Flexibility Vs Strength In Life : जब भी हौसले या ताकत की बात आती है, तो हम सब खुद को ‘शेर’ की तरह देखने की कोशिश करते हैं. कहानियों से लेकर मोटिवेशनल रील्स तक, हमें हमेशा ‘शेर जैसी दहाड़’ और ‘जंगल के राजा जैसी ताकत’ बनने की सलाह दी जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि असल जिंदगी में शेर बनने से कहीं ज़्यादा फायदेमंद ‘कॉकरोच’ बनना है? सुनने में यह थोड़ा अजीब और शायद थोड़ा घिनौना भी लग सकता है, लेकिन मशहूर लेखक चेतन भगत ने हाल ही में एक टॉक शो में यही बात कही है. उनके अनुसार, जिंदगी की असली ताकत इस बात में नहीं है कि आप कितने ताकतवर हैं, बल्कि इस बात में है कि आप बदलते हालात के साथ खुद को कितनी जल्दी ढाल लेते हैं. आइए जानते हैं कि चेतन भगत ने ऐसा क्यों कहा और इसमें हमारी लाइफ, करियर और रिश्तों को बेहतर बनाने का क्या सीक्रेट छिपा है.
सिर्फ ताकत हमेशा काम नहीं आती!
चेतन भगत का कहना है कि हम शेर को अपनी प्रेरणा (इंसपिरेशन) इसलिए मानते हैं क्योंकि वह ताकतवर दिखता है और उसका एक रुतबा होता है. लेकिन असल जिंदगी सिर्फ ताकत के भरोसे नहीं चलती. जब परिस्थितियां बदलती हैं, सूखा पड़ता है या जंगल का माहौल बदलता है, तो शेर के लिए भी सर्वाइव करना मुश्किल हो जाता है.
दूसरी तरफ है कॉकरोच. इसे कोई पसंद नहीं करता, यह दिखने में भी अच्छा नहीं होता, लेकिन इसके पास एक सुपरपावर है- एडैप्टेबिलिटी (Adaptability यानी लचीलापन). कॉकरोच का पूरा फोकस अपनी ताकत का प्रदर्शन करने या दूसरों को डराने पर नहीं होता, बल्कि उसका इकलौता मकसद होता है ‘जिंदा रहना’ (सर्वाइव करना). यही वजह है कि चाहे कड़ाके की ठंड हो, तपती गर्मी हो, या फिर कोई बड़ी आपदा, कॉकरोच हर माहौल में खुद को ढालकर जिंदा बच निकलता है.
चार्ल्स डार्विन की थ्योरी और कॉकरोच का कनेक्शन-
अपनी बात को वैज्ञानिक आधार देते हुए चेतन भगत ने मशहूर वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन की ‘थ्योरी ऑफ इवोल्यूशन’ (विकासवाद का सिद्धांत) का उदाहरण दिया. डार्विन ने सालों पहले कहा था कि दुनिया में वो जीव आगे नहीं बढ़ता जो सबसे ज़्यादा ताकतवर या सबसे ज़्यादा बुद्धिमान होता है, बल्कि इतिहास में वही टिक पाता है जो ‘बदलते माहौल के अनुसार खुद को सबसे जल्दी बदल लेता है.’ डायनासोर इतिहास के सबसे ताकतवर जीव थे, लेकिन जब मौसम बदला, तो वे खुद को ढाल नहीं पाए और पूरी तरह खत्म हो गए. वहीं दूसरी ओर, छोटे और कमजोर दिखने वाले जीव आज भी धरती पर राज कर रहे हैं.
हमारी लाइफ और रिलेशंस के लिए क्या है सीख?
अगर इस ‘कॉकरोच फॉर्मूले’ को हम अपनी असल जिंदगी में लागू करें, तो यह हमारे करियर और रिश्तों को बचा सकता है:
करियर में लचीलापन: आज की कॉर्पोरेट दुनिया या बिजनेस का माहौल तेजी से बदल रहा है. नई टेक्नोलॉजी और एआई (AI) के आने से कई पुरानी चीजें खत्म हो रही हैं. ऐसे में अगर आप शेर की तरह अकड़ कर बैठे रहेंगे कि ‘मैं तो अपना तरीका नहीं बदलूंगा’, तो आप पीछे छूट जाएंगे. आपको कॉकरोच की तरह लचीला बनना होगा और नई चीजें सीखनी होंगी.
रिश्तों में एडजस्टमेंट: रिश्तों में भी हमेशा अपनी ताकत या ईगो (अहंकार) दिखाना सही नहीं होता. जो इंसान हर छोटी बात पर अड़ जाता है, उसके रिश्ते टूट जाते हैं. इसके विपरीत, जो व्यक्ति हालात और सामने वाले की बात को समझकर थोड़ा झुक जाता है या एडजस्ट कर लेता है, उसका रिश्ता हमेशा लंबा और मज़बूत चलता है.
तो अगली बार जब जिंदगी आपके सामने कोई बड़ी चुनौती या मुश्किल खड़ी करे, तो शेर की तरह सिर्फ गुस्सा दिखाने के बजाय, कॉकरोच का ‘सर्वाइवल मोड’ ऑन कीजिए. हालात से लड़कर टूटने से बेहतर है, हालात के मुताबिक खुद को बदलकर आगे बढ़ जाना!








