5 लाख की ठगी की जांच में 125 करोड़ के साइबर फ्रॉड का खुलासा, पटना से 4 आरोपी अरेस्ट

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गुजरात के सूरत शहर साइबर क्राइम सेल ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पटना के एक होटल से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों का जामताड़ा से देवघर और फिर पटना तक करीब 2,456 किलोमीटर पीछा किया। जांच में सामने आया कि महज 5 लाख रुपये की साइबर ठगी से शुरू हुई जांच ने देशभर में फैले 125.39 करोड़ रुपये से अधिक के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।

ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर करणराज सिंह वाघेला के मुताबिक, 15 से 18 मई 2026 के बीच आरोपियों ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के नाम से फर्जी ‘PNB One’ APK फाइल तैयार की थी। इस फर्जी एप्लीकेशन को हूबहू बैंकिंग ऐप जैसा दिखाकर लोगों के मोबाइल पर व्हाट्सऐप के जरिए भेजा जाता था। जैसे ही कोई व्यक्ति APK फाइल डाउनलोड करता, आरोपियों को उसके मोबाइल का एक्सेस मिल जाता था। इसके बाद मोबाइल को हैक कर बैंक खाते से रकम ट्रांसफर कर ली जाती थी।

इसी तरीके से एक शिकायतकर्ता के खाते से आरोपियों ने करीब 5 लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए थे। शिकायत के आधार पर सूरत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू की गई।

जामताड़ा से शुरू हुआ पीछा, पटना में गिरफ्तारी

तकनीकी जांच में साइबर ठगी के तार झारखंड के जामताड़ा और देवघर से जुड़े होने का पता चला। इसके बाद सूरत साइबर सेल की टीम जामताड़ा पहुंची और सर्च ऑपरेशन शुरू किया। तकनीकी निगरानी के दौरान पुलिस को गिरोह के मुख्य आरोपी जहरूल अंसारी उर्फ चांद की लोकेशन मिली। वह ट्रेन से यात्रा कर रहा था।

पुलिस टीम ने जामताड़ा से देवघर और फिर देवघर से पटना तक सड़क और ट्रेन के जरिए उसका लगातार पीछा किया। आखिरकार पटना शहर के एक होटल में दबिश देकर मुख्य आरोपी जहरूल अंसारी उर्फ चांद समेत राजन कुमार, सुनील प्रसाद सोनी और आदित्यराज उर्फ अमन को गिरफ्तार कर लिया गया।

336 फर्जी APK, 31 हजार से ज्यादा मोबाइल में इंस्टॉल

पुलिस जांच में साइबर ठगी के नेटवर्क का चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मुख्य आरोपी चांद द्वारा तैयार और प्रसारित की गई 336 फर्जी APK फाइलें देश भर में 31,174 मोबाइल फोन में इंस्टॉल हुई थीं। इनमें से 5,613 मोबाइल फोन हैक किए गए और उनके जरिए साइबर ठगी की गई।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस गिरोह ने देश भर में 125.39 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और लेन-देन की कड़ियों की जांच कर रही है।

ऐसे काम करता था ये साइबर गैंग

जांच में सामने आया कि गिरोह साइबर ठगी के लिए विशेष रूप से दो एंड्रॉयड एप्लीकेशन का इस्तेमाल करता था। पहली ऐप लोगों के मोबाइल फोन को हैक करने के लिए बनाई गई थी, जबकि दूसरी ऐप के जरिए गिरोह के सदस्य हैक किए गए मोबाइल का एक्सेस हासिल करते थे।

आरोपी व्हाट्सऐप और टेलीग्राम के माध्यम से लोगों को बैंक के नाम से फर्जी APK फाइल भेजते थे। फाइल डाउनलोड होते ही मोबाइल का नियंत्रण आरोपियों के पास पहुंच जाता था। इसके बाद वे पीड़ित के बैंकिंग डेटा, KYC से जुड़ी जानकारी, SMS, कॉन्टैक्ट, कॉल लॉग और फोटो गैलरी समेत कई संवेदनशील जानकारियों तक पहुंच हासिल कर लेते थे।

इसके बाद बैंक खातों और पेमेंट एप्स से रकम निकालकर उसे म्यूल अकाउंट और फर्जी क्रेडिट कार्ड के जरिए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था। बाद में रकम को नकद में बदलकर कैश डिपॉजिट मशीन (CDM) के जरिए अन्य खातों में जमा किया जाता था।

(रिपोर्ट- शैलेष चांपानेरिया)

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