार्क’ से ज्यादा ‘भावनात्मक परिपक्वता’ (Emotional Maturity) और ‘मानसिक सुरक्षा’ को प्राथमिकता देते हैं. रिसर्च बताती है कि आज की पीढ़ी उस रिश्ते को ज्यादा तवज्जो दे रही है जो उनकी मेंटल हेल्थ को स्थिर रखे, न कि उन्हें इमोशनल उथल-पुथल में डाले.

आइए बहुत ही आसान शब्दों में समझते हैं रिलेशनशिप की वो 8 बातें, जिन्हें आज की जेन जी बिल्कुल नॉर्मल मानती है, लेकिन मिलैनियल्स ने कभी ऐसा करने की हिम्मत नहीं की:

इमोशनल सेफ्टी और कंपैटिबिलिटी
रिलेशनशिप एक्सपर्ट एवं रिलेशनशिप काउंसलर डॉ. अनन्या शर्मा के अनुसार, पुराने दौर में रिश्तों की शुरुआत अक्सर एक ‘स्पार्क’ या दीवानेपन से होती थी, जिसे लोग सच्चा प्यार मान लेते थे. लेकिन आज की युवा पीढ़ी (Gen Z) मानसिक स्वास्थ्य को लेकर कहीं ज्यादा जागरूक है. वे समझ चुके हैं कि एक लंबा और मजबूत रिश्ता ‘तितलियों’ के उड़ने से नहीं, बल्कि एक ऐसे पार्टनर से चलता है जो आपको मानसिक सुकून और भावनात्मक सुरक्षा (Emotional Safety) दे सके.

प्राइवेसी और पहचान बनाए रखने पर (Individuality in Love)
मैरिज एंड फैमिली थेरेपिस्ट प्रीति झा के अनुसार, एक अच्छे कमिटमेंट का मतलब खुद को पूरी तरह मिटा देना या पार्टनर पर निर्भर हो जाना नहीं है. आज के युवा प्यार में होकर भी अपनी पहचान (Individuality) और आजादी को बनाए रखते हैं. सोशल मीडिया पर रिश्ते को प्राइवेट रखना या बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी हॉबीज को जीना, यह दिखाता है कि आज की जनरेशन प्यार और पर्सनल स्पेस के बीच एक परफेक्ट बैलेंस बनाना जानती है.”

बाउंड्रीज और बातचीत के तरीके पर (Modern Dating Dynamics)-
मिलैनियल्स के समय में रिश्ते में पहले दिन अपनी शर्तें या दायरे (Boundaries) तय करना ‘हाई-मेंटेनेंस’ या घमंडी होने का संकेत माना जाता था. आज जेन जी ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है. रिश्ते की शुरुआत में ही खुलकर बात करना किसी का अपमान नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति सम्मान है. यह शुरुआत में ही भविष्य की गलतफहमियों का रास्ता बंद कर देता है.

थेरेपिस्‍ट की मदद लेना
मिलैनियल्स के दौर में कपल्स थेरेपी या काउंसलिंग के पास तभी जाते थे, जब पानी सिर से ऊपर चला जाता था और रिश्ता टूटने की कगार पर होता था. लेकिन जेन जी के लिए थेरेपी कोई बुरी बात नहीं है. वे इसे गाड़ी की सर्विसिंग की तरह ‘रिलेशनशिप मेंटेनेंस’ मानते हैं, ताकि आपस में बातचीत और तालमेल को और बेहतर किया जा सके. आज के युवाओं का सीधा फंडा है कि रिश्ते में सिर्फ शुरुआती अट्रैक्शन होना काफी नहीं है, बल्कि एक-दूसरे की सोच और स्वभाव का मिलना (Compatibility) सबसे जरूरी है.

पुराने नियमों को नकारना
पहले के समय में तय था कि पैसे पुरुष संभालेंगे और घर या रिश्तों के इमोशन्स महिलाएं संभालेंगी. मिलैनियल्स ने काफी हद तक इसे निभाया भी. लेकिन जेन जी इन पारंपरिक नियमों (Gender Roles) को नहीं मानती. इंटरनेट पर ‘गर्ल जॉब’ या ‘बॉय जॉब’ को लेकर होने वाली बहसों में वे साफ कहते हैं कि घर के काम हों या पैसे का मामला, जिम्मेदारी जेंडर देखकर नहीं, बल्कि पसंद और काबिलियत के हिसाब से बंटनी चाहिए.

रिश्ते में रहकर भी आजादी जरूरी
मिलैनियल्स के दौर में माना जाता था कि सच्चे प्रेमी हर काम साथ ही करते हैं और एक-दूसरे पर पूरी तरह निर्भर रहते हैं. लेकिन जेन जी इसे सही नहीं मानती. आज के युवा रिश्ते में रहकर भी अपने दोस्तों से मिलते हैं, अकेले ट्रैवल करते हैं और अपनी हॉबीज पूरी करते हैं, और इसके लिए उन्हें पार्टनर से ‘परमिशन’ की जरूरत नहीं होती. अपनी पहचान बनाए रखना उनके लिए सबसे बड़ा ‘ग्रीन फ्लैग’ (अच्छा संकेत) है.

टॉक्सिक (जहरीले) बर्ताव को बर्दाश्त न करना
पुरानी फिल्मों और किताबों में जिसे ‘शिद्दत वाला प्यार’ कहा जाता था- जैसे हद से ज्यादा पजेसिव होना, शक करना, पार्टनर पर पाबंदियां लगाना या ‘मैं उसे बदल दूंगा’ वाली सोच, जेन जी उसे सीधा ‘टॉक्सिक’ यानी नुकसानदेह मानती है. सोशल मीडिया पर आज के युवा ऐसे व्यवहार की तारीफ करने के बजाय खुलकर उसका विरोध करते हैं और ऐसे रिश्ते से तुरंत बाहर निकल जाते हैं.

सीधे शब्दों में कहें, तो जेन जी का यह अंदाज दिखाता है कि वे प्यार के मामले में किसी झूठे भ्रम में नहीं जीना चाहते. जहां मिलैनियल्स प्यार के नाम पर थोड़ा समझौता और थोड़ा ड्रामा सहने को तैयार रहते थे, वहीं आज की जनरेशन के लिए उनका अपना मानसिक सुकून और आत्मसम्मान सबसे ऊपर है. तो क्‍या प्यार का यह नया और रियलिस्टिक रूप वाकई कमाल का है!



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