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डेलुलु डेटिंग, रिलेशनशिप वर्ल्ड में काफी चर्ची में है, जिसमें पार्टनर भ्रम में रहकर रिश्ता निभाता है. पार्टनर का व्यवहार अगर बुरा हो तो उसको नजरअंदाज कर वह उम्मीदें बना लेते हैं कि आगे सब ठीक हो जाएगा.
डेलुलु डेटिंग भी रिलेशनशिप का नया टर्म.
आजकल डेटिंग की दुनिया में नए-नए तरह के टर्म्स सुनने को मिल रहे हैं. हाल ही में “डेलुलु डेटिंग” (Delulu Dating) नाम का एक नया ट्रेंड तेजी से चर्चा में है. यह शब्द “delusional” यानी भ्रम में रहने से जुड़ा है, जहां लोग अपने रिश्ते की हकीकत को नजरअंदाज कर एक परफेक्ट और कल्पनाओं से भरी तस्वीर बना लेते हैं. ऐसे लोग अपने पार्टनर की कमियों को नजरअंदाज कर देते हैं और यह मानते रहते हैं कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा, लेकिन यह उनके दुख को और बढ़ाता रहता है.
इस ट्रेंड में सबसे बड़ी बात यह है कि लोग “जो है” उससे ज्यादा “क्या हो सकता है” उसपर भरोसा करने लगते हैं. यानी पार्टनर का व्यवहार कैसा है, यह देखने के बजाय वे यह सोचते रहते हैं कि वह आगे चलकर बदल जाएगा. कई बार लोग अपने रिश्ते को लेकर इतनी ज्यादा उम्मीदें बना लेते हैं कि वे खुद ही एक कहानी गढ़ लेते हैं, जो असलियत से काफी अलग होती है. यही कारण है कि वे बार-बार मिलने वाले रेड फ्लैग्स को भी नजरअंदाज कर देते हैं.
मनी कंट्रोल में छपी रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली स्थित रिलेशनशिप एक्सपर्ट रूचि रूह ने इसके पीछे के मनोवैज्ञानिक कारणों को भी समझाया है. कई बार लोग अकेलेपन के डर से या पिछले रिश्तों के खराब अनुभव के कारण नए रिश्ते को किसी भी कीमत पर बचाना चाहते हैं. कुछ लोग प्यार को बहुत ज्यादा आदर्श मान लेते हैं और मानते हैं कि सच्चा प्यार हर समस्या को ठीक कर सकता है. इसके अलावा, सोशल मीडिया का भी इसमें बड़ा रोल है, जहां परफेक्ट रिलेशनशिप की तस्वीरें देखकर लोग अपने रिश्ते से भी वैसी ही उम्मीदें करने लगते हैं.
डेलुलु डेटिंग का असर धीरे-धीरे व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर पड़ने लगता है. शुरुआत में यह सोच सकारात्मक लग सकती है, लेकिन जब बार-बार उम्मीदें टूटती हैं, तो व्यक्ति को गहरी निराशा होती है. कई लोग खुद को दोष देने लगते हैं और उनका आत्मविश्वास कम होने लगता है. इतना ही नहीं, वे सही और स्वस्थ रिश्तों को भी पहचान नहीं पाते, क्योंकि वे गलत रिश्ते में ही उम्मीद लगाए बैठे रहते हैं.
रूचि रूह का मानना है कि किसी भी रिश्ते में आंखें बंद करके भरोसा करने के बजाय संतुलित नजरिया रखना जरूरी है. अगर शुरुआत में ही कुछ चीजें गलत लगती हैं, तो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय समझने और उस पर बात करने की जरूरत होती है. रिश्ते को बचाने की कोशिश अच्छी बात है, लेकिन अपनी भावनाओं और आत्मसम्मान की कीमत पर नहीं.
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विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…
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March 23, 2026, 16:27 IST








