Highlights
- राहुल गांधी के तीखे बयानों पर ‘कॉफी पर कुरुक्षेत्र’ में विस्तार से चर्चा हुई।
- बहस का मुख्य मुद्दा यह रहा कि आक्रामक भाषा से कांग्रेस को फायदा होगा या नुकसान।
- संसद के हंगामे, जंतर-मंतर प्रदर्शन और यूपी चुनाव की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर दिए गए तीखे बयानों पर सियासी बहस तेज हो गई है। राहुल गांधी ने एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर बेहद तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि लोग दोनों नेताओं से बेवजह डरते हैं। उन्होंने नरेंद्र मोदी और अमित शाह को ‘क्लाउंस’ और ‘जोकर’ तक कहा। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें भारत के इतिहास और दर्शन की समझ नहीं है और वे आज के भारत को नहीं समझते। इंडिया टीवी के लोकप्रिय कार्यक्रम कॉफी पर कुरुक्षेत्र में एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा ने वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह, राजनीतिक विश्लेषक मनोज कुमार सिंह और इंडिया टीवी के पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पाराशर के साथ इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की।
‘12 साल की निराशा अब खुलकर सामने आई’
कार्यक्रम में विश्लेषकों ने राहुल गांधी की भाषा को लेकर सवाल उठाए गए। चर्चा में कहा गया कि कांग्रेस लंबे समय से चुनावी चुनौतियों का सामना कर रही है, जबकि बीजेपी केंद्र में लगातार तीसरी बार सरकार बना चुकी है। ऐसे में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के लिए इस तरह की भाषा कांग्रेस की राजनीतिक निराशा को दिखाती है। यह भी चर्चा हुई कि ऐसी आक्रामक भाषा कांग्रेस के समर्थकों को पसंद आ सकती है, लेकिन चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाने वाले तटस्थ मतदाताओं पर इसका उल्टा असर पड़ सकता है। बीजेपी के समर्थक भी ऐसी टिप्पणियों के बाद ज्यादा आक्रामक तरीके से पार्टी के पक्ष में खड़े हो सकते हैं। हालांकि, राहुल गांधी के बयान की एक अलग व्याख्या भी सामने आई। कहा गया कि उनके ‘पागल कर देंगे’ वाले बयान को प्रधानमंत्री और सरकार को उनकी रणनीति के मुताबिक चुनौती देने के संदर्भ में भी देखा जा सकता है।
बीजेपी ने भी राहुल गांधी पर किया हमला
राहुल गांधी के बयान के बाद बीजेपी ने भी उन पर तीखा हमला बोला। रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी को ‘मूर्ख, गैर-जिम्मेदार, अपरिपक्व और दोषी’ जैसे शब्दों से निशाना बनाया। शो के दौरान विश्लेषकों द्वारा कहा गया कि बीजेपी की प्रतिक्रिया राजनीतिक शब्दावली के दायरे में रही, जबकि राहुल गांधी की भाषा ज्यादा व्यक्तिगत और आक्रामक नजर आई। चर्चा में यह भी कहा गया कि बीजेपी के बड़े नेता आमतौर पर ऐसी व्यक्तिगत टिप्पणियों का जवाब उसी भाषा में देने से बचते हैं। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर भी चर्चा हुई। बीजेपी समर्थकों में इस बात को लेकर नाराजगी का जिक्र किया गया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों लिया गया। यह दावा भी सामने आया कि कुछ बीजेपी समर्थक इसे पार्टी के लिए नुकसानदेह मानते हैं। वहीं, जंतर-मंतर के प्रदर्शन की तुलना झारखंड में हुए छात्र आंदोलन से किए जाने पर भी चर्चा हुई। कहा गया कि दोनों जगह प्रदर्शन के तरीके और पुलिस की कार्रवाई को लेकर लोग तुलना कर रहे हैं।
संसद नहीं चलने से किसका नुकसान?
चर्चा के दौरान संसद के पूरे सत्र में विपक्ष के रवैये पर भी सवाल उठे। कहा गया कि संसद विपक्ष के लिए सरकार को घेरने, सवाल पूछने और अपनी नीतियां जनता तक पहुंचाने का सबसे बड़ा मंच है। कांग्रेस ने संसद सत्र की अपनी उपलब्धियों में वन नेशन-वन इलेक्शन, उच्च शिक्षा से जुड़े प्रस्ताव, पीएमसीएम और एफसीआरए जैसे मुद्दों पर सरकार को रोकने तथा परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों को आगे न बढ़ने देने को गिनाया। इसके जवाब में कहा गया कि सरकार के पास 12 विधेयक थे, जिनमें से कई पारित हुए। अगर विपक्ष संसद में चर्चा करता तो उसे सरकार से सवाल पूछने और अपने सुझाव रखने का ज्यादा मौका मिलता।
यूपी चुनाव पर भी नजर
चर्चा में उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को राहुल गांधी और बीजेपी दोनों के लिए अहम बताया गया। राहुल गांधी की रणनीति का असर समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर पड़ने की संभावना पर भी बात हुई। यह भी कहा गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तीसरे कार्यकाल को लेकर चुनाव उनकी सरकार के प्रदर्शन और उनके नाम पर लड़ा जाएगा। वहीं, अखिलेश यादव के लिए 2017 में मिली 47 सीटों को ऊपरी सीमा बताते हुए बीजेपी के 300 से ज्यादा सीटों के प्रदर्शन का जिक्र किया गया। पंजाब को लेकर मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा में कहा गया कि फिलहाल आम आदमी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है और विधानसभा में त्रिशंकु स्थिति की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
डिटेल में पूरी चर्चा देखने के लिए सबसे ऊपर दिए गए वीडियो पर क्लिक करें।
(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)







