पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में काराकोरम रेंज की ब्रॉड पीक पर आए जबरदस्त बर्फीले तूफान (एवलांच) के बाद, मशहूर नेपाली पर्वतारोही निर्मल पुर्जा की मौत की पुष्टि हो गई है। दरअसल बर्फीले तूफान के बाद पुर्जा के लापता होने के दो दिन बाद, जिस एक्सपीडिशन कंपनी ‘एलीट एक्सपेड’ से वे जुड़े थे, उसने इंस्टाग्राम पर एक बयान जारी करके मौत की पुष्टि की है।
पुर्जा 43 साल के थे। वे ब्रॉड पीक पर चढ़ने के लिए एक अभियान का नेतृत्व कर रहे थे। इसी दौरान गुरुवार दोपहर हिमस्खलन हुआ और टीम के सभी 10 सदस्यों से संपर्क टूट गया। इस अभियान में जो लोग शामिल थे, उसमें नेपाल के छह और पाकिस्तान, ओमान, अमेरिका और चीन का एक-एक पर्वतारोही शामिल था। पाकिस्तानी पर्वतारोही सोहेल सखी भी इस टीम का हिस्सा थे।
एलीट एक्सपेड ने पुर्जा को दी श्रद्धांजलि
जिस एक्सपीडिशन कंपनी ‘एलीट एक्सपेड’ से पुर्जा जुड़े थे, उस कंपनी ने पुर्जी को श्रद्धांजलि दी और पुर्जा को एक लीडर बताया, जिसने अपने हिम्मत और विनम्रता से लाखों लोगों के भरोसे को प्रेरित किया।
नेपाल के पीएम ने दी श्रद्धांजलि
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने पर्वतारोहण के दिग्गज और पांच अन्य नेपाली पर्वतारोहियों को श्रद्धांजलि दी। पीएम ने कहा कि पर्वतारोहण का मतलब सिर्फ़ चोटी तक पहुंचना नहीं है, बल्कि यह साहस, अनुशासन, त्याग और इंसानी सीमाओं को आगे बढ़ाने के संकल्प का प्रतीक है।
पीएम शाह ने ये भी कहा कि उनकी शारीरिक यात्रा समाप्त हो गई लेकिन उनका साहस, समर्पण और योगदान इतिहास में जीवित रहेगा और पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
आखिर कौन थे पुर्जा?
पुर्जा को दुनिया के सबसे मशहूर पर्वतारोहियों में गिना जाता था। उन्हें 2019 में पॉपुलेरिटी मिली जब उन्होंने छह महीने से कुछ ज़्यादा समय में दुनिया की 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों पर चढ़ाई पूरी की। जिस चुनौती को
दक्षिण कोरियाई पर्वतारोही किम चांग-हो ने 7 महीने में पूरा किया था, उस रिकॉर्ड को पुर्जा ने तोड़ दिया।
पुर्जा के इस रिकॉर्ड-तोड़ने वाले अभियान पर बाद में नेटफ्लिक्स की डॉक्यूमेंट्री ’14 पीक्स: नथिंग इज़ इम्पॉसिबल’बनाई गई।
प्रोफ़ेशनल पर्वतारोही बनने से पहले, पुर्जा ने 16 साल ब्रिटिश सेना में सेवाएं दीं। उन्होंने अपने जुनून से पर्वतारोहियों के बीच अपने लिए बेशुमार प्यार और सम्मान कमाया, जिसे लोग ताउम्र याद करेंगे।
गौरतलब है कि एक बार ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जब माउंट एवरेस्ट के चीन वाले हिस्से में अंत में आए बर्फीले तूफान के कारण करीब 900 पर्वतारोही फंस गए थे। बड़ी मुश्किल से बर्फीले तूफान में फंसे सैकड़ों हाइकर्स की जान बची थी।
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