उत्तर प्रदेश के नोएडा में अभी हाल ही में सेक्टर 51 मेट्रो स्टेशन पर स्काईवॉक को शुरू किया गया है जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही हैं। इस स्काईवॉक पर रोजना हजारों की तादात में लोग आवाजाही कर रहे हैं। मगर, आम बोलचाल की भाषा में या जानकारी के अभाव में कई बार लोग इसे ओवरब्रिज भी कह देते हैं। भारतीय शहरों में पैदल यात्रियों और यातायात की सुरक्षा की दृष्टि से बनाई जाने वाली दो सामान्य संरचानाओं यानी ओवरब्रिज और स्काईवॉक को प्राय: एक जैसा समझ लिया जाता है जबकि इनके उद्देश्य, डिजाइन और उपयोग में काफी अंतर होता है। आज हम आपको इन्हीं अंतरों से अवगत कराएंगे।
पहले ओवरब्रिज को समझें
दरअसल, ओवरब्रिज या ओवरपास एक पुल, सड़क या रेलवे संरचना है जो किसी अन्य सड़क या रेलवे के ऊपर से गुजरती है। ये ग्रेड सेपरेशन बनाता है ताकि यातायात बिना किसी रुकावट सुचारू रूप से चले। इनको कई बार लोग फ्लाईओवर भी कह देते हैं। भारत में ओवरब्रिज दो तरह के होते हैं:
- रोड ओवर ब्रिज : रेलवे ट्रैक के ऊपर वाहनों के लिए
- फुट ओवर ब्रिज : पैदल यात्रियों के सड़क या रेलवे पार करने वाला छोटा पुल
आमतौर पर इनका उद्देश्य सुरक्षा और रुकावट रहित आवाजाही सुनिश्चित कराना है। ये साइज में छोटा और सीढ़ियों वाला सामान्य डिजाइन वाला होता है।
अब स्काईवॉक के बारे में जानें
स्काईवॉक, स्काईब्रिज, स्काईवे या स्काई वॉकवे एक एलिवेटेड पैदल पथ है जो शहरी क्षेत्र में दो या उससे अधिक इमारतों को जोड़ने का काम करता है या फिर पहाड़ी क्षेत्रों में ऊंचे बिंदुओ को। शहर में बनने वाले स्काईवॉक प्राय: बंद या कवर किए गए फुटब्रिज होते हैं जो मौसम संबंधित गतिविधयों जैसे धूप, बारिश, आंधी या ओले से सुरक्षा देने का काम भी करते हैं।

Image Source : PTI नोएडा सेक्टर 52 के मेट्रो स्टेशन पर तैयार स्काईवॉक।
खास बात ये है कि मेट्रोपॉलिटन रीजन में पैदल स्काईवॉक की शृंखला है जो उपनगरीय रेलवे-मेट्रो स्टेशन व व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्रों को बस-टैक्सी स्टैंड आदि से जोड़ती है। इनका उद्देश्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों से यात्रियों का सुरक्षित और कुशल आवागमन और वितरण सुनिश्चित कराना है।
ओवरब्रिज और स्काईवॉक में अंतर
| अंतर का आधार | ओवरब्रिज | स्काईवॉक |
| उद्देश्य | ये वाहनों या पैदल यात्रियों दोनों के लिए है खासकर रेलवे क्रॉसिंग पर। | ये मुख्य रूप से पैदल यात्रियों के लिए है और लंबे मार्गों या कई बिंदुओं को जोड़ता है। |
| लंबाई और सुविधाएं | इसकी लंबाई काफी सामान्य होती है और आवश्यकता पर निर्भर करती है। | द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के एक प्रोजेक्ट में स्काईवॉक को फुट ओवरब्रिज से लंबा बताया गया। इसमें स्टील, ओवरहेड कैनोपी और कियोस्क जैसी सुविधाएं होती हैं। |
| डिजाइन | फुट ओवरब्रिज प्राय: साधारण और छोटे होते हैं। | स्काईवॉक अत्याधुनिक, प्राय: कवर किए गए और नेटवर्क रूप में होते हैं। |
| अन्य अंतर | भारतीय शहरों पर आधारित अध्ययनों में फुट ओवर ब्रिज और स्काईवॉक को अलग-अलग एलिवेटेड सुविधाओं के रूप में देखा गया है। | स्काईवॉक पर पैदल यात्रियों की औसत गति ओवर ब्रिज की तुलना में अधिक पाई गई। |
संक्षेप में ओवरब्रिज और स्काईवॉक में अंतर
बता दें कि, मुख्य रूप से किसी बाधा (सड़क/रेलवे) के ऊपर से सुरक्षित पार करने का माध्यम है। जबकि स्काईवॉक शहरी क्षेत्रों में लंबे, सुविधाजनक और अक्सर कवर किए गए पैदल मार्ग के रूप में विकसित हुआ है जो कई स्थानों को जोड़ता है। जैसे- नोएडा के सेक्टर 51 के मेट्रो स्टेशन पर बना स्काईवॉक उसे सेक्टर 52 मेट्रो से जोड़ता है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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