नेपाल बाढ़ पर मनीषा कोइराला ने जताई चिंता, भारत-चीन से एकजुट होने की अपील, हुईं भावुक

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बॉलीवुड एक्ट्रेस मनीषा कोइराला ने भारत, चीन और नेपाल से मिलकर कोशिश करने की अपील की है, क्योंकि देश अचानक आई बाढ़ के दुख से जूझ रहा है। एक्ट्रेस ने रविवार, 30 अगस्त को आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु की अगुवाई में हुए एक खास एकजुटता कार्यक्रम ‘इन सॉलिडैरिटी विद नेपाल’ में यह अपील की। मनीषा ने ग्लोबल वार्मिंग को उन वजहों में से एक बताया, जिन पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने पड़ोसी देशों से अपील की कि वे मौसम से जुड़ी आपदाओं के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए मिलकर काम करें। इसके पहले सोशल मीडिया पर अनुपम खेर ने लोगों से एक-दूसरे की मदद करने की अपील की थी।

बाढ़ की तबाही पर बोलीं मनीषा कोइराला

ANI के शेयर किए गए एक वीडियो में एक्ट्रेस ने कहा, ‘हम ग्लोबल वार्मिंग का बुरा असर झेल रहे हैं। हमारा अगला कदम क्या होना चाहिए? मेरी गुजारिश है कि हम इंसान के तौर पर और हमारे महान पड़ोसी देश – चीन, भारत और नेपाल किसी तरह साथ आएं और मिलकर कुछ करें। हम एक-दूसरे से बहुत गहराई से जुड़े हुए हैं और ऐसी चीजों से बचने की कोशिश करें। मैं उम्मीद और प्रार्थना करती हूं। इस विनाशकारी पल को समझकर हम बेहतर इंसान बनें। हम दूसरों की भी वैसे ही मदद करें जैसे हम अपनों की करते हैं।’

मनीषा कोइराला ने भारत-चीन से मांगा साथ

एक्ट्रेस ने लोगों से बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद करने की भी अपील की। ​​मनीषा कोइराला ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वे नेपाल के लिए अपना समर्थन जारी रखें। उन्होंने आगे कहा, ‘इसके अलावा मैं सभी अंतरराष्ट्रीय समुदायों से गुजारिश करना चाहती हूं, मैं प्रार्थना करती हूं कि आपका प्यार और समर्थन बना रहे। एक देश के तौर पर हमें जरूरत है कि लोग हमारे देश आएं। हम यह नहीं चाहते कि हमारी पहचान अरे, यह देश तो आपदाओं से भरा है वाली बने। हमें जरूरत है कि आप सभी यहां आएं और घूमें-फिरें। हां, तिब्बत और नेपाल बॉर्डर पर आपदा आई है, लेकिन टूरिज्म तो जिंदगी की सांस की तरह है।’

नेपाल में अचानक आई बाढ़

मनीषा की ये बातें ऐसे समय में आई हैं, जब नेपाल विनाशकारी बाढ़ का सामना कर रहा है। रविवार को नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 781 हो गई, क्योंकि बचाव दल प्रभावित इलाकों से शव निकालते रहे। अधिकारियों ने बताया कि 2,500 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। यह आपदा 26 अगस्त को आई थी, जब नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से बर्फ और चट्टानों का एवलांच आया, जिससे पानी, कीचड़ और मलबे का एक विशाल सैलाब नीचे की ओर बह निकला। बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कुछ हिस्सों में तबाही मचाई, कस्बों और गांवों को नष्ट कर दिया।

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