लोन की ब्याज दरें घटेंगी या बढ़ेंगी, कल शुरू होगी RBI MPC की मीटिंग, 5 अगस्त को होगी फैसलों की घोषणा

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महंगाई के बढ़ते जोखिम और FCNR (B) डिपॉजिट स्कीम पर रुख को लेकर इंतजार के बीच भारतीय रिजर्व बैंक अपनी अगस्त की मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही कायम रख सकता है। देश के 10 अर्थशास्त्रियों और ट्रेजरी प्रमुखों के एक सर्वे से ये बात सामने आई है। ज्यादातर जानकारों का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और असमान मानसून से महंगाई के बढ़ते जोखिमों के बीच आक्रामक रुख अपनाते हुए अपनी नीतिगत स्थिति को ‘तटस्थ’ बनाए रखेगा। 

आरबीआई ने आखिरी बार दिसंबर 2025 में रेपो रेट में की थी कटौती

अर्थशास्त्रियों ने कहा कि केंद्रीय बैंक ”देखो और प्रतीक्षा करो” की मुद्रा में रहेगा क्योंकि वो महंगाई के उभरते परिदृश्य का आकलन कर रहा है। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ”फिलहाल, मुद्रास्फीति नरम बनी हुई है और ऐसे में यथास्थिति ही सबसे अच्छा नीतिगत विकल्प है।” बताते चलें कि इस साल आरबीआई ने फरवरी, अप्रैल और जून में हुई मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। आरबीआई ने आखिरी बार दिसंबर 2025 में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी

फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (बैंक) योजना की सफलता का इंतजार करेगा RBI

जन स्मॉल फाइनेंस बैंक के ट्रेजरी प्रमुख गोपाल त्रिपाठी ने कहा कि केंद्रीय बैंक मानसून की स्थिति और फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (बैंक) योजना की सफलता का इंतजार करेगा। पॉलिसी रेट पर फैसला करने के लिए मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) सोमवार, 3 अगस्त से 5 अगस्त के बीच मीटिंग करेगी और 5 अगस्त को ही फैसलों की घोषणा की जाएगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्रोथ रेट को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल से रेपो दर में 1.25 प्रतिशत की कटौती की है। 

चालू वित्त वर्ष में रेपो रेट घटने की कोई उम्मीद नहीं, बढ़ोतरी की संभावनाएं ज्यादा

अगस्त में ठहराव की उम्मीदों के बावजूद, ज्यादातर एक्सपर्ट्स वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान रेपो रेट में बढ़ोतरी होने की संभावना देखते हैं। अगर महंगाई का दबाव बढ़ता है, तो ज्यादातर एक्सपर्ट्स चालू वित्त वर्ष के दौरान कम से कम दो बार रेपो रेट में बढ़ोतरी की उम्मीद करते हैं। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता ने कहा कि महंगाई का दबाव काफी हद तक सप्लाई पर आधारित है और इसके लिए तत्काल मॉनेटरी पॉलिसी प्रतिक्रिया की जरूरत नहीं हो सकती है।

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