मैरिज थेरेपिस्ट से मिलने में हो रही झिझक? ये 5 आसान तरीके बढ़ाएंगे आपका कॉन्फिडेंस, दूर कर पाएंगे रिश्तों में कड़वाहट

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Tips To Meet Relationship Therapist: एक समय था जब जोड़ों के बीच झगड़े घर की चारदीवारी तक सीमित रहते थे और समाधान के नाम पर ‘समझौता’ ही एकमात्र विकल्प होता था. लेकिन आधुनिक दौर में रिश्तों की जटिलताएं बढ़ी हैं, तो उनके समाधान के तरीके भी विकसित हुए हैं. मैरिज थेरेपी इसी आधुनिक समाधान का एक हिस्सा है. बावजूद इसके, भारत में आज भी कई जोड़े किसी बाहरी व्यक्ति (थेरेपिस्ट) के सामने अपने निजी जीवन के पन्ने खोलने में घबराहट और झिझक महसूस करते हैं. अगर आप या आपके पार्टनर भी इसी कशमकश में हैं, तो ये 5 तरीके आपकी इस झिझक को दूर कर आपका आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं.

1. यह स्वीकार करें कि ‘थेरेपी’ हार नहीं, एक उपाय है
प्रसिद्ध रिलेशनशिप एक्सपर्ट डॉ. जॉन गॉटमैन का मानना है कि जो जोड़े थेरेपी चुनते हैं, वे अपने रिश्ते को छोड़ना नहीं चाहते, बल्कि उसे बचाने के लिए लड़ रहे होते हैं. दरअसल, थेरेपी को ‘रिश्ता खत्म होने का संकेत’ मानने के बजाय इसे ‘इमोशनल हेल्थ इंश्योरेंस’ की तरह देखें. जैसे हम शारीरिक बीमारी के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं, वैसे ही मानसिक शांति के लिए थेरेपिस्ट से मिलना पूरी तरह सामान्य है.

2. ‘शर्म’ (Stigma) के बोझ को उतारें
अक्सर लोग सोचते हैं कि “दुनिया क्या कहेगी?” या “क्या हम इतने कमजोर हैं कि खुद की समस्या नहीं सुलझा सकते?”जबकि हार्वर्ड हेल्थ की एक रिसर्च के अनुसार, प्रोफेशनल सलाह लेना कमजोरी नहीं बल्कि परिपक्वता (Maturity) की निशानी है. एक न्यूट्रल थर्ड पार्टी आपको वह देख पाने में मदद करती है जो आप गुस्से या तनाव में नहीं देख पा रहे होते.

3. शुरुआत करें ऑनलाइन कंसल्टेशन से
अगर आपको क्लीनिक जाने में झिझक हो रही है, तो ऑनलाइन थेरेपी एक बेहतरीन विकल्प है. यहां आप अपने घर के सुरक्षित और आरामदायक माहौल में बैठकर बात कर सकते हैं. यह प्राइवेसी को लेकर होने वाली चिंता को कम करता है और आपको थेरेपिस्ट के साथ ‘रैपो’ (तालमेल) बनाने का समय देता है.

4. पहले ‘अकेले’ मिलने का विकल्प चुनें
जरूरी नहीं कि पहली ही मीटिंग में आप दोनों साथ जाएं. अगर आपका पार्टनर तैयार नहीं है या आप सहज महसूस नहीं कर रही हैं, तो आप अकेले किसी प्रोफेशनल से मिल सकती हैं. जब आप अकेले बात करती हैं, तो आपको अपनी समस्याओं को स्पष्ट रूप से समझने का मौका मिलता है. अक्सर जब एक पार्टनर खुद पर काम करना शुरू करता है, तो दूसरे पार्टनर की झिझक भी धीरे-धीरे कम होने लगती है.

5. ‘परफेक्ट कम्युनिकेशन’ पर ध्यान दें
मैरिज थेरेपी का उद्देश्य किसी एक को गलत साबित करना नहीं, बल्कि बातचीत के उन रास्तों को खोलना है जो बंद हो चुके हैं. इसलिए थेरेपिस्ट से मिलने से पहले अपने डर और उम्मीदों की एक लिस्ट बनाएं. जब आप स्पष्ट लक्ष्य के साथ जाती हैं, तो झिझक अपने आप कम हो जाती है.

ये बात है काम की
अमेरिकन एसोसिएशन फॉर मैरिज एंड फैमिली थेरेपी (AAMFT) के आंकड़े बताते हैं कि थेरेपी लेने वाले 98% जोड़ों ने माना कि उन्हें बेहतर कॉम्‍यूनिकेशन करने के तरीके सीखने को मिले. रिश्तों में ‘किचन सिंकिंग’ यानी पुरानी बातें खोदने जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए थेरेपी एक साइंटिफिक तरीका है.

याद रखें, रिश्तों में कड़वाहट आना स्वाभाविक है, लेकिन उस कड़वाहट को स्थायी बन जाने देना आपकी च्‍वाइस है. आपका एक छोटा सा कदम और एक प्रोफेशनल की सलाह आपके घर की खुशियों को दोबारा लौटा सकती है.

आपके मन में उठने वाले हर सवाल का जवाब-

सवाल 1: हमें कैसे पता चलेगा कि हमें मैरिज थेरेपिस्ट की जरूरत है?
 जवाब: अगर आप दोनों के बीच बातचीत बंद हो गई है, हर छोटी बात झगड़े का रूप ले लेती है, या आप एक-दूसरे से अपनी भावनाएं साझा करने में डर महसूस करते हैं, तो यह सही समय है किसी प्रोफेशनल से मिलने का. थेरेपी तब नहीं ली जाती जब रिश्ता टूट जाए, बल्कि तब ली जाती है जब आप उसे टूटने से बचाना चाहते हों.

सवाल 2: अगर मेरा पार्टनर थेरेपिस्ट के पास जाने को तैयार न हो, तो मैं क्या करूँ?
 जवाब: यह बहुत आम समस्या है. उन पर दबाव डालने के बजाय, आप अकेले सेशन शुरू कर सकती हैं. जब आप अपनी प्रतिक्रियाओं और व्यवहार में बदलाव लाएंगी, तो अक्सर पार्टनर भी प्रभावित होकर साथ आने को तैयार हो जाते हैं. उन्हें समझाएं कि यह किसी को ‘दोषी’ ठहराने के लिए नहीं, बल्कि घर का माहौल बेहतर करने के लिए है.

सवाल 3: क्या थेरेपिस्ट हमारी निजी बातें किसी और को बता सकता है?
जवाब:
बिल्कुल नहीं. प्रोफेशनल थेरेपिस्ट ‘गोपनीयता की शपथ’ (Confidentiality) से बंधे होते हैं. आपकी बातें पूरी तरह सुरक्षित रहती हैं. एक न्यूट्रल थर्ड पार्टी के सामने बोलने का फायदा यही है कि वहां आपको जज (Judge) किए जाने का डर नहीं होता.

सवाल 4: मैरिज थेरेपी में असल में होता क्या है? क्या वहां हमें डांट पड़ती है?
जवाब:
नहीं, थेरेपिस्ट कोई जज या स्कूल टीचर नहीं है. वहां ‘कम्युनिकेशन स्किल्स’ पर काम होता है. वे आपको सिखाते हैं कि बिना चिल्लाए अपनी बात कैसे रखें और पुराने विवादों (जैसे किचन सिंकिंग) को कैसे सुलझाएं. वे आपको एक-दूसरे का नजरिया समझने में मदद करते हैं.

सवाल 5: थेरेपी के कितने सेशन में रिश्ता सुधर जाता है?
जवाब:
यह हर जोड़े और उनकी समस्या की गहराई पर निर्भर करता है. कुछ जोड़ों को 4-5 सेशन में ही रास्ता मिल जाता है, जबकि कुछ को ज्यादा समय लगता है. यह कोई ‘जादू की छड़ी’ नहीं है, बल्कि एक प्रक्रिया है जिसमें दोनों पार्टनर्स की मेहनत और धैर्य की जरूरत होती है.



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