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How to bring back romance after kids : बच्चा होने के बाद कपल्स अक्सर अपनी ‘प्रेमी’ (Lover) वाली भूमिका को भूलकर पूरी तरह से ‘केयरगिवर’ (Caregiver) की भूमिका में आ जाते हैं.लेकिन अगर यह स्थिति सालों तक बनी रहे और आप एक-दूसरे के प्रति आकर्षण बिल्कुल खो दें, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है. इससे रिश्ते में बोरियत और भावनात्मक दूरी आ सकती है. क्या है इसका उपाय.
मनोवैज्ञानिकों का साफ कहना है कि “कम्युनिकेशन ही इसकी चाभी है”.
Relationship Advice For New Parents: शादी के कुछ साल बाद और खासकर बच्चा होने के बाद, कई कपल्स को एक अजीब सी स्थिति का सामना करना पड़ता है. वो ए क-दूसरे से प्यार तो बहुत करते हैं, लेकिन उनके बीच का वो ‘रोमांटिक स्पार्क’ कहीं खो जाता है. हालत ये हो जाती है कि पति-पत्नी प्रेमी-प्रेमिका के बजाय एक-दूसरे को ‘भाई-बहन’ (Sibling Bond) जैसा महसूस करने लगते हैं. सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन क्या यह वाकई खतरे की घंटी है? चलिए, आज हम इसी ‘सिब्लिंग बॉन्ड’ की हकीकत और इसे दूर करने के तरीकों पर बात करते हैं.
मनोवैज्ञानिकों का साफ कहना है कि “कम्युनिकेशन ही इसकी चाभी है”.
मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि बच्चा होने के बाद कपल्स अक्सर अपनी ‘प्रेमी’ (Lover) वाली भूमिका को भूलकर पूरी तरह से ‘केयरगिवर’ (Caregiver) की भूमिका में आ जाते हैं. जब आप दिन भर सिर्फ माता-पिता बनकर रहते हैं, तो दिमाग का वह हिस्सा शांत हो जाता है जो रोमांस और आकर्षण के लिए जिम्मेदार होता है.
क्या यह सामान्य है या खतरा?
विशेषज्ञों की मानें तो एक हद तक यह सामान्य है. लंबे समय तक साथ रहने पर जुनून का कम होना और दोस्ती का बढ़ना स्वाभाविक है. लेकिन अगर यह स्थिति सालों तक बनी रहे और आप एक-दूसरे के प्रति आकर्षण बिल्कुल खो दें, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है. इससे रिश्ते में बोरियत और भावनात्मक दूरी आ सकती है.
क्यों होता है ऐसा
दरअसल, बच्चा होने के बाद मां (और कभी-कभी पिता) के शरीर में ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) हार्मोन का स्तर बहुत बढ़ जाता है. इसे ‘कडल हार्मोन’ भी कहते हैं. यह हार्मोन सुरक्षा और ममता की भावना तो बढ़ाता है, लेकिन कई बार यह ‘सेक्सुअल डिजायर’ को दबा देता है. मनोवैज्ञानिक इसे “सेफ लव” (Safe Love) कहते हैं, जो भाई-बहन या गहरे दोस्तों के बीच होता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति से बाहर निकलना मुमकिन है. यहाँ कुछ तरीके दिए गए हैं:
- ‘कपल टाइम’ को शेड्यूल करें: जिस तरह आप ऑफिस मीटिंग या बच्चे का डॉक्टर अपॉइंटमेंट शेड्यूल करते हैं, वैसे ही एक-दूसरे के लिए वक्त भी तय करें. यह सुनने में अननेचुरल लग सकता है, लेकिन यह रिश्ते को प्राथमिकता देता है.
- सराहना का अभ्यास करें (Practice Appreciation): हम अक्सर अपने पार्टनर को ‘टेकन फॉर ग्रांटेड’ ले लेते हैं. छोटी-छोटी बातों के लिए शुक्रिया कहें. इससे ‘पॉजिटिव फीडबैक लूप’ बनता है जो भावनात्मक दूरी को कम करता है.
- नयापन लाएं: नई गतिविधियाँ साथ करने से दिमाग में डोपामाइन (Dopamine) रिलीज होता है, जो वही अहसास पैदा करता है जैसा कि रिश्ते की शुरुआत में होता है. साथ में कोई नई हॉबी शुरू करें या नई जगह घूमने जाएं.
- शारीरिक स्पर्श जरूरी: जरूरी नहीं कि यह हमेशा इंटिमेसी ही हो. बस हाथ पकड़ना, कंधे पर सिर रखना या बिना किसी खास वजह के गले मिलना भी उस ‘सिब्लिंग’ वाली फीलिंग को खत्म कर फिर से ‘पार्टनर’ वाली फीलिंग जगाने में मदद करता है.
मनोवैज्ञानिकों का साफ कहना है कि “कम्युनिकेशन ही इसकी चाभी है”. अगर आप इस बदलाव के बारे में एक-दूसरे से खुलकर बात नहीं करेंगे, तो यह दूरी बढ़ती जाएगी. इस अहसास को स्वीकार करना ही इसे ठीक करने का पहला कदम है.
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मैंने लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वूमन से अपनी ग्रेजुएशन और मिरांडा हाउस से मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता करियर की शुरुआत दूरदर्शन(2009) से की, जिसके बाद दैनिक भास्कर सहित कई प्रमुख अख़बारों में मेनस्ट्र…
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April 14, 2026, 15:44 IST









