आठवां अवतार, 8वीं संतान और अष्टमी तिथि, जानिए कैसे ‘8 अंक’ के प्रभाव से जुड़ी हैं भगवान कृष्ण की हर एक लीला

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भगवान कृष्ण के जन्म से लेकर उनकी समस्त लीलाओं तक यह खास अंक हर कदम पर दिखाई देता है। आइए जानते हैं इसके पीछे के दिलचस्प और चौंकाने वाले रहस्य।

Published : Sep 02, 2026 10:12 am IST,  Updated : Sep 02, 2026 10:20 am IST

भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण के जीवन से अंक '8' का एक बेहद गहरा और अलौकिक कनेक्शन देखने को मिलता है। फिर चाहे बात कान्हा के जन्म की तिथि 'अष्टमी' की हो या फिर उनकी 'अष्ट पटरानियों' की, उनकी हर लीला में यह जादुई अंक नजर आता है। आइए जानते हैं कि कैसे यह खास अंक भगवान कृष्ण के पूरे जीवन को प्रभावित करता है।

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भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्री कृष्ण के जीवन से अंक ‘8’ का एक बेहद गहरा और अलौकिक कनेक्शन देखने को मिलता है। फिर चाहे बात कान्हा के जन्म की तिथि ‘अष्टमी’ की हो या फिर उनकी ‘अष्ट पटरानियों’ की, उनकी हर लीला में यह जादुई अंक नजर आता है। आइए जानते हैं कि कैसे यह खास अंक भगवान कृष्ण के पूरे जीवन को प्रभावित करता है।
भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में जन्म: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्री कृष्ण को भगवान विष्णु का पूर्ण और आठवां अवतार माना गया है।

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भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में जन्म: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्री कृष्ण को भगवान विष्णु का पूर्ण और आठवां अवतार माना गया है।
भगवान कृष्ण का अष्टमी तिथि पर जन्म: पौराणिक कथाओं अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। इसलिए उनका जन्मोत्सव 'जन्माष्टमी' के रूप में मनाया जाता है। भगवान कृष्ण की जन्म तिथि पर भी अंक 8 का प्रभाव देखने को मिलता है।

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भगवान कृष्ण का अष्टमी तिथि पर जन्म: पौराणिक कथाओं अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। इसलिए उनका जन्मोत्सव ‘जन्माष्टमी’ के रूप में मनाया जाता है। भगवान कृष्ण की जन्म तिथि पर भी अंक 8 का प्रभाव देखने को मिलता है।
देवकी-वसुदेव की आठवीं संतान के रूप में जन्म: भगवान कृष्ण माता देवकी और वसुदेव की आठवीं संतान हैं। यहां भी अंक 8 का प्रभाव देखने को मिलता है।

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देवकी-वसुदेव की आठवीं संतान के रूप में जन्म: भगवान कृष्ण माता देवकी और वसुदेव की आठवीं संतान हैं। यहां भी अंक 8 का प्रभाव देखने को मिलता है।
अष्ट सिद्धियों के ज्ञाता: श्रीकृष्ण न केवल अष्ट सिद्धियों के ज्ञाता हैं, बल्कि इन सभी चमत्कारी शक्तियों के मूल उद्गम (स्रोत) और दाता भी वही हैं।

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अष्ट सिद्धियों के ज्ञाता: श्रीकृष्ण न केवल अष्ट सिद्धियों के ज्ञाता हैं, बल्कि इन सभी चमत्कारी शक्तियों के मूल उद्गम (स्रोत) और दाता भी वही हैं।
अष्ट पटरानियां: भगवान श्रीकृष्ण की मुख्य पटरानियों की संख्या भी आठ ही हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, श्री कृष्ण की मुख्य आठ पटरानियां रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, कालिंदी, मित्रविंदा, सत्या, लक्ष्मणा और भद्रा हैं।

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अष्ट पटरानियां: भगवान श्रीकृष्ण की मुख्य पटरानियों की संख्या भी आठ ही हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, श्री कृष्ण की मुख्य आठ पटरानियां रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, कालिंदी, मित्रविंदा, सत्या, लक्ष्मणा और भद्रा हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्री कृष्ण भगवान ने पृथ्वी पर लगभग 125 वर्ष का जीवन बिताया था। यदि 125 के अंकों को आपस में जोड़ा जाए (1 + 2 + 5), तो इसका योग भी 8 ही आता है।

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्री कृष्ण भगवान ने पृथ्वी पर लगभग 125 वर्ष का जीवन बिताया था। यदि 125 के अंकों को आपस में जोड़ा जाए (1 + 2 + 5), तो इसका योग भी 8 ही आता है।





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