मंत्रिमंडल में नागेंद्र की वापसी पर शिवकुमार का बड़ा बयान, बोले- “घोटाले में उनका हाथ नहीं”; जल्द शामिल होगी महिला मंत्री

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बुधवार को कहा कि बी. नागेंद्र को मंत्रिमंडल में इस आधार पर शामिल किया गया कि आधिकारिक जांच रिपोर्ट में उन्हें कथित वाल्मीकि निगम घोटाले में शामिल नहीं पाया गया। उन्होंने कहा कि घोटाले को लेकर नागेंद्र ने पहले इस्तीफा दिया था, लेकिन जांच के बाद रिपोर्ट में उनकी संलिप्तता नहीं मिलने पर उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।

शिवकुमार ने कहा, “यह नागेंद्र ने नहीं किया था।” उन्होंने दावा किया कि मामले की जांच के दौरान कथित तौर पर घोटाले की 95 प्रतिशत धनराशि बरामद कर ली गई।

जल्द होगी महिला मंत्री की नियुक्ति

एक कार्यक्रम में कर्नाटक मंत्रिमंडल में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर पूछे गए सवाल पर शिवकुमार ने कहा कि जल्द ही एक महिला को मंत्री बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी महिला सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। शिवकुमार ने बताया कि मंत्रिमंडल में महिला मंत्री को शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है और अगले कुछ दिनों में नियुक्ति हो सकती है। 

बता दें कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार 03 अगस्त 2026 को बेंगलुरु के राजभवन (ग्लास हाउस) में संपन्न हुआ था। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई थी। मंत्रिमंडल विस्तार में 19 मंत्रियों को शामिल किया गया था। कांग्रेस ने 20 नामों की घोषणा की थी, जिसमें विधान परिषद सदस्य गायत्री शांतिगौड़ा का नाम भी शामिल था, लेकिन अंतिम समय में उनका नाम हटा दिया गया। वर्तमान में कर्नाटक में 34 स्वीकृत मंत्री पदों के मुकाबले 33 मंत्री हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि एक पद महिला मंत्री को शामिल करने के लिए खाली रखा गया है।

कावेरी जल पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन

कावेरी जल विवाद पर मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करेगा। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को कावेरी नदी का पानी छोड़ने के संबंध में राज्य सरकार अदालत के आदेश के अनुरूप कार्रवाई करेगी। उन्होंने कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य बेंगलुरु और तमिलनाडु की पेयजल जरूरतों को पूरा करना है। उन्होंने परियोजना को कर्नाटक की जल जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण बताया।

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