हार गए रिश्ते! वृद्धाश्रम में कपड़ा व्यापारी ने तोड़ा दम, अंतिम दर्शन के लिए नहीं आई 3 बेटियां, 5100 रुपये ट्रांसफर कर बोलीं- अंतिम संस्कार की वीडियो भेज देना

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें


समाज किस दिशा में जा रहा है, यह सवाल तब और गहरा हो जाता है जब बच्चों के पास अपने माता-पिता के अंतिम दर्शन के लिए भी समय नहीं होता। हरियाणा के सोनीपत से रिश्तों की सच्चाई को उजागर करने वाला एक ऐसा ही हृदय विदारक मामला सामने आया है। एक पिता ने अपनी बेटियों से मिलने की चाहत में दम तोड़ दिया, लेकिन बेटियों के पास पिता के अंतिम दर्शन के लिए भी समय नहीं था। वृद्ध आश्रम में रह रहे एक कपड़ा व्यापारी की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार में कोई अपना नहीं पहुंचा।

बेटियों को कामयाब बनाया, लेकिन अंतिम सांस तक इंतजार करते रहे पिता

जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के रहने वाले कपड़ा व्यापारी शिवचरण रतन गुप्ता (74) करीब डेढ़ साल पहले अपनी पत्नी मीना गुप्ता के साथ सोनीपत वृद्ध आश्रम में आए थे। उनका कोई बेटा नहीं था, उन्होंने अपनी तीन बेटियों को पढ़ा-लिखाकर कामयाब बनाया, जिनमें से दो को उन्होंने अध्यापिका बनाया। उनकी पत्नी मीना गुप्ता का पहले ही निधन हो चुका था। वृद्ध आश्रम के संचालक आनंद ने 20 दिन पहले शिवचरण रतन गुप्ता की बीमारी की सूचना उनकी बेटियों अनिता, निशा और प्रिया को दी थी। लेकिन तीनों बेटियों ने बहाने बनाए और शिवचरण गुप्ता के पास नहीं पहुंचीं।

बेटियों से बात करने के लिए मोबाइल रखते थे शिवचरण

वृद्ध आश्रम संचालक आनंद ने बताया कि बेटियों से बात करने के लिए शिवचरण गुप्ता एक फोन रखते थे और उनसे बात करते थे लेकिन बीमार होने के बाद उनकी बेटियों के फोन आने बंद हो गए थे। जब हमने इसकी सूचना दी तब भी वे नहीं पहुंचीं। देर रात मृत्यु होने के बाद भी हमने कहा कि अगर आप आ रहे हैं तो हम शव को रखवा देते हैं लेकिन उन्होंने समय न होने का बहाना बनाया। 

5100 रुपये भेजकर कहा- सही ढंग से अंतिम संस्कार कर देना

शिवचरण गुप्ता की बड़ी बेटी अनीता नेपाल में रहती है और वहीं पर टीचर है। अनीता से छोटी बेटी निशा यूपी आजमगढ़ में रहती है और सबसे छोटी बेटी प्रिया मुंबई में ही रहती है। तीनों बेटियों को कामयाब करने के बाद भी अपने अंतिम समय में शिवचरण गुप्ता अपनी बेटियों को नहीं देख पाए और बेटियां भी अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुई। बेटियों ने वीडियो कॉल के जरिए अंतिम संस्कार देखा। अध्यापिका बेटी अनिता ने ऑनलाइन 5100 रुपये भेजकर कहा कि पिता का सही ढंग से अंतिम संस्कार कर दिया जाए।

‘अस्थियां प्रवाहित करने के लिए भी समय नहीं’

वृद्ध आश्रम संचालक ने बताया, पहले बेटियों ने कहा था कि अस्थियां रख देना, लेकिन बाद में कहा कि उनके पास समय नहीं है, इसलिए वृद्ध आश्रम संचालक ही गंगा में अस्थियां प्रवाहित कर दें। अंतिम संस्कार के बाद वीडियो कॉल पर ही बेटियों ने कहा कि अंतिम संस्कार की सभी वीडियो उनके पास भेज दी जाएं।

हार गए रिश्ते, जीत गई इंसानियत

बता दें कि यह मामला शिवचरण गुप्ता का नहीं बल्कि समाज की सच्चाई को उजागर कर रहा है जहां पैसे की भाग दौड़ मैं सब इतना व्यस्त हो गए हैं कि वह अपनों के लिए भी समय नहीं रहा। हालांकि शिवचरण गुप्ता एक समय पर बड़े कपड़ा व्यापारी थे और उन्होंने पैसे भी बहुत कमाए थे। लेकिन शायद वह अपनी बेटियों को संस्कार देने भूल गए और यही कारण है कि उनकी बेटियों ने उनके संसार से विदा होने के बाद भी अंतिम दर्शन तक नहीं किए। शिवचरण का अंतिम संस्कार करने वाले संस्था के लोगों का कहना है कि आज के समय बच्चों को संस्कार देने बहुत जरूरी है क्योंकि बच्चे बहुत ज्यादा व्यस्त हैं लेकिन उन्हें अपनेपन का एहसास कराना जरूरी है। 

(रिपोर्ट- सन्नी मलिक)

यह भी पढ़ें-

पंचकूला में रिटायर्ड कैप्टन की पत्नी की हत्या का खुलासा, पुलिस ने मेड को पति और बेटे के साथ किया गिरफ्तार

VIDEO: बच्चों को पढ़ाने पहुंची थी टीचर, नकाबपोश हमलावर पहुंचा स्कूल, 30 सेकंड में 34 बार किया चाकू से हमला, गई जान





Source link

Leave a Comment

और पढ़ें