मध्य प्रदेश में कब होंगे छात्रसंघ चुनाव? सरकार ने हाईकोर्ट को बताया, सौंपा कैलेंडर

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें


मध्य प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे लाखों छात्रों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य में पिछले करीब नौ सालों से ठप पड़ी छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया अब दोबारा शुरू होने जा रही है। प्रदेश सरकार ने उच्च न्यायालय में आधिकारिक शैक्षणिक कैलेंडर पेश करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि आगामी सितंबर महीने में सभी शासकीय उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रसंघ चुनाव आयोजित किए जाएंगे।

जनहित याचिका पर हाई कोर्ट का फैसला

जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगल पीठ में इस मामले की अहम सुनवाई हुई। यह सुनवाई छात्र नेता अदनान अंसारी द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर की जा रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि राज्य के सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में वर्ष 2017 से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए हैं। इसके बावजूद हर साल विद्यार्थियों से चुनाव के नाम पर बाकायदा शुल्क वसूला जा रहा है, जो उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा चुनाव कराने की विस्तृत योजना और शेड्यूल पेश किए जाने के बाद अदालत ने इस याचिका का पूरी तरह से निस्तारण कर दिया।

लिंगदोह समिति और शैक्षणिक कैलेंडर का पालन

याचिकाकर्ता की ओर से यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया था कि राज्य सरकार छात्रसंघ चुनावों से जुड़ी ‘लिंगदोह समिति’ की सिफारिशों को सख्ती से लागू करने में नाकाम रही है। इसी के मद्देनजर हाई कोर्ट ने इस साल जनवरी में सुनवाई के दौरान सरकार को वर्ष 2026-27 के सत्र के लिए एक स्पष्ट शैक्षणिक कैलेंडर तैयार कर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। राज्य सरकार द्वारा सोमवार को प्रस्तुत किए गए इसी आधिकारिक कैलेंडर में सितंबर में चुनाव कराने का स्पष्ट प्रावधान शामिल किया गया है।

शांतिपूर्ण चुनाव के लिए सुरक्षा और प्रशासन को निर्देश

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान कैंपस में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए जाएं। इस पर गंभीरता दिखाते हुए हाई कोर्ट की पीठ ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और महाविद्यालयों के प्राचार्यों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि संस्थान प्रमुख आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन से हर संभव मदद लें, ताकि पूरी चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से पूरा कराया जा सके।

PTI Input

ये भी पढ़ें:  ‘आदिपुरुष’ से भी बड़ा बवंडर, जब 18 साल पहले आई फेमिनिस्ट रामायण, मिली 100% रेटिंग, फिर भी छिड़ा महाविवाद





Source link

Leave a Comment

और पढ़ें